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गर्भपात होने से महिलाओं में बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा, मोटापे से भी संबंध: रिसर्च 

Sat, 23 May 2020 06:57 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्भपात से डायबिटीज का खतरा - फोटो : Pixabay
मां बनना महिलाओं के लिए अनोखा सुख होता है। लेकिन कई बार कमजोरी, अविकसित गर्भ या अन्य कारणों से गर्भपात हो जाता है। गर्भपात होने के कारण अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती है। डेनमार्क की कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में हुए शोध में दावा किया गया है कि गर्भपात के कारण महिलाओं में डायबिटीज होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। डायबेटोलॉजिया जर्नल में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, अगर महिला के माता-पिता को पहले से बीमारी रही हो, तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है। 
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डायबिटीज - फोटो : Pixabay
71 फीसदी तक खतरा
  • शोधकर्ताओं का दावा है कि टाइप-2 डायबिटीज का होने का खतरा एक बार गर्भपात होने पर 18 फीसदी, दो बार होने पर 38 फीसदी, जबकि तीन बार होने पर 71 फीसदी तक बढ़ जाता है।
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गर्भावस्था
गर्भपात और डायबिटीज से मोटापे का संबंध
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस शोध में दो या तीन बार गर्भपात झेल चुकी महिलाओं को शामिल किया गया और बार-बार उनके ब्लड शुगर की जांच की गई। शोध टीम के प्रमुख डॉ. पिया एगरअप का कहना है कि मोटापे का गर्भपात और टाइप-2 डायबिटीज से संबंध पाया गया। हालांकि कारण सिर्फ यही नहीं है। 

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मधुमेह - फोटो : social media
24,700 महिलाओं पर अध्ययन
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च में डेनमार्क की 24,700 महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं का जन्म 1957 से 1997 के बीच हुआ था और ये 1977 से 2017 के बीच टाइप-2 डायबिटीज की समस्या से ग्रस्त हुईं। इन महिलाओं के अलावा डायबिटीज से नहीं जूझ रहीं महिलाओं को भी शामिल किया गया था। 
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मधुमेह - फोटो : Pixabay
स्वस्थ महिलाओं में समानता 
  • इस शोध के दौरान डायबिटीज से जूझ रही महिलाओं की जन्मतिथि और शैक्षणिक योग्यता की समानता स्वस्थ महिलाओं में भी देखी गई। शोधकर्ताओं ने रिसर्च के नतीजे में पाया कि महिलाओं का जितनी अधिक बार गर्भपात हुआ, डायबिटीज का खतरा उतना ही बढ़ा।
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गर्भावस्था - फोटो : पेक्सेल्स
गर्भपात से इम्यूनिटी पर बुरा प्रभाव 
  • प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एगरअप का कहना है कि गर्भपात के अलावा परिवार के सदस्यों में डायबिटीज हिस्ट्री रहना खतरा ज्यादा बढ़ा सकता है। गर्भपात होने के कारण महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ता है, जिससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

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