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Cambridge Study: दिमागी क्षमता को कमजोर कर रहा है कोविड-19, लॉन्ग कोविड में लोगों को हो रही हैं ऐसी दिक्कतें

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मस्तिष्क की क्षमता पर कोविड-19 का असर - फोटो : Pixabay
पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी ने लोगों को शारीरिक-मानसिक दोनों तरह से परेशान किया है। डेल्टा जैसे वैरिएंट से संक्रमण के कारण एक तरफ जहां लोगों में कई तरह के गंभीर लक्षण देखने को मिले, वहीं ओमिक्रॉन की संक्रामता दर काफी अधिक बताई जा रही है। कोविड-19 से ठीक होने के बाद भी लोगों में लॉन्ग कोविड की कई समस्याएं लगातार चिंता का कारण बनी हुई हैं। अब तक विशेषज्ञ बताते रहे थे कि लॉन्ग कोविड के कारण लोगों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, हृदय रोग और फेफड़ों की समस्या काफी अधिक देखी जा रही है। वहीं एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना का संक्रमण लोगों की दिमागी क्षमता को भी कमजोर करता जा रहा है।

अध्ययन में शोधकर्ताओं को लॉन्ग कोविड में ऐसे लक्षणों के बारे में पता चला है जो चिंता बढ़ाने वाली हैं। कोविड से ठीक हो चुके 60 फीसदी से ज्यादा लोगों को दिमाग से संबंधित लक्षणों का अनुभव हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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लॉन्ग कोविड के लक्षणों को न करें अनदेखा - फोटो : Pixabay
दिमागी शक्ति में कमी की समस्याएं
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि संक्रमण से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों में याददाश्त और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विस्तृत अध्ययन से पता चलता है कि प्रत्येक दस में से एक कोविड-19 रोगी प्रारंभिक संक्रमण के बाद कुछ महीनों तक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का अनुभव कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमण से उबर चुके लोगों को इस बारे में गंभीरता से लक्षणों पर नजर रखने की आवश्यकता है।
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कोविड के बाद बढ़ गई हैं न्यरोलॉजिकल समस्याएं - फोटो : Pixabay
लॉन्ग कोविड और न्यूरोलॉजिकल विकार
लॉन्ग कोविड में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शिकार लोगों के डेटा के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस करते रहते हैं। लगभग 75 फीसदी लोगों ने बताया कि संक्रमण से ठीक होने के बाद से उन्हें काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो रही है। इसके अलावा कई लोगों ने अक्सर छोटी-छोटी चीजों को याद रख पाने में भी समस्याओं के अनुभव को साझा किया।

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याददाश्त की दिक्कत - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित रह चुके लोगों में याददाश्त से संबंधित समस्याएं देखने को मिल रही है। महामारी ने तनाव-अवसाद जैसी समस्याओं को तो बढ़ाया ही है साथ ही इसका दिमागी क्षमता पर और भी कई तरह से असर देखा जा रहा है।

कई रोगियों को लोगों के चेहरे तो याद हैं पर नाम याद करने में दिक्कत महसूस हो रही है। संक्रमण ने मस्तिष्क में किसी घटना को संग्रहित करने की क्षमता को प्रभावित किया है। आगे के शोध में इस बारे में और स्पष्टता से पता चल सकेगा। फिलहाल ऐसे लोगों को जीवनशैली और आहार को बेहतर रखने के साथ स्क्रीन टाइम कम करने और अच्छी नींद लेने की सलाह दी जा रही है।
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संक्रमण से ठीक होने के बाद भी बरतें सावधानी - फोटो : istock
लंबे समय तक भी बनी रह सकती है दिक्कत
इंटेंसिव केयर यूनिट के विशेषज्ञ डॉ सौरभ अवस्थी कहते हैं, कोविड-19 से उबरने वाले ज्यादातर लोगों में  लॉन्ग कोविड की समस्या देखने को मिल रही है। थकान, सांस लेने में कठिनाई, जोड़ों-छाती में दर्द, अनिद्रा, दिल की धड़कन में अनियमितता जैसी समस्याएं लॉन्ग कोविड में सामान्य देखी जा रही हैं। कुछ लोगों में  न्यूरोलॉजिकल विकारों का भी निदान किया जा रहा है। ज्यादातर मामलों में शुरुआती 15 दिनों के बाद लक्षण कम होने लगते हैं, हालांकि कुछ लोगों में यह समस्याएं कुछ महीनों से लेकर साल भर तक भी बनी रह सकती हैं।
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लॉन्ग कोविड और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Pixabay
लॉन्ग कोविड को न करें अनदेखा
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि कोरोनावायरस हमारे अंगों को कई तरीकों से प्रभावित कर रहा है। यदि आपमें कोविड-19 के एसिम्टोमैटिक मामलों का भी निदान किया गया है तो भी लॉन्ग कोविड के लक्षणों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी यदि आपको लगातार समस्याएं महसूस होती रहती हैं तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेकर उचित इलाज प्राप्त करना आवश्यक है। लॉन्ग कोविड की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


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स्रोत और संदर्भ
Memory and concentration problems are common in long COVID and must not be ignored, say scientists

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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