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जानना जरूरी: सीढ़ियां चढ़ते वक्त पैरों में होता है दर्द? कहीं यह हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से तो नहीं

Sat, 19 Nov 2022 04:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीढ़ियां चढ़ने की दिक्कत - फोटो : Getty Images
आर्थराइटिस यानी कि गठिया की समस्या के कारण अक्सर लोगों को दौड़ने, ज्यादा दूर चलने या फिर सीढ़ियां चढ़ने की दिक्कत हो सकती है। पर क्या आप जानते हैं कि सीढ़ियां चढ़ते समय होने वाली इस प्रकार की समस्या हाई कोलेस्ट्रॉल का भी संकेत हो सकती है? यानी कि अगर आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है तो इस वजह से भी आपको पैरों की दिक्कत हो सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या के शिकार लोगों में पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (पीएडी) का खतरा अधिक होता है, जिसमें हाथों और पैरों से संबंधित कई प्रकार की दिक्कतें होती रह सकती हैं।

आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या को हृदय रोगों और धमनियों की दिक्कत से जोड़कर देखा जाता है पर इसका असर शरीर पर और भी कई प्रकार से हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसे अनुपचारित ही छोड़ दिया जाए तो इसके कारण धमनियों के विकार विकसित हो सकते हैं। इस तरह के विकारों के कारण मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन होने का जोखिम रहता है।

सभी लोगों को कोलेस्ट्रॉल के लक्षणों पर ध्यान देते रहना और इससे बचाव के उपाय करना जरूरी होता है। आइए इसके पैरों और हाथों पर होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं।
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कोलेस्ट्रॉल के कारण पैर में दर्द - फोटो : getty images
हाई कोलेस्ट्रॉल और पेरिफेरल आर्टरी डिजीज

कार्डियोवास्कुलर लैब्स ऑफ अमेरिका (सीएलए) के अनुसार, लगातार कोलेस्ट्रॉल के स्तर में बनी रहने वाली वृद्धि, समय के साथ पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (पीएडी) के खतरे को बढ़ा सकती है। इसके कारण पैरों में भारीपन महसूस होता रहता है, इसे शुरुआती संकेत माना जाता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली पीएडी की दिक्कत पैरों में कमजोरी, सुन्न होने, त्वचा के रंग में बदलाव, सीढ़ियां चढ़ने के बाद पैरों में तेज ऐंठन या फिर लिखने-टाइपिंग के दौरान हाथों में दर्द और ऐंठन की भी समस्या हो सकती है। 
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पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का जोखिम और बचाव

डॉक्टर्स बताते हैं, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज धमनी की दीवारों पर फैट, कोलेस्ट्रॉल के निर्माण के कारण होता है, इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यह धमनियों में रक्त के प्रवाह को भी कम कर देती है। मोटापा के शिकार और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में इस समस्या का जोखिम अधिक देखा गया है। इससे संबंधित समस्याों से बचाव के लिए कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने वाले उपाय करना बहुत आवश्यक माना जाता है। दिनचर्या और आहार में बदलाव के माध्यम से कोलेस्ट्रॉल के खतरे से बचाव किया जा सकता है।

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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : istock
कोलेस्ट्रॉल को कैसे निंयत्रित करें?

मायोक्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार कुछ आसान से उपाय कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने और इससे संबंधित विकारों से बचाने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।  इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम का आदत बनाएं। फलों, सब्जियों और साबुत अनाज के साथ आहार में नमक की मात्रा को कम करने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ वजन बनाए रखें, धूम्रपान से दूरी बनाने और स्वस्थ आहार पर ध्यान देकर कोलेस्ट्रॉल और इससे संबंधित समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। 
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हाई कोलेस्ट्रॉल से रक्त वाहिकाओं की समस्याएं - फोटो : Pixabay
हाई कोलेस्ट्रॉल से इस प्रकार की समस्याओं का भी जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण रक्त वाहिकाओं में फैटी जमाव का जोखिमअधिक होता है,जैसे-जैसे ये जमाव बढ़ता जाता है, यह धमनियों में पर्याप्त रक्त के प्रवाह को कठिन बनाने वाली स्थिति हो सकी है। इससे दिल का दौरा या स्ट्रोक का जोखिम काफी बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल की स्थिति से बचाव करते रहना सभी उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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