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ब्रेन हेल्थ: दिमाग के बूढ़ा होने से पहले ही दिखने लगते हैं ये संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Thu, 10 Sep 2026 04:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिमाग की उम्र बढ़ने का असर केवल याददाश्त कमजोर होने से नहीं दिखता। सही शब्द खोजने, चीजें समझने, फैसला लेने, रोजमर्रा के काम करने और व्यवहार में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। लगातार ऐसे बदलाव दिखाई दें तो उन्हें सिर्फ उम्र का असर मानने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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ब्रेन से संबंधित समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
उम्र बढ़ना सामान्य प्रक्रिया है, इसके साथ शरीर में कई तरह के बदलाव भी आने शुरू हो जाते हैं। 50-55 की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां कम होने लगती हैं, ताकत घटने लगती है और आपके लिए जीवन के सामान्य कामकाज करना भी मुश्किल हो जाता है। महिलाओं में 50 की उम्र के बाद मेनोपॉज के कारण होने वाली समस्याओं का खतरा और भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ चिंता सिर्फ शारीरिक समस्याओं की नहीं है, इसका असर आपकी दिमागी सेहत और मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। 60 की उम्र में आमतौर पर याददाश्त कमजोर होने लगती है और निर्णय लेने की क्षमता भी घट जाती है। लेकिन हर भूलने की आदत  को उम्र का असर मान लेना सही नहीं है। 

दिमाग की कार्यक्षमता में बदलाव कई बार धीरे-धीरे शुरू होते हैं और आपको लंबे समय तक इसका एहसास भी नहीं होता। कई बार इस तरह की समस्याएं 50 से कम उम्र वालों में भी हो सकती हैं।  
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ब्रेन में होने वाले बदलावों को समझिए - फोटो : Freepik.com
ब्रेन हेल्थ की समस्याएं

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के अनुसार
, याददाश्त में परेशानी को आमतौर पर अल्जाइमर-डिमेंशिया जैसी बीमारी के शुरुआती संकेतों के तौर पर जाना जाता है। लेकिन केवल चीजों के भूलने से यह साबित नहीं होता कि आपको डिमेंशिया हो गया है।
 
  • ब्रेन हेल्थ को केवल याददाश्त कम होने की दिक्कत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। शरीर और व्यवहार में आने वाले कई बदलाव भी दिमाग की स्थिति के बारे में पहले से संकेत दे सकते हैं। समय रहते इन्हें पहचानना जरूरी है।
  • कुछ स्थितियों में समय पर डॉक्टरी मदद आपकी दिक्कतों को बढ़ने से बचाने में मददगार हो सकती है।
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मेमोरी कमजोर होने के संकेत - फोटो : Freepik.com
क्या आपकी याददाश्त हो रही है कमजोर?

कभी-कभार नाम या कोई छोटी बात भूल जाना आमतौर पर सामान्य माना जाता है, ये दिक्कत बच्चों-किशोरों में भी हो सकती है। हालांकि अगर भूलने की समस्या बार-बार होने लगे और इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगें तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। 
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एक ही सवाल बार-बार पूछना, हाल में हुई महत्वपूर्ण घटनाओं को याद न कर पाना ऐसे संकेत हैं जिनपर कम उम्र से भी ध्यान देना चाहिए। 40 से कम उम्र में ये दिक्कतें हो रही हैं तो तुरंत डॉक्टरी मदद लें।

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ब्रेन हेल्थ में बदलाव - फोटो : Freepik.com
बात को समझने के लिए करनी पड़ती है ज्यादा मेहनत?
 
  • ब्रेन हेल्थ में बदलावों को सिर्फ याददाश्त में कमी से नहीं समझा जा सकता। यदि बातचीत करते समय सामान्य शब्द न मिलें, किसी बात को समझने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे, चीजों की दिशा या जगह समझने में दिक्कत हो और सही फैसला लेने की क्षमता में कमी आ रही हो तो अलर्ट हो जाएं। अगर ये बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

पहले जैसा काम करना हो गया है मुश्किल
  • जिस काम को आप लंबे समय से आसानी से करते आ रहे हों, उसमें अचानक परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रोजमर्रा के काम में बार-बार भ्रम, काम पूरा करने में कठिनाई या पहले से सीखी चीजों को करने में दिक्कत होना संज्ञानात्मक क्षमता में बदलाव का संकेत हो सकता है।
  • संज्ञानात्मक क्षमता यानी चीजों को याद रखने, समझने, सोचने और फैसला लेने की दिमागी क्षमता में कमी के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें समय रहते डॉक्टरी मदद आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है।
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ब्रेन में होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
व्यवहार में बदलाव तो नहीं?

दिमाग में होने वाले बदलाव केवल चीजों के भूलने तक सीमित नहीं होते। कई बार इससे आपमें भ्रम बढ़ने और व्यवहार में बदलाव जैसी समस्या आने का भी खतरा हो सकता है।

अगर आपको लगता है कि परिवार में किसी के व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया है, वह लंबे समय तक सोचता रहता है, चीजों को पहले जैसे समझने में दिक्कत हो रही है तो इसपर तुरंत डॉक्टरी मदद लें। कई बार कम उम्र में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी ऐसी दिक्कतें हो सकती हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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