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जानना जरूरी: आंखों के आगे धुंध क्यों छा रही है? ये डायबिटीज का संकेत है या कोई और दिक्कत

Sun, 06 Sep 2026 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धुंधला दिखना हमेशा डायबिटीज का संकेत नहीं होता। ब्लड शुगर बढ़ने से अस्थायी धुंधलापन हो सकता है, लेकिन डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैक्युलर एडिमा, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा भी नजर प्रभावित कर सकते हैं। लगातार या बार-बार धुंधला दिखने पर आंखों की जांच कराना जरूरी है।
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
आंखें हमारे शरीर का आईना होती हैं, ये कहना गलत नहीं होगा। कई अध्ययनों से पहले से साबित हो चुका है कि आंखों में दिखने वाले बदलाव सेहत की असली कहानी बताते हैं। आंखों में लालिमा, दर्द, पीलापन या फिर दृष्टि में किसी तरह के बदलाव से आप काफी हद तक ये जान सकते हैं कि शरीर में सबकुछ सही चल रहा है या नहीं?

आंखों से अचानक कम दिखने, किताब के अक्षर साफ न दिखने जैसी स्थितियों को आमतौर पर डायबिटीज की समस्या से जोड़कर देखा जाता रहा है। खून में शुगर बढ़ने पर आंख के लेंस के आकार और उसके फोकस करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे कुछ समय के लिए धुंधला दिख सकता है। हालांकि ब्लड शुगर नियंत्रित होने पर यह धुंधलापन ठीक भी हो सकता है।

लेकिन हर बार धुंधला दिखने का मतलब डायबिटीज नहीं होता। आंखों की कई बीमारियां और उम्र के साथ होने वाले बदलाव भी नजर को धुंधला कर सकते हैं। अगर आप भी इस तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं तो आइए जान लेते हैं कि इसकी पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
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आंखों की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
आंखों की समस्याओं का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं आंखों की कई समस्याओं के अलावा कुछ बीमारियों का भी आंखों की रोशनी पर असर पड़ सकता है।
 
  • मोतियाबिंद में आंख का लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है, जिससे चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। रोशनी में चकाचौंध, रात में गाड़ी चलाते समय हेडलाइट से ज्यादा परेशानी और रंगों का फीका दिखना भी इसके संकेत हो सकते हैं।
  • वहीं ग्लूकोमा आंख के अंदर ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर दिखाई देना कम हो सकता है और गंभीर स्थिति में स्थायी तौर पर भी  रोशनी जाने का खतरा रहता है।
 
बार-बार या लगातार धुंधला दिख रहा है तो केवल चश्मा बदलने या डायबिटीज मान लेने के बजाय आंखों की जांच जरूरी है। 
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डायबिटीज के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज के कारण होने वाली समस्या

ब्लड शुगर बहुत बढ़ने पर आंख के लेंस में मौजूद तरल और उसके आकार में बदलाव हो सकता है। इससे आंख कुछ समय के लिए सही तरीके से फोकस नहीं कर पाती और धुंधला दिखाई दे सकता है। यह धुंधलापन ब्लड शुगर नियंत्रित होने के बाद ठीक हो सकता है।
 
  • लेकिन लंबे समय तक बढ़ा रहने वाला ब्लड शुगर आंख की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है।
  • इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते, लेकिन आगे चलकर इससे नजर धुंधली होने, आंखों के सामने तैरते धब्बे जैसी समस्याएं हो सकती है। 
  • डायबिटीज के मरीजों को अपने शुगर लेवल को कंट्रोल रखने पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।

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आंखों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
कहीं ये मोतियाबिंद तो नहीं 

उम्र के साथ नजर धुंधली होने की बड़ी वजह मोतियाबिंद हो सकती है। इसमें आंख का पारदर्शी लेंस धीरे-धीरे धुंधला हो जाता है। इसका असर बढ़ने पर चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं और रंग भी स्प्टट नहीं दिखते। मोतियाबिंद के कारण तेज रोशनी या रात में सामने से आती गाड़ी की हेडलाइट से चकाचौंध की शिकायत भी हो सकती है।  डायबिटीज इसके खतरे को बढ़ा सकती है और कम उम्र में भी यह समस्या हो सकती है। 


ग्लूकोमा की समस्या

ग्लूकोमा आंख से जुड़ी ऐसी बीमारी है जिसमें ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। यह नर्व आंख से मिलने वाली जानकारी को दिमाग तक पहुंचाती है। ग्लूकोमा की शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता। बीमारी बढ़ने पर नजर के किनारों से दिखाई देना कम हो सकता है और धीरे-धीरे स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में ओपन-एंगल ग्लूकोमा का खतरा लगभग जाता पाया गया है। यही कारण है कि डायबिटीज के साथ आंखों की नियमित जांच जरूरी है।
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ब्लड प्रेशर का आंखों पर असर - फोटो : Amarujala.com/AI
हाई ब्लड प्रेशर भी हो सकता है कारण

डायबिटीज के अलावा यदि लंबे समय तक ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में न रहे तो इसका असर भी आंखों पर पड़ सकता है। आंख के पीछे मौजूद रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं लगातार बढ़े हुए ब्लड प्रेशर से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस स्थिति को हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी कहा जाता है।

इसमें धुंधला दिखने, नजर में बदलाव या देखने में परेशानी हो सकती है। गंभीर मामलों में रेटिना को नुकसान पहुंचने से दृष्टि भी प्रभावित हो सकती है। आंखों की रोशनी ठीक रखने के लिए शुगर और बीपी दोनों को कंट्रोल रखना जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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