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Covid-19: WHO ने कहा कोरोना ने वर्षों की मेहनत पर फेर दिया पानी, जानिए महामारी की शुरुआत से अब तक के आंकड़े

Tue, 28 May 2024 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना महामारी के दुष्प्रभाव - फोटो : istock
कोरोना महामारी पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई है। इस साल की शुरुआत में कोरोना के मामले स्थिर थे, हालांकि नए वैरिएंट्स के कारण एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका, सिंगापुर, भारत सहित कई देश इन दिनों कोरोना के नए वैरिएंट FLiRT (KP.1 और KP.2) की चपेट में हैं। सिंगापुर फिलहाल नए कोरोना वैरिएंट से सबसे ज्यादा प्रभावित देश हैं, जहां 15 दिनों के भीतर ही संक्रमण के मामलों में 90 फीसदी से अधिक का उछाल रिपोर्ट किया गया है।

कोरोना के नए वैरिएंट्स को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जाहिर की है। नए वैरिएंट FLiRT को 'वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा, कोविड-19 महामारी का वैश्विक स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक असर देखा जा रहा है। दुनियाभर में फैल चुकी महामारी ने कई गंभीर बीमारियों को तो बढ़ाया ही है साथ ही इसके कारण जीवन प्रत्याशा में भी कमी आ गई है। मसलन महामारी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में की जा रही वर्षों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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कोरोना का सेहत पर असर - फोटो : istock
जीवन प्रत्याशा में आई कमी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में महामारी के कारण लाइफ एक्सपेक्टेंसी में आई कमी को लेकर चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने कहा कोविड-19 के कारण वैश्विक जीवन प्रत्याशा में लगभग दो साल की कमी आ गई है। जीवन प्रत्याशा या लाइफ एक्सपेक्टेंसी उन अतिरिक्त वर्षों की औसत संख्या का अनुमान है जो एक निश्चित आयु का व्यक्ति जीने की उम्मीद कर सकता है।

कोविड-19 के कारण वैश्विक जीवन प्रत्याशा अब 1.8 वर्ष गिरकर 71.4 वर्ष रह गई है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कहा कि ये आंकड़े वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। 
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कोरोना ने सेहत को किया प्रभावित - फोटो : istock
शुरुआती दो वर्षों में बिगड़ गए हालात

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, महामारी के शुरुआती सिर्फ दो वर्षों में ही कोरोनावायरस ने जीवन प्रत्याशा में एक दशक की बढ़त को प्रभावित कर दिया है। पहले की तुलना में अब नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) जैसे कि इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक, कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया और मधुमेह वाले रोगियों की संख्या भी बढ़ गई है जो समय से पहले मृत्यु के जोखिमों को बढ़ाने वाली मानी जा रही है। महामारी के दौरान लाइफस्टाइल और आहार में हुई गड़बड़ी ने कई प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों का भी जोखिम बढ़ा दिया है जिन्हें क्रोनिक बीमारियों का प्रमुख कारक माना जा रहा है।

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कोरोना के मामले - फोटो : istock
कोरोना के अब तक के आंकड़े

दिसंबर 2019 में शुरू हुई कोरोना महामारी को चार साल से अधिक का समय बीत चुका है। 13 अप्रैल 2024 तक वर्ल्डोमीटर द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक आधिकारिक तौर पर अब तक 70.47 करोड़ लोग इस वायरस की चपेट में आए हैं, जबकि 70.10 लाख लोगों की इससे मौत हुई है। 67.56 करोड़ लोग संक्रमित होकर ठीक भी हो चुके हैं। संयु्क्त राज्य अमेरिका कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश रहा है, जहां 11.18 करोड़ मामले रिपोर्ट किए गए। अमेरिका में कोरोना मरने वालों की संख्या 1219,487 रिपोर्ट की गई है। 
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भारत में कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : istock
भारत में कोरोना के आंकड़े

वर्ल्डोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में कोरोना से दूसरा सबसे प्रभावित देश भारत है। यहां अब तक 45,035,393 लोगों में संक्रमण की पहचान की गई जबकि मृतकों की संख्या 5.33 लाख से अधिक की थी। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शीर्ष पांच देशों में अमेरिका, भारत के अलावा फ्रांस, जर्मनी और ब्राजील शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने सभी लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर लगातार प्रयास करते रहने की सलाह दी है। 


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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 eliminated a decade of progress in global level of life expectancy


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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