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कोरोना मरीज रहें सतर्क: बढ़ रहा बेल्स पॉल्सी का खतरा, ये तीन तरह के लोग बरतें अधिक सावधानी

Fri, 09 Jul 2021 01:12 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगभग पूरी दुनिया थम सी गई। लोग संक्रमित होने लगे और साथ ही इस वायरस ने लोगों की जान भी ली। ऐसा नहीं कि अभी ये वायरस चला गया, बल्कि भारत में तो इसकी तीसरी लहर आने की आशंका विशेषज्ञ पहले ही जता चुके हैं। इन सबके बीच वायरस के कई रूप अब तक सामने आ चुके हैं, जो बेहद घातक हैं। लेकिन हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल क्लीवलैंड मेडिकल सेंटर और केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक रिसर्च की है, जिसमें एक बीमारी का दावा किया गया है। इस रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना वायरस के मरीजों के चेहरे पर लकवा होने का खतरा 7 गुना ज्यादा होता है, जिसे मेडिकल की भाषा में बेल्स पॉल्सी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में अगली स्लाइड्स में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है बेल्स पॉल्सी?
  • दरअसल, बेल्स पॉल्सी मांसपेशियों और पैरालिसिस से जुड़ी एक बीमारी है, जिसका सीधा असर मरीज के चेहरे पर दिखाई देता है। इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि ये मरीज के चेहरे पर लकवा मारना भी कहा जाता है। ये एक अस्थाई लकवा है जो चेहरे की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये हैं इसे लक्षण:-

-एक तरफ के गाल का न फूल पाना
-चेहरे का लटक जाना
-सीधे स्माइल न कर पाना
-गालों को फुलाने में परेशानी होना
-पलकों का हमेशा झुका रहना।

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कोरोना वैक्सीन - फोटो : पीटीआई
क्या लकवे से बचने के लिए वैक्सीन जरूरी?
  • अध्ययन की मानें, तो एक लाख कोरोना मरीजों में से 82 मामले ऐसे हैं, जो बेल्स पॉल्सी के हैं। जबकि एक लाख वैक्सीन ले चुके लोगों में से सिर्फ 19 लोग ही बेल्स पॉल्सी के शिकार हुए हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि बेल्स पॉल्सी यानी इस तरह के लकवे से बचने के लिए भी कोरोना की वैक्सीन जरूरी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इन 3 तरह के लोगों को ज्यादा खतरा:-

1. जो लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं

2. जो लोग डायबिटीज की बीमारी से ग्रसित हैं

3. जो लोग किसी प्रकार के गंभीर घाव से पीड़ित हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
ऐसे हो सकती है रिकवरी
  • पहले से कोरोना से डरे लोगों के लिए बेल्स पॉल्सी के केस सामने आना बेहद चिंता का विषय है, और सिर्फ आम लोगों के लिए नहीं बल्कि वैज्ञानिक और डॉक्टर्स भी इससे हैरान हैं। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर दो महीने में इसका सही इलाज मिल जाए, तो इसका उपचार संभव है। वहीं, कुछ लोगों को ठीक होने में 6 महीने का समय भी लग सकता है।

स्त्रोत और संदर्भ
https://www.uhhospitals.org/health-information/health-and-wellness-library/article/diseases-and-conditions/bells-palsy

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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