दुनियाभर में हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज और फेफड़े की बीमारियों को मृत्यु के प्रमुख जोखिम कारक के रूप में जाना जाता है, हालांकि कुछ स्थितियां बीमारी न होते हुए भी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बन रही हैं। वैश्विक स्तर पर साल दर साल बढ़ता तापमान उनमें से ही एक है।
द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में हाल ही में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि अस्थिर तापमान के कारण साल 2000 से 2019 तक हर साल औसतन 1.75 मिलियन (17.5 लाख) मौत हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है और हर साल तापमान का स्तर नई ऊंचाइयों पर पहुंचता जा रहा है, ऐसे में मौतों के इस आंकड़े के बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देश मौजूदा समय में बढ़ते तापमान के शिकार हैं। इस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मई महीने की शुरुआत में ही देश के कई राज्यों में पारा 45 डिग्री को पार कर गया है। वहीं विशेषज्ञों की मानें तो आदर्श रूप से इंसान का शरीर 35-37 डिग्री तक का ही ताप सहन कर सकता है। ऐसे में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण कई तरह की जानलेवा समस्याओं का जोखिम बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिकों ने अफसोस जताई है कि फिलहाल इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर कोई ठोस नीति नजर नहीं आ रही है।