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Diwali 2024: पटाखों से जल जाए हाथ या त्वचा तो घबराएं नहीं, तुरंत करिए ये आसान उपाय

Thu, 31 Oct 2024 12:18 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पटाखे और आतिशबाजी के बिना दिवाली अधूरी है। हालांकि पटाखे जलाते समय लापरवाही के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों के हाथ जलने या आंखों में चोट लगने के भी मामले देखे जाते रहे हैं। आइए जानते हैं ऐसी स्थिति में क्या करें?
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दिवाली 2024 - फोटो : Freepik.com
रोशनी और उत्साह के त्योहार दिवाली की पूरे देश में धूम है। मिठाइयों-पकवानों के साथ पटाखे और आतिशबाजी के बिना ये पर्व अधूरा लगता है। पर उत्साह और आनंद के बीच अपनी सेहत और सुरक्षा को लेकर कोई लापरवाही बिल्कुल भी न बरतें।

दिवाली में पटाखों के धुंए के कारण अस्थमा-सांस की दिक्कत बढ़ने, मिठाइयों के कारण ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा तो रहता ही है, साथ ही पटाखों को जलाते समय लापरवाही के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों के हाथ जलने या आंखों में चोट लगने के भी मामले देखे जाते रहे हैं। 

पटाखों को लेकर बरती गई किसी भी तरह की लापरवाही कई बार गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है। अगर दिवाली के उत्सव के दौरान आप भी इस तरह की दिक्कतों के शिकार हो गए हैं तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लें।

पटाखों के कारण आंखों में लगने वाली चोट गंभीर हो सकती है, इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। त्वचा या हाथ में हल्की चोट आने या जलने पर कुछ घरेलू उपायों से लाभ मिल सकता है। आइए इस बारे में जानते हैं।
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पटाखों से हाथ जलने का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

दिवाली के समय हर साल पटाखों से हाथ जलने के मामले सामने आते हैं। अगर आपके या किसी दोस्त-परिजन के साथ ऐसी घटना हो जाए तो तुरंत क्या करना चाहिए इस बारे में जानने के लिए हमने पुणे स्थित एक निजी अस्पताल में कंसल्टिंग फिजिशियन डॉ मानिक अग्रवाल से बातचीत की।

डॉक्टर बताते हैं, ये जानते हुए भी कि पटाखे क्षति पहुंचा सकते हैं, फिर भी हर साल लोग लापरवाही बरतते हैं। दिवाली के बाद हर साल ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। चोट या जलन ज्यादा गंभीर है या आंखों-चेहरे पर भी है तो तुरंत किसी डॉक्टर से मिलें। हल्की चोट-जलन में कुछ उपाय करके भी लाभ पाया जा सकता है, हालांकि इसके बाद भी एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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हाथों को ठंडे पानी में रखें - फोटो : Freepik.com
जलन वाले हिस्से की ठंडी सेकाई

पटाखों से हाथ या त्वचा जल जाए तो जले हुए स्थान को ठंडे पानी में 10-15 मिनट तक रखें। इससे जलन कम होती है और सूजन नहीं बढ़ती। जले हुए स्थान को साफ और सूखे कपड़े से ढकें ताकि धूल और गंदगी वहां न लगे। इस तरह संक्रमण का खतरा कम होता है। कई बार जलने के कारण छाले भी पड़ जाते हैं, जिससे आपको तेज दर्द हो सकता है। छालों को फोड़ने से बचें क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है। 

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त्वचा की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
त्वचा को शुष्क होने से बचाएं

जलन वाले हिस्से पर मॉइस्चराइजिंग लोशन लगा सकते हैं इससे त्वचा को शुष्क होने से बचाने में मदद मिलती है। बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी क्रीम, लोशन का उपयोग न करें। साथ ही, दर्द निवारक दवाओं का उपयोग भी केवल डॉक्टर के सुझाव पर ही करें। डॉक्टर आपको एंटीसेप्टिक क्रीम देते हैं जिसे जलने के स्थान पर लगाने से दर्द और संक्रमण का खतरा कम हो सके। 
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एलोवेरा के फायदे - फोटो : Freepik.com
एलोवेरा से मिल सकता है लाभ

त्वचा में जलन या अन्य समस्याओं को कम करने में एलोवेरा को फायदेमंद पाया गया है। इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण संक्रमण के आसपास के हिस्सों में बैक्टीरिया के विकास को रोकने और संक्रमण के खतरे को कम करने में फायदेमंद है। पौधे से सीधे निकाले गए शुद्ध एलोवेरा जेल का उपयोग अधिक फायदेमंद माना जाता है। 

इसके अलावा नारियल का तेल लगाने से भी आपको त्वचा की समस्याओं में लाभ मिल सकता है। नारियल के तेल में विटामिन-ई होता है जो त्वचा पर जलने के बाद के निशान को कम करने में बहुत लाभकारी है।
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हाथों में जलन और दर्द - फोटो : Freepik.com
क्या है सलाह?

डॉक्टर कहते हैं, पटाखों से हाथों के जलने के साथ आंख को भी क्षति पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए पटाखे जलाते समय बेहद सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। कई लोगों में पटाखों के कारण आंख की रोशनी चले जाने का भी खतरा देखा गया है, इसलिए लापरवाही बिल्कुल न बरतें। घरेलू उपाय सिर्फ हल्की चोट या जलन के लिए हैं। अगर जलन गंभीर है या घाव हो गया है तो बिना देर किए किसी नजदीकी अस्पताल जाएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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