फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Covid-19:ओमिक्रॉन के लक्षणों में आया बड़ा बदलाव, क्या बढ़ जाएंगी गंभीर समस्याएं? जानिए अध्ययन में क्या पता चला

Tue, 30 Aug 2022 02:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कोरोना संक्रमण के नए लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
पिछले ढाई साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी जारी है। फिलहाल दुनिया के ज्यादातर देशों में ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां ओमिक्रॉन BA.2 और BA.5 के कारण लोगों को संक्रमित पाया जा रहा है। अध्ययनों में इन वैरिएंट्स की संक्रामकता दर तो अधिक बताई जा रही है पर इससे संक्रमण की स्थिति में लोगों में गंभीर रोग का खतरा कम होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को सिर्फ उन लोगों के लिए ज्यादा गंभीर पाया जा रहा है जिनका या तो वैक्सीनेशन नहीं हुआ है या फिर वे पहले से ही कोमारबिडिटी के शिकार हैं।

ओमिक्रॉन से संक्रमण की स्थिति में गंभीर लक्षण भी नहीं देखे जा रहे हैं। इससे संक्रमण की स्थिति में फेफड़े-हृदय से संबंधित रोगों के मामले बहुत कम हैं। ज्यादातर लोगों में इसके एसिम्टोमैटिक लक्षण रहे हैं, वहीं जिनमें इसके लक्षण देखे जा रहे हैं उन्हें बुखार के साथ फ्लू जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं। हालांकि एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं में ओमिक्रॉन के BA.5 सब-वैरिएंट के कारण होने वाले लक्षणों में बड़ा बदलाव नोटिस किया है। गौरतलब है कि भारत में इन दिनों संक्रमण के ज्यादातर मामलों के लिए इसी सब-वैरिएंट को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि अध्ययनों में क्या बात सामने आई है?
विज्ञापन

2 of 5
कोरोना संक्रमण की समस्या - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन संक्रमण में बड़ा बदलाव

कोरोना संक्रमितों पर अलग-अलग देशों में किए गए अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस हेल्थ के अनुसार BA.5 से संक्रमितों में सामान्यतौर पर बुखार, नाक बहने, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। हालिया अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने बताया कि ओमिक्रॉन के शुरुआती दौर में लोगों में गंध में बदलाव जैसी समस्याएं देखी जाती रही थीं, हालांकि अब इसके मामले काफी कम हो गए हैं। कुछ लोगों में अब भी यह लक्षण देखे जा रहे हैं पर ऐसे मामले वैश्विक स्तर पर फिलहाल काफी कम हैं।
विज्ञापन

3 of 5
कोरोना के BA.5 वैरिएंट्स का संक्रमण - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क पर संक्रमण का असर हो गया है कम

BA.5 से संक्रमितों में गंध-स्वाद में बदलाव की समस्याओं का कम रिपोर्ट किया जाना इस बात का संकेत है कि यह वैरिएंट अब मस्तिष्क को कम प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों ने इस बदलाव के आधार पर उम्मीद जताई है कि संभवत: अब संक्रमितों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा भी कम हो सकता है। ओमिक्रॉन के शुरुआती दिनों में लोगों में गंध में बदलाव की दिक्कत देखी जा रही थी।

गंध में बदलाव की स्थिति तब आती है जब वायरस मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित करने लगता है जिसके कारण इसकी अनुभूति होती है। हालांकि अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से कोरोना के वैरिएंट्स में म्यूटेशन देखा जा रहा है ऐसे में इसके संक्रमण के किसी भी स्थिति को हल्के में लेने की गलती करना भारी  पड़ सकता है।

4 of 5
संक्रमितों को गले में खराश की दिक्कत - फोटो : iStock
गले में खराश की समस्या

संक्रमितों पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि लोगों में अब भी गले में खराश प्रमुख लक्षण बना हुआ है जिसका संकेत है कि यह वैरिएंट अब भी गले की कोशिकाओं को अधिक प्रभावित कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 53 प्रतिशत ओमिक्रॉन संक्रमितों में गले में खराश की दिक्कत देखी गई है। तुलनात्मक तौर पर देखें तो अब तक के सबसे खतरनाक माने जाते रहे डेल्टा संक्रमण में सिर्फ 34 प्रतिशत लोगों में गले में खराश की समस्या थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ओमिक्रॉन वैरिएंट में देखे जा रहे हैं हल्के लक्षण - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन के लक्षण हो गए हैं हल्के

अध्ययनों के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट हल्के लक्षणों वाले होते जा रहे हैं, हालांकि कुछ स्थितियों में इसका खतरा बना रह सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके लक्षणों की अवधि भी कम होती देखी जा रही है, जिससे पता चलता है कि हमारा शरीर अब कोरोना से आसानी से मुकाबला कर पाने में अधिक सक्षम है। 

ZOE ऐप के आंकड़ों के अनुसार, ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों में औसतन 6.87 दिनों तक लक्षण बने हुए देखे जा रहे हैं, जबकि डेल्टा वैरिएंट में 9 दिनों तक संक्रमण के लक्षण रहते थे।


 
----------------
नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें