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Dengue: दिल्ली-एनसीआर में दिखने लगा डेंगू का आतंक, जानिए अब तक कितने मामले और आप कैसे रहें सुरक्षित

Tue, 21 Jul 2026 07:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉक्टरों का मानना है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम है। केवल पांच-दस मिनट की सावधानी पूरे परिवार को इस बीमारी से बचा सकती है। आइए जानते हैं कि आप इसके खतरे को कैसे कम कर सकते हैं?
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Symptoms of Dengue Fever - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसून आते ही कई तरह की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इसमें सबसे ज्यादा जोखिम मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का होता है। जुलाई-अक्तूबर के महीने में अस्पतालों में डेंगू-मलेरिया के मरीजों की संख्या काफी बढ़ने लगती है। दिल्ली-एनसीआर में फिर से डॉक्टर डेंगू को लेकर लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।

हालिया रिपोर्ट्स में नोएडा के कई इलाकों में डेंगू के मामले बढ़ने की खबर है। अधिकारियों ने बताया कि जिले में अब तक डेंगू के 21 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कुछ हिस्सों को मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर पहचाना है। अधिकारियों ने कहा, सफाई अभियान तेज कर दिए गए हैं ताकि पानी जमा न होने पाए। इसके अलावा निवासियों को बचाव के उपायों के बारे में लगातार जानकारी दी जा रही है।

गौरतलब है कि डेंगू में तेज बुखार और शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें बढ़ने के साथ गंभीर स्थितियों में आंतरिक रक्तस्राव का भी खतरा रहता है जो जानलेवा भी हो सकती है।
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डेंगू वैक्सीन को मंजूरी - फोटो : Amarujala.com/AI
डेंगू और इसका खतरा

डेंगू के जोखिमों के बीच अच्छी खबर ये है कि भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। 
 
  • स्वास्थ्य विभाग हर साल डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया को लेकर विशेष अलर्ट जारी करता है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। यही कारण है कि साफ-सुथरे घरों में भी डेंगू का खतरा बना रहता है।
  • अक्सर लोग डेंगू को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह बीमारी कुछ मामलों में बेहद गंभीर रूप ले सकती है।
  • बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में डेंगू जानलेवा भी साबित हो सकता है। 
 
दिल्ली-एनसीआर में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभी से सभी लोगों को बचाव के उपाय शुरू कर देने की सलाह दी है।
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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैसे फैलता है डेंगू ?

डेंगू वायरस संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क से नहीं फैलती। 
 
  • संक्रमण के कारण तेज बुखार, सिरदर्द-आंखों और मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 
  • कई लोगों में सामान्य वायरल बुखार जैसे लक्षण होने के कारण शुरुआती पहचान मुश्किल हो जाती है। 
  • कुछ मामलों में डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम हो सकता है। इसमें रक्त वाहिकाओं से रिसाव, ब्लड प्रेशर लो होने जैसी स्थिति बन सकती है।

आइए जानते हैं कि डेंगू से बचाव कैसे किया जा सकता है?

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मच्छरों से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
घर के आस-पास पानी जमा न होने दें

डेंगू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर खाली करें और साफ करें। 
 
  • गमलों की ट्रे, पानी की टंकियों, बाल्टियों और खुले बर्तनों को ढककर रखें। 
  • पुराने टायर, कबाड़ और ऐसी वस्तुएं जिनमें पानी भर सकता है, उन्हें हटाएं। छत और बालकनी की नियमित सफाई करें। 
  • केवल अपने घर ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी पानी जमा न होने दें।

पूरे शरीर को ढकें और मच्छरों से बचाव करें
 
  • बारिश के मौसम में पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना बेहतर होता है। बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं। घर की खिड़कियों पर जाली लगाएं और जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी का उपयोग करें। दिन के समय भी मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट, क्रीम या वेपोराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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डेंगू बुखार की समस्या - फोटो : Adobe Stock
बुखार को नजरअंदाज न करें

मानसून के दौरान यदि तेज बुखार आए तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डेंगू की जांच कराई जा सकती है। 
 
  • पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लेने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती। 
  • बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर नहीं लेनी चाहिए क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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