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सावधान: तीसरी लहर से बचाने में सिर्फ वैक्सीनेशन ही काफी नहीं, 'अतिरिक्त सुरक्षा' की भी पड़ सकती है जरूरत

Mon, 26 Jul 2021 02:36 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना की वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
नोवेल कोरोनावायरस पिछले डेढ़ साल से ज्यादा वक्त से लोगों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बना हुआ है। इन सब के बीच कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अलर्ट किया है। अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि कोविड वैक्सीन की दो डोज संक्रमण से सुरक्षा देने में प्रभावी हो सकती हैं, हालांकि हालिया शोध के आधार पर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स शरीर में बनी इम्यूनिटी को चकमा दे सकते हैं। इसी आधार पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीनेशन के साथ अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी जरूरत पड़ सकती है। कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षा के लिए लोगों को वैक्सीनेशन के बाद एक और बूस्टर डोज देने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
कोविड की बूस्टर डोज का मतलब दो डोज वाली वैक्सीन के अलावा एक और तीसरे डोज की आवश्यकताओं को लेकर विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने में मदद मिल सकेगी।
आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर वैक्सीनेशन के बाद विशेषज्ञों को एक और बूस्टर डोज की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है और यह कितनी प्रभावी साबित हो सकती है?
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वैक्सीन के बूस्टर डोज की भी पड़ सकती है जरूरत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
बूस्टर डोज और उसकी आवश्यकता
कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। कोविड वैक्सीन को संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर उपाय माना जा रहा है, हालांकि कुछ अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोरोना के उभरते नए रूपों के खिलाफ संभव है कि  वैक्सीन कम प्रभावी साबित हो सकती हैं। इसी समस्या को देखते हुए वैज्ञानिक उच्च प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए 'बूस्टर' डोज के रूप में तीसरी खुराक की जरूरतों पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बूस्टर की तीसरी डोज संक्रमण के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा दे सकती है।
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कोरोना का नए वैरिएंट ने बढा दी है बूस्टर डोज की जरूरत (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ा दी है बूस्टर डोज की जरूरत
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस में म्यूटेशन के साथ बने नए वैरिएंट्स, वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए भी जोखिम का कारण बन सकते हैं। नए वैरिएंट्स आसानी से शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने में सफल हो सकते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हाल ही में एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ऐसा लगता है कि हमें टीकों के बूस्टर खुराक की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि समय बीतने के साथ शरीर की प्रतिरक्षा कम हो जाती है। हमें एक ऐसे बूस्टर डोज की आवश्यकता महसूस हो रही है जो कोरोना के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावशाली हो। बूस्टर वैक्सीन शॉट्स को लेकर परीक्षण किया जा रहा है।

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कोरोना से बचाव के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता - फोटो : iStock
लोगों को सबसे पहले वैक्सीन की दोनों डोज देना जरूरी
बूस्टर डोज की आवश्यकता को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा था, बूस्टर डोज कितना कारगर होगा और इसकी कितनी आवश्यकता है, यह प्रमाणित करने के लिए हमें और अधिक अध्ययनों की जरूरत है। हालांकि अभी इस बारे में विचार करना थोड़ी जल्दबाजी है क्योंकि सबसे पहले हमें हर एक व्यक्ति तक वैक्सीन की दोनों खुराक पहुंचाना आवश्यक है। आंकड़े बताते हैं कि देश में अब भी ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की सिंगल डोज भी नहीं मिली है। 
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बुजुर्गों में कम देखी गई हैं एंटीबॉडीज - फोटो : पीटीआई
दोनों डोज के बाद भी शरीर में कम एंटीबॉडीज
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि तमाम उम्र के लोगों में वैक्सीन के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज के स्तर पर अध्ययन किया गया। ओएचएसयू स्कूल ऑफ मेडिसिन में मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के सहायक प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक फिकाडू ताफेसे कहते हैं, उम्रदराज लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर कम पाया गया है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि वृद्ध लोगों में भले ही एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है लेकिन ऐसे लोगों को भी कोरोना के गंभीर संक्रमण से काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है।


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नोट: यह लेख अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के एक बयान के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
 
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