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Coronavirus Vaccine: भारत में बन रहीं उन नौ वैक्सीन के बारे में जानें सबकुछ, क्या कोरोना को कर पाएंगे खत्म?

Mon, 21 Dec 2020 11:55 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि अगले साल की जनवरी से लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन दी जाने की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्रथमिकता ये सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन सुरक्षित और कारगर है। समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 'मुझे लगता है कि जनवरी में वो वक्त आ सकता है जब हम आम लोगों को कोरोना वैक्सीन देने की स्थिति में होंगे।' 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि फिलहाल ड्रग नियामक, इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए आवेदन की गई कोरोना वैक्सीन समेत सभी और वैक्सीन के बारे में विश्लेषण कर रहा है। उन्होंने कहा, 'कोविड-19 की वैक्सीन के रिसर्च के मामले में भारत किसी देश से पीछे नहीं है। हमारी पहली प्राथमिकता यही है कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित हो और ये इस वायरस के खिलाफ कारगर हो। इस मामले में हम समझौता नहीं चाहते। हमारे नियामक सभी बातों के मद्देनजर वैक्सीन से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा कि देश में स्वदेशी वैक्सीन पर भी काम जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले छह से सात महीनों में हम देश के 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज दे पाएंगे। कोविड-19 पर उच्च स्तरीय मंत्रियों के समूह (जीओएम) की 22वीं बैठक में उन्होंने कहा, 'हमारे वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य जानकारों ने इस वायरस को अलग किया और इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग की और इसके बाद वो इसकी स्वदेशी वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं। आने वाले छह से सात महीनों में हमारे पास 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की क्षमता होगी।' 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में फिलहाल नौ कोरोना वैक्सीन बन रही हैं जो क्लीनिकल ट्रायल के अलग-अलग स्तर पर हैं। इनमें से छह के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं जबकि तीन फिलहाल प्री-क्लीनिकल ट्रायल के स्तर पर हैं। 
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Covishield, Vaccine - फोटो : Twitter@AdarPoonawala
कोविशील्ड 
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई इस वैक्सीन का एस्ट्राजेनेका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही है। चिंपांजी एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनाए जाने वाली इस वैक्सीन के लिए पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट इसका भारतीय पार्टनर है। इसके दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं और इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सरकार से इजाजत मांगी गई है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोवैक्सीन 
  • ये मृत वायरस के इस्तेमाल से बनने वाली वैक्सीन है, जिसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक बना रही है। आईसीएमआर के सहयोग से इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं और इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सरकार से इजाजत मांगी गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
जाइकोव-डी (ZyCoV-D)
  • कैडिला हेल्थकेयर की ये वैक्सीन डीएनए प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है। इसके लिए कैडिला ने बायोटेकनोलॉजी विभाग के साथ सहयोग किया है। इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
स्पूतनिक-वी
  • ये रूस के गमलेया नेशनल सेंटर की बनाई वैक्सीन है जो ह्यूमन एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है। बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन हैदराबाद की डॉक्टर रैडीज लैब कर रही है। ये वैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल तक पहुंच चुकी है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
नोवावैक्स (NVX-CoV2373) 
  • वायरस के प्रोटीन के टुकड़े को आधार बनाकर बनाई जा रही इस वैक्सीन का उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट कर रही है। इसके लिए इंस्टीट्यूट ने नोवावैक्स के साथ कोलैबोरेट किया है। इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • अमेरिकी की एमआईटी की बनाई प्रोटीन एंटीजेन बेस्ड वैक्सीन का उत्पादन हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कर रही है। इसके पहले और दूसरे चरण के ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुके हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एचजीसीओ (HGCO 19)
  • अमेरिका की एचडीटी की एमआरएनए आधारित इस वैक्सीन का उत्पादन पुणे की जिनोवा नाम की कंपनी कर रही है। इस वैक्सीन को लेकर जानवरों पर होने वाले प्रयोग खत्म हो चुके हैं और जल्द ही इसके पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल शुरू होने वाले हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • अमेरिका के थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी के सहयोग से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक मृत रेबीज वेक्टर प्लेटफॉर्म आधारित कोरोना वैक्सीन का उत्पादन कर रही है। ये वैक्सीन एडवांस्ड प्री-क्लीनिकल स्तर तक पहुंच चुकी है। अमेरिकी के ऑरोवैक्सीन के साथ मिलकर भारत की ऑरोबिन्दो फार्मा एक वैक्सीन बनी रही है जो फिलहाल प्री-डेवेलपमेन्ट स्टेज पर है। 
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