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Covid-19: एसिम्टोमैटिक लोगों से भी संक्रमण का खतरा, बिना लक्षणों के कैसे जानें आप संक्रमित हैं या नहीं?

Fri, 06 May 2022 02:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के बिना लक्षणों वाले मामले - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना संक्रमण ने कई तरह से लोगों को परेशान किया है। इसके कुछ वैरिएंट्स ने जहां शरीर के कई अंगों को गंभीर क्षति पहुंचाई, वहीं इस समय दुनियाभर के लिए मुसीबतों का कारण बने ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को काफी संक्रामक बताया जा रहा है। हाल के शोध में वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन के दो नए सब-वैरिएंट्स BA.3 और BA.4 के बारे में भी लोगों को अलर्ट किया है। इन वैरिएंट्स को लेकर प्राप्त प्रारंभिक जानकारियों के मुताबिक यह प्राकृतिक रूप से संक्रमण या वैक्सीनेशन से बनी एंटीबॉडीज को भी चकमा देने वाले हो सकते हैं। ओमिक्रॉन की संक्रामकता दर पहले से ही वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चिंता का कारण है।

ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को लेकर हुए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि इससे संक्रमित ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं। कुछ लोगों में संक्रमण एसिम्टोमैटिक रहता है, जिसमें संक्रमित होने के वाबजूद कोई लक्षण नजर नहीं आता है। रोग की गंभीरता के नजरिए से तो एसिम्टोमैटिक मामलों को बेहतर माना जा सकता है, हालांकि ऐसे लोग, आसपास के लोगों में संक्रमण फैलाने का कारण बन सकते हैं।

एसिम्टोमैटिक मामलों की सामान्यतौर पर पहचान भी नहीं हो पाती है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऐसा कोई तरीका है जिनके आधार पर यह पता किया जा सके कि आप एसिम्टोमैटिक संक्रमण के शिकार तो नहीं? आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स से संक्रमण - फोटो : iStock
एसिम्टोमैटिक लोगों से संक्रमण का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं होते, पर उनका परीक्षण रिपोर्ट पॉजिटव आता है। ऐसे लोग कोविड के प्रसार के संभावित स्रोत हो सकते हैं। जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि एसिम्टोमैटिक लोगों में भले ही कोरोना के कोई लक्षण न दिखते हों, पर लक्षण वाले लोगों की ही तरह इनसे भी दूसरे लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञ ऐसे लोगों को विशेष बचाव करते रहने की सलाह देते हैं जिससे अन्य लोगों में खतरे को कम किया जा सके।
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कोरोना संक्रमण की पहचान कैसे करें? - फोटो : Pixabay
एसिम्टोमैटिक संक्रमण का कैसे पता किया जाए?

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात का पता लगाना कि कहीं आप एसिम्टोमैटिक संक्रमण के तो शिकार नहीं हैं, यह काफी कठिन है। कोविड टेस्ट ही इसका एक तरीका हो सकता है। 

आरटी-पीसीआर या रैपिड एंटीजन टेस्ट, शरीर में वायरस की उपस्थिति की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, भले ही आपमे कोई लक्षण न दिख रहे हों। हालांकि ऐसे मामलों में  लक्षण न होने पर परीक्षण न कराने की सलाह दी जाती है।

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एसिम्टोमैटिक संक्रमण की पहचान कैसे करें? - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप कोविड-19 वाले लोगों के संपर्क में रहते हैं या आपके निकट संपर्क में रहने वाले किसी व्यक्ति में हाल-फिलहाल कोविड का पॉजिटिव रिपोर्ट आया है तो आपको भी अलर्ट हो जाना चाहिए। भले ही आपमें कोई लक्षण या परेशानी न हो फिर भी  सुनिश्चित करें कि आप खुद को दूसरों से अलग कर लें। अगर आपका टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ जाता है तो ही लोगों के संपर्क में आएं। महामारी से बचाव के लिए यह लोगों की सामाजिक जिम्मेदारी है।
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बिना लक्षणों वाले संक्रमण के केस - फोटो : istock
एसिम्टोमैटिक संक्रमण के कारण क्या हैं?

कोरोना महामारी की शुरुआत से ही यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है कि कोरोना संक्रमण में कुछ लोगों को गंभीर रोग की समस्या जबकि कुछ में बिल्कुल भी लक्षण नजर क्यों नहीं आते हैं? अब तक अध्ययनों में इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल सका है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा शरीर, वायरस के खिलाफ जिस तरह से प्रतिक्रिया करता है, उसी आधार पर लक्षण नजर आते हैं। एसिम्टोमैटिक लोगों में वायरल लोड कम होता है, यही कारण है कि उनमें लक्षण दिखाई नहीं देते । 
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कोरोना से रहें सुरक्षित - फोटो : istock
कोरोना से बचाव जरूरी

कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही आपमें रोग के लक्षण नजर न आ रहे हों, पर आपका रिपोर्ट पॉजिटिव आता है तो आपको सतर्कता बरतते रहना चाहिए। मास्क सबसे अच्छे सुरक्षात्मक उपायों में से एक है, इसके साथ सामाजिक दूरी और हाथों की स्वच्छता का भी ध्यान रखना आवश्यक है। सभी लोगों को कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कोरोना के गंभीर रोगों से बचाव के लिए वैक्सीनेशन बड़ा हथियार साबित हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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