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सावधान: विटामिन डी की कमी और अधिकता दोनो हैं खतरनाक, इस मात्रा से ज्यादा न करें सेवन

Thu, 20 May 2021 11:42 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विटामिन डी शरीर के लिए बेहद जरूरी - फोटो : Pixabay
कोरोना की इस विपरीत परिस्थिति से मुकाबले के लिए लोग तरह-तरह के उपायों को प्रयोग में ला रहे हैं। कोई विटामिन डी का बहुत अधिक सेवन कर रहा है तो कोई योग और प्राणायाम से अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उचित पोषण, व्यायाम और पर्याप्त आराम की जरूरत होती है। आमतौर पर भोजन से हमारी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं जिसके लिए लोगों को विटामिन के कैप्सूल और सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है। पर क्या आप इसकी सही मात्रा के बारे में जानते हैं? विशेषज्ञ कहते हैं कि विटामिन डी की कमी और अधिकता दोनों ही नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए इसकी सही मात्रा के बारे में लोगों को पता होना काफी जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं।
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कोविड रोगियों को दी जा रही है विटामिन डी के सेवन की सलाह - फोटो : iStock
कोविड में विटामिन डी की भूमिका
कई अध्ययनों से पता चला है कि कोविड-19 के रोगियों में विटामिन डी का स्तर काफी कम पाया गया है। इसके अलावा रोगियों में बुखार काफी ज्यादा हो जाता है, यह भी शरीर में विटामिन डी के स्तर को कम कर देता है। इसके अतिरिक्त अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि विटामिन डी की कमी वाले कोविड -19 संक्रमितों में संक्रमण गंभीर होने के साथ मृत्यु का भी खतरा अधिक हो सकता है। यही कारण है कि लोगों को कोविड के समय में विटामिन डी के सेवन की सलाह दी जाती है। विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वास्थ्य रखने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
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विटामिन डी की सही मात्रा के बारे में जानिए - फोटो : Social media
विटामिन डी के सेवन की सही मात्रा क्या है?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार सभी लोगों को 400 आईयू/दिन की मात्रा में विटामिन डी का सेवन करना चाहिए। अमेरिका में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं सहित ज्यादातर लोगों को प्रतिदिन लगभग 10 माइक्रोग्राम की मात्रा में विटामिन डी के सेवन की सलाह दी जाती है। एक साल से कम उम्र के बच्चों को रोजाना 8.5 से 10 माइक्रोग्राम की मात्रा में विटामिन डी का जरूरत होती है।

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विटामिन डी की कमी से कैंसर जैसी समस्या हो सकती है - फोटो : Social media
विटामिन डी का कमी से होने वाली समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन डी की कमी के चलते लोगों को हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या हो सकती है। हालांकि कई लोगों में लक्षण सूक्ष्म होने के बावजूद विटामिन डी की कमी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है। विटामिन डी की कमी के चलते इस तरह की दिक्कतें होती हैं।
  • हृदय रोगों के कारण होने वाली मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है।
  • उम्रदराज लोगों को संज्ञानात्मक समस्याओं का खतरा।
  • बच्चों में गंभीर अस्थमा की आशंका
  • कैंसर का डर।
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विटामिन डी विषाक्तता एक गंभीर समस्या है - फोटो : social media
विटामिन डी की अधिकता के कारण होने वाली दिक्कतें
डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा मात्रा में विटामिन डी की गोलियों या सप्लीमेंट्स के सेवन के कारण विटामिन डी विषाक्तता हो सकती है। हालांकि इस तरह की दिक्कतें आहार या सूर्य से मिलने वाली विटामिन डी के कारण नहीं होती हैं, इसका खतरा ज्यादा मात्रा में  सप्लीमेंट्स के सेवन के कारण ही होती हैं। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में विशेषज्ञ बताते हैं कि वैसे तो विटामिन डी विषाक्तता एक दुर्लभ समस्या है, फिर भी अगर इसे तुरंत पहचाना नहीं गया तो स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव काफी गंभीर हो सकता है।
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विटामिन डी की अधिकता के लक्षणों को पहचानें - फोटो : iStock
विटामिन डी विषाक्तता की पहचान कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके लक्षणों की समय पर पहचान करना बेहद आवश्यक है। विटामिन डी की अधिकता के कारण होने वाली विषाक्तता में लोगों को निम्न तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। यह समस्याएं अगर कुछ दिनों तक बनी रहती हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर को जरूर सूचित करना चाहिए। 
  • जी मिचलाना-उल्टी
  • बार-बार पेशाब आना
  • भूख में कमी
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना।
  • निर्जलीकरण की समस्या होना।
  • कब्ज़ की दिक्कत।
  • मांसपेशियों में कमजोरी
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नोट:
 यह लेख आहार और पोषण विशेषज्ञ  प्रिया पांडेय के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ प्रिया अनुभवी डायटिशियन (आहार विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने कानपुर के सी.एस.जे.एम. विश्वविद्यालय से मानव पोषण में बी.एस.सी. किया है। उन्होंने कानपुर के आभा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आहार विशेषज्ञ के रूप में काम किया है। उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पोषण व्याख्यान के विषय के प्रतिनिधि के रूप में भी भाग लिया है। उनका इस क्षेत्र में 8 वर्ष का लंबा अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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