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Covid-19: संक्रमण से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों में देखी जा रही हैं ये तीन समस्याएं, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

Fri, 11 Mar 2022 01:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड से रिकवरी के बाद की समस्याएं - फोटो : Pixabay
कोरोना संक्रमण के चलते पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया परेशान है। कोरोना के सामने आए कई वैरिएंट्स के कारण लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट हाल ही में देश में संक्रमण की तीसरी लहर का कारण बना। संक्रमण की रफ्तार भले ही कम हो गई हो लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को अब भी कोरोना के बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ संक्रमण काल के दौरान ही नहीं, संक्रमण कम होने के बाद भी कोविड से बचाव आवश्यक है। कई लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है, जोकि कुछ मामलों में गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकती है।

कोविड-19 से ठीक हो जाने के बाद भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के बने रहने को लॉन्ग कोविड के रूप में जाना जाता है। कमजोरी, थकान, सिरदर्द, फेफड़ों से संबंधित समस्याएं और सांस की दिक्कत लॉन्ग कोविड के प्रमुख लक्षणों में से एक हैं। आमतौर पर संक्रमण से ठीक होने के एक महीने के भीतर ही यह समस्याएं भी ठीक हो जाती है, पर कुछ लोगों में छह-महीने से एक साल तक भी इस तरह की समस्याएं बनी रह सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड के कुछ लक्षणों को विशेष गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता होती है। आइए ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में जानते हैं जो गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
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कोरोना संक्रमण का हृदय की सेहत पर असर - फोटो : iStock
हृदय की सेहत का रखें ख्याल
अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के बाद लोगों में हृदय रोगों की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। लॉन्ग कोविड के रूप में भी कुछ लोगों में हृदय रोग के लक्षण बने रह सकते हैं। साल 2021 के एक अध्ययन में पाया गया था कि संक्रमण के निदान के बाद लोगों में पहले हार्ट अटैक का जोखिम तीन से आठ गुना बढ़ जाता है। 87,000 लोगों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमण के निदान के एक महीने के भीतर रक्त के थक्के बनने और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम अधिक हो सकता है। संक्रमण से ठीक होने के बाद सभी लोगों को हृदय की सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
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संक्रमण के बाद अवसाद के बढ़े मामले - फोटो : Pixabay
बढ़ गए हैं मानसिक स्वास्थ्य के मामले
कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से प्रभावित किया है, इसके लक्षण संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बने रह सकते हैं। विशेषज्ञों ने अवसाद और लॉन्ग कोविड के बीच लिंक पाया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जो लोग COVID-19 से संक्रमित हुए हैं, उनमें चिंता विकार की आशंका तीन गुना और अवसाद की आशंका लगभग दोगना अधिक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि संक्रमण से ठीक होने के बाद कुछ समय तक आपको चिंता-तनाव जैसी समस्याओं का अधिक अनुभव होता रहता है तो इस संबंध में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। 
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शरीर पर लॉन्ग कोविड के असर - फोटो : Pixabay
तंत्रिकाओं से संबधित लक्षण
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19 कुछ मामलों में तंत्रिकाओं की क्षति का भी कारण बन सकता है, जिसके लक्षण लॉन्ग कोविड के रूप में भी देखे जा सकते हैं। मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं लॉन्ग कोविड के रूप में लोगों में पेरिफेरल न्यूरोपैथी से संबंधित लक्षणों का निदान किया। इसके कारण कमजोरी, हाथ-पैर में दर्द और थकान की समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड के लक्षण यदि एक माह से अधिक बने रहते हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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