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Dengue Risk: दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट, ये चार काम कर लें तो कम हो सकता है खतरा

Mon, 23 Sep 2024 07:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेंगू के मामले - फोटो : amarujala
मानसून के मौसम और इसके बाद के कुछ महीनों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों का खतरा अधिक देखा जाता है। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि देश के कई राज्यों में डेंगू के मरीजों के केस बढ़ गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (एनसीवीबीडीसी) के आंकड़ों के अनुसार भारत में इस साल अब तक 19,447 से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए वहीं इसके कारण 16 लोगों की मौत भी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सितंबर-अक्तूबर के महीनों को सबसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं, हर साल इन महीनों में डेंगू का प्रकोप अधिक होता है।

संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छरों के काटने से ये रोग होता है। डेंगू के मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटते हैं। वैसे तो डेंगू में तेज बुखार, ठंड लगने, शरीर में दर्द, थकान, ऐंठन, चकत्ते और मतली जैसी दिक्कतें होना सामान्य है पर कुछ स्थितियों में ये गंभीर रक्तस्रावी समस्याओं को भी जन्म दे सकती है, जिसके जानलेवा दुष्प्रभाव देखे जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू के लक्षणों को पहचानकर समय रहते इसका इलाज कराना और बचाव के लिए एहतियाती उपाय करते रहना बहुत जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं कि इसके लिए क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं?
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डेंगू का जोखिम - फोटो : istock
दिल्ली-एनसीआर में भी बढ़ रहे हैं मामले

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक जनवरी से 10 सितंबर तक दिल्ली में डेंगू के कुल 675 मामले दर्ज किए गए हैं। डेंगू के कारण दो मौतें भी हुई हैं। लोक नायक अस्पताल में 54 वर्षीय एक मरीज की और सफदरजंग अस्पताल में भी एक रोगी की मौत हुई है। 

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में जनरल फिजीशियन डॉ अरविंद कुमार बताते हैं, पिछले एक महीने में दिल्ली-एनसीआर में डेंगू रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है। ओपीडी में रोजाना 15-20 मरीजों में डेंगू के निदान किया जा रहा है। कुछ रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है पर ऐसे मामलों की संख्या कम है।

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू से बचे रहने के लिए सभी लोगों को कुछ एहतियाती उपायों का पालन करना बहुत जरूरी है। 
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डेंगू के मच्छर - फोटो : Freepik.com
1. मच्छरों को पनपने से रोकें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल्ली में इस बार मानसून का असर ज्यादा देखा गया है जिससे कई स्थानों पर जलजमाव की स्थिति हो गई। स्थिर और साफ पानी डेंगू मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त होता है। इसके अलावा  प्लास्टिक के कंटेनर, एयर कूलर, फूलों के गमले, टायर और खाली पड़े किसी भी सामान जहां पानी जमा हो सकता है उनमें मच्छर पनप सकते हैं। 

मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए कूलर-गमलों का पानी बदलते रहें। घरों के आसपास कहीं पानी जमा न होने दें। मच्छरों को भगाने के लिए दवाओं का छिड़काव कराएं।

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डेंगू से बचाव के उपाय - फोटो : freepik.com
2. घरों के भीतर भी करें मच्छर से बचाव

घरों के भीतर भी मच्छरों के काटने से बचने के लिए उपाय करना जरूरी है। इसके लिए मच्छर मारने वाले क्वाइल्स, स्प्रे आदि का सावधानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इनके इस्तेमाल के कुछ देर बाद तक कमरे में जाने से बचें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
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मच्छर जनित रोग - फोटो : istock
पूरी बाजू के कपड़े पहनें

मच्छर आमतौर पर खुली त्वचा पर काटते हैं। वहीं डेंगू के मच्छर दिन में ज्यादा काटते हैं। इसलिए इन दिनों में डेंगू से बचे रहने के लिए ऐसे कपड़े पहनें जो हाथ और पैरों को पूरी तरह से ढकते हों। इससे मच्छर के काटने की आशंका कम हो जाएगी। मच्छरों से बचाव के लिए त्वचा पर लगाने के लिए क्रीम का भी इस्तेमाल डॉक्टरी सलाह पर किया जा सकता है।
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मच्छरों से करें बचाव - फोटो : freepik.com
मच्छरों के घर में आने से रोकने के उपाय

खुले स्थानों के आस-पास मच्छर ज्यादा होते हैं, जिससे डेंगू होने का खतरा बढ़ जाता है। खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने से मच्छरों को कमरे में आने से रोका जा सकता है। आमतौर पर शाम के समय खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। मच्छरों को पनपने से रोकने और मच्छरों के काटने से बचाव के तरीकों को अपनाकर आप डेंगू-मलेरिया जैसी कई बीमारियों से बचाव कर सकते हैं। 



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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