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World Physiotherapy Day: लकवा-गठिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं बिल्कुल ठीक, दवाइयों की भी जरूरत नहीं

Thu, 08 Sep 2022 12:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिजियोथेरेपी से कई तरह के दर्द से मिलता है लाभ - फोटो : istock
पिछले कुछ वर्षों में गड़बड़ लाइफस्टाइल के कारण लोगों में मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द की समस्या काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। आलम यह है मौजूदा समय में कम उम्र के लोग भी कई तरह के दर्द की समस्याओं से परेशान देखे जा रहे हैं। कमर, पीठ और घुटने में होने वाले दर्द के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके इलाज के लिए लंबे समय तक दवाइयों और सहायक उपाचर की आवश्यकता होती है। पर क्या आप जानते हैं कि फिजोयोथेरपी की मदद से बिना दवाइयों के भी गंभीर दर्द की समस्या को आसानी से ठीक किया जा सकता है? हाल के वर्षों में इस वैकल्पिक चिकित्सा विधा की मांग तेजी से बढ़ी है। 

आज वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे है, साल 1996 से हर साल 8 सितंबर को यह खास दिन लोगों में इस चिकित्सा पद्धति के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य के साथ मनाया जाता है। दावा किया जाता रहा है कि गठिया, फ्रोजन शोल्डर, कमर दर्द और यहां तक कि लकवा की समस्या को भी इस चिकित्सा के माध्यम से ठीक करने में आसानी से मदद मिल सकती है।

आइए जानते हैं कि फिजोयोथेरपी से किन समस्याओं में बिना दवाइयों के भी आराम पाया जा सकता है?
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फिजियोथेरपी है कई मामलों में फायदेमंद - फोटो : istock
वर्ल्ड फिजियोथेरेपी 2022

वर्ल्ड फिजियोथेरेपी 2022 का थीम है- ऑस्टियोआर्थराइटिस का रोकथाम और प्रबंधन। इस खास विधा के बारे में समझने के लिए हमने लखनऊ में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काज़ी से संपर्क किया। वह बताते हैं- फिजियोथेरेपी के माध्यम से तमाम प्रकार के आर्थराइटिस की दिक्कतों को न सिर्फ ठीक किया जा सकता है, साथ ही इस उपचार विधि के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस के रोगियों में मांसपेशियों की कमजोरी, लचीलेपन में कमी और तेज दर्द की समस्या देखी जाती रही है। फिजियोथेरेपी में  एकीकृत व्यायाम कार्यक्रम के माध्यम से इसके लक्षणों को ठीक करने में मदद मिलती है। लक्षणों को ठीक करने के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की मदद से जोड़ों की मजबूती को बढ़ाने में भी लाभ मिल सकती है।
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फिजियोथेरेपी से दर्द में पा सकते हैं लाभ - फोटो : istock
दर्द के प्रबंधन में मददगार है फिजियोथेरेपी

डॉ जोहैब बताते हैं, फिजियोथेरेपी के कई फायदे हैं। यह कुछ विशिष्ट स्थितियों के इलाज के रूप में कार्य करता है और दर्द के प्रबंधन में मदद करता है। चोट या फिर सर्जरी के बाद तेजी से रिकवरी में भी फिजियोथेरेपी से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। लकवा और स्ट्रोक जैसी स्थितियों से उबरने में मदद करने के साथ शरीर के संतुलन में सुधार करने, गति और शारीरिक मुद्रा को बेहतर बनाने के साथ कई अन्य स्थितियों में भी इस चिकित्सा विधा से लाभ पाया जा सकता है। 

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हड्डियों-मांसपेशियों के दर्द में फिजियोथेरेपी से लाभ - फोटो : Pixabay
फिजियोथेरेपी से पा सकते हैं कई प्रकार के लाभ

डॉ जोहैब बताते हैं, स्थिति के सही निदान के साथ ही अगर घुटनों, मांसपेशियों के दर्द में फिजियोथेरेपी की मदद ली जाए, तो बिना सहायक दवाइयों के भी समस्या को जड़ से ठीक किया जा सकता है। फिजियोथेरेपी कई प्रकार से लाभकारी हो सकती है। 
  • हड्डियों-मांसपेशियों के दर्द को दूर करने में सहायक।
  • कुछ स्थिति में फिजियोथेरेपी आपको सर्जरी से बचने में भी मदद करती है। 
  • समग्र शक्ति और शारीरिक समन्वय में सुधार किया जा सकता है।
  • फिजियोथेरेपी, दवाओं पर निर्भरता को कम करने वाली चिकित्सा विधि है। 
  • कार्डियोवैस्कुलर कार्यप्रणाली और फेफड़ों की क्षमता को बढ़ावा देने में भी इसके लाभ देखे गए हैं।
  • खेल से संबंधित चोट का प्रबंधन में यह सबसे कारगर विधि है। 
  • उम्र के साथ खराब होते फिटनेस को बेहतर बनाए रखने में भी इससे लाभ लिया जा सकता है। 
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समय पर फिजियोथेरेपिस्ट की लें मदद - फोटो : Pixabay
क्या है विशेषज्ञ की राय?

डॉ जोहैब कहते हैं, यदि आपको भी किसी प्रकार की मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द की समस्या रहती है, तो दवाइयों पर निर्भरता बढ़ाने से पहले शुरुआती चरणों में ही किसी फिजियोथेरेपिस्ट से मिलें। मशीनों की मदद के साथ लक्षणों को कम करने के बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व्यायाम के माध्यम से आप बहुत कम समय में लाभ प्राप्त कर सकते हैं। घुटने-कूल्हे के प्रत्यारोपण के बाद रोगी को तेज रिकवरी पाने और चलने में मदद के लिए भी सर्जन फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। अगर समय पर स्थिति का निदान करके फिजियोथेरेपी की मदद ले ली जाए तो आर्थराइटिस जैसी समस्याओं को बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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