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कोरोना संकट: क्या वैक्सीनेशन के कारण 'प्री-टर्म बर्थ' की हो सकती है समस्या? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी

Thu, 06 Jan 2022 06:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्भावस्था में वैक्सीनेशन - फोटो : iStock
कोविड-19 के दुनियाभर में बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने की अपील कर रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ स्थितियों में लोगों को कोविड-19 का खतरा अधिक हो सकता है, गर्भावस्था उन्हीं में से एक स्थिति है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अगस्त-सितंबर 2020 में देश में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को मंजूरी दे दी थी। हालांकि गर्भावस्था में टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में शुरू से ही डर देखा जा रहा है। भले ही अध्ययनों में गर्भवती के लिए टीकाकरण को सुरक्षित बताया गया है, हालांकि इससे जुड़े कई सवाल लोगों के मन में अब भी बने हुए हैं। एक सवाल ऐसा ही है क्या कोविड-19 वैक्सीन प्री-टर्म बर्थ का कारण बन सकती है?
 
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि गर्भवती महिला को संक्रमण हो जाए तो उनमें रोग की गंभीरता और मृत्यु का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले बढ़ जाता है। हालांकि इन खतरों को जानते हुए भी गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण की दर काफी कम है, जिसका एक कारण इस तरह का डर भी है। आइए जानते हैं कि अध्ययनों में गर्भावस्था में टीकाकर्ण के प्रभावों को लेकर क्या बातें सामने आई हैं?
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गर्भवती को कोविड-19 का खतरा - फोटो : iStock
गर्भावस्था में टीकाकरण
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक हालिया अध्ययन के निष्कर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि गर्भावस्था में टीकाकरण कराना पूरी तरह से सुरक्षित है, यह बच्चे के जन्म के समय को प्रभावित नहीं करती है। 40,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि टीकाकरण किसी भी तरह से प्री-टर्म बर्थ या स्मॉल फॉर जेस्टेशनल ऐज (एसजीए) का कारण नहीं बनती है, यह पूरी तरह से सुरक्षित है। प्री-टर्म बर्थ या बच्चे के समय से पहले जन्म का मतलब 37 सप्ताह से पूर्व होने वाले जन्म से है। वहीं एसजीए वह स्थिति है जिसमें बच्चों का जन्म सामान्य से छोटे आकार में होता है। 
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गर्भावस्था में टीकाकरण - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए 16-49 के आयुवर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 10,064 या लगभग 22 प्रतिशत को गर्भावस्था के दौरान कम से कम कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक मिल चुकी थी। अधिकांश (98.3 प्रतिशत) ने अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही के दौरान टीकाकरण प्राप्त किया। ज्यादातर महिलाओं ने फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्न द्वारा विकसित एमआरएनए टीका लगवाया था। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भकाल में वैक्सीनेशन कराना सुरक्षित है। 

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वैक्सीन है सुरक्षित - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
येल स्कूल ऑफ मेडिसिन में स्त्री रोग और प्रजनन विज्ञान की सहयोगी प्रोफेसर हीदर लिपकिंड कहती हैं, हमारे अध्ययन में टीकों को सुरक्षित पाया है। इससे प्री-टर्म बर्थ जैसा कोई जोखिम नहीं है। संभवत: लोगों तक इसको लेकर सही जानकारी नहीं पहुंच पा रही है इसलिए अभी भी दुनियाभर में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की दर काफी कम है। जिस तरह से कोविड के मामले और नए वैरिएंट्स बढ़ रहे हैं, ऐसे में टीकाकरण और भी आवश्यक हो जाता है। 
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कोविड से बचाव के लिए वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : iStock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
प्रोफेसर लिपकाइंड कहती हैं, अध्ययन के निष्कर्ष में हमने वैक्सीनों को गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित पाया है। गर्भवती में गंभीर बीमारी को रोकने के लिए कोविड-19 का टीका लगवाना महत्वपूर्ण है। सभी देशों को लोगों तक सही जानकारी पहुंचाते हुए गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Vaccines During and After Pregnancy

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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