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Covid-19: मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है कोविड-19, सिजोफ्रेनिया जैसे गंभीर रोगों का बढ़ा खतरा

Mon, 08 Jan 2024 08:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay
कोरोनावायरस के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। यूएस-यूके, सिंगापुर सहित कई देशों में अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की खबर है, मौत के मामले भी कुछ देशों में अधिक देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगापुर और अमेरिका में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक और लहर की भी आशंका जताई जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए JN.1 वैरिएंट के कारण भले ही गंभीर रोगों का खतरा कम देखा जा रहा है, पर संक्रमण के बढ़ते मामलों के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। बढ़ते केस, नए वैरिएंट्स के जोखिमों को तो बढ़ा ही रहे हैं साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण शरीर में कई और प्रकार की समस्याओं को लेकर भी अलर्ट किया जाता रहा है।



महामारी की शुरुआत से कोरोनावायरस के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययनों में पाया गया कि ये वायरस श्वसन समस्याओं के साथ फेफड़े-हृदय और मस्तिष्क से संबंधित विकारों को भी बढ़ा सकता है। इससे संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि वायरस का संक्रमण मस्तिष्क की कार्यक्षमता के लिए गंभीर समस्याकारक हो सकता है।
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सिजोफ्रेनिया का जोखिम - फोटो : iStock
कोरोना के कारण सिजोफ्रेनिया का खतरा

कोरोना के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए एक नए अध्ययन में मस्तिष्क के संज्ञानात्मक कार्य पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों में संक्रमण के कारण  मध्यम से गंभीर बीमारी देखी गई थी, उनमें सिजोफ्रेनिया स्पेक्ट्रम एंड साइकोटिक डिसऑर्डर (एसएसपीडी) जैसी बीमारियों का जोखिम काफी अधिक हो सकता है।

ये स्थिति सोच और व्यवहार के तरीकों को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अब तक 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में सिजोफ्रेनिया का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
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सिजोफ्रेनिया की समस्याएं - फोटो : Pixabay
क्या है सिजोफ्रेनिया?

सिजोफ्रेनिया, एक गंभीर मस्तिष्क विकार है जिसके कारण सोच में विकृति के साथ कई प्रकार की भावनात्मक समस्याएं हो सकती हैं। ये बीमारी व्यक्ति के सोचने, चीजों को महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को भी प्रभावित करती है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को ऐसा लग सकता है कि जैसे उनका वास्तविकता से संपर्क टूट गया है, जो कुछ उनके साथ हो रहा है वो वास्तविक नहीं है। इससे प्रभावित लोगों को लग सकता है कि उन्हें कोई नियंत्रित कर रहा है।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि कोरोना के कारण होने वाले दुष्प्रभावों में सिजोफ्रेनिया की समस्या बड़े खतरे के तौर पर उभर रही है।

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मस्तिष्क विकारों का जोखिम - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं की टीम ने कोविड-19 के कारण होने वाली समस्याओं को जानने के लिए 1.93 करोड़ से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन के निष्कर्ष में टीम ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से हमारे डेटा से संकेत मिलता है कि युवा व्यक्तियों में भी कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद एसएसपीडी का खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र में होने वाली इस तरह की समस्या का क्वालिटी ऑफ लाइफ पर नकारात्मक असर हो सकता है।

हम पहले भी कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य विकारों, अवसाद के बढ़े हुए मामले देख रहे हैं, पर सिजोफ्रेनिया जैसा मानसिक विकार बड़ा खतरा हो सकता है।
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कोरोना का मस्तिष्क पर असर - फोटो : Pixabay/Pearvideo.com
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आसिफ रहमान कहते हैं, हमारा अध्ययन कोरोनावायरस के ज्ञात न्यूरोट्रोपिज्म और कोविड-19 संक्रमण के बाद प्रमुख मनोरोग विकारों के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट करता है। अब तक सिजोफ्रेनिया के लगभग 20% मामले 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखे जाते रहे हैं, कोरोना संक्रमण ने कम उम्र के लोगों में इसका खतरा बढ़ा दिया है।

यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि संक्रमण से हल्के लक्षण वाले लोगों में इसका खतरा है या नहीं, पर कोरोना के जोखिमों को लेकर सभी को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।


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स्रोत और संदर्भ
COVID‐19 and the increase in schizophrenia incidence in the future

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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