पिछले ढाई साल से अधिक समय से जारी वैश्विक कोरोना महामारी ने लोगों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेषकर दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण के कारण संक्रमितों में गंभीर लक्षण देखने को मिले थे, ऐसे लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या भी अधिक देखी गई है। भले ही इस समय संक्रमण का कारण बन रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट्स को हल्के स्तर के संक्रमण वाला माना जाता रहा हो, पर इसके कारण भी कुछ लोगों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं रिपोर्ट की जाती रही हैं। कोरोना संक्रमण ने शरीर के जिन अंगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, फेफड़े-हृदय उनमें से एक हैं। तो क्या कोरोना महामारी ने हृदय रोगों के मामलों को बढ़ा दिया है?
यह प्रश्न इसलिए भी खड़ा हो रहा है कि पिछले दो वर्षों में देश में हृदय रोगियों की संख्या में तेजी से उछाल देखने को मिला है। आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-जून 2021 के बीच की अवधि में, हर महीने लगभग 3,000 लोगों में हार्ट अटैक के कारण मौत के मामले देखे गए हैं, जोकि 2020 में लगभग 500 थी। पिछले साल जून तक मुंबई में दर्ज कुल 75,165 मौतों में से लगभग 23.8 प्रतिशत (17,880) दिल का दौरा पड़ने के कारण हुए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि संक्रमण, हृदय की समस्याओं को बढ़ा रहा है, ऐसे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।