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विशेषज्ञ से जानें: जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन कोरोना के दूसरे टीकों से कैसे अलग है?

Tue, 10 Aug 2021 09:45 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
देश में कोरोना के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 51 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। टीकाकरण के मामले में भारत अमेरिका से भी आगे चल रहा है। अगर वैक्सीन की बात करें तो इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत के पास अब वैक्सीन रूपी पांच अलग-अलग हथियार हो चुके हैं। हाल ही में सरकार ने जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। इस वैक्सीन को काफी उपयोगी माना जा रहा है। तमाम अध्ययनों में भी इसे कारगर बताया गया है। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा को लेकर काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं और महामारी के खिलाफ लड़ाई में यह वैक्सीन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि यह वैक्सीन कोरोना के अन्य टीकों से कैसे अलग है और साथ ही कोरोना से जुड़े कुछ सवालों के जवाब भी... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन अन्य वैक्सीन से कैसे अलग है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी एक ही शॉट लगेगी। उससे काफी पॉपुलेशन (जनसंख्या) वैक्सीनेट हो जाएगी। अमेरिकन स्टडी हुई है, उसमें इसकी एफिकेसी 60-70 प्रतिशत के आसपास पाई गई है, जबकि पहले इसे काफी प्रभावी माना गया था। इसलिए हम ये नहीं कह सकते हैं कि कौन सी वैक्सीन ज्यादा अच्छी है, क्योंकि सभी की एफिकेसी आसपास ही है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है? 
  • दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'अभी मैं यह नहीं मान सकता हूं कि देश में कहीं भी हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है, करीब 80 प्रतिशत लोगों को कोरोना हो जाए या वैक्सीन लग जाए, तब मानते हैं। अभी उस नंबर पर हम नहीं पहुंचे हैं। इस तक पहुंचने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है, हम यह नहीं चाहते हैं कि लोग संक्रमित हो कर हर्ड इम्यूनिटी लाएं, इससे तीसरी लहर का खतरा है। इसलिए वैक्सीन लगाने तक खुद बहुत सतर्कता बरतें।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पोस्ट कोविड में ज्यादातर हार्ट की बीमारी बढ़ रही है, क्या सलाह है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'कोविड काल में दो तरह के मरीज हैं, एक जिन्हें पहले से हार्ट (दिल) की बीमारी थी और कोरोना हो गया। दूसरे वो जिन्हें कोरोना के बाद हार्ट की समस्या हो गई है। दोनों को बहुत ध्यान देना है। कोविड में देखा गया है कि क्लॉट काफी बनने लगे, इन क्लॉट की वजह से ही हार्ट अटैक हुआ। इसके लिए खून पतला करने की दवा दी, इससे कई लोगों का यह कंट्रोल हो गया। ध्यान देने की बात ये है कि हार्ट की बीमारी है तो हार्ट की जो भी दवा, खून पतला करने की दवा है, उसे बंद न करें। अब ऐसे लोग जिन्हें कोविड मॉडरेट (मध्यम) से सीवियर (गंभीर) था, उन्हें खून पतला करने की कुछ डोज दी गई और इंजेक्शन के द्वारा उनमें क्लॉटिंग कम हुई।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
स्कूल खुलने वाले हैं, बच्चों को क्या सावधानी रखनी है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'पिछले एक साल से अधिक समय से बच्चे घर में हैं, ऐसे में वो भी कोरोना को समझ चुके हैं। उन्हें सिर्फ नियमों का पालन करना सिखाना होगा। वैसे कई बच्चे मास्क लगाते हैं, लेकिन उन्हें और बेसिक सावधानी, जैसे मास्क नीचे न करना, हाथ सैनिटाइज करना आदि सिखाना होगा। जहां तक संक्रमण की बात है, उन्हें बहुत माइल्ड इंफेक्शन (हल्का संक्रमण) होता है, लेकिन ऐसे बच्चे स्प्रेडर हो सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि घर के बड़े वैक्सीन जरूर लगवाएं और बच्चों को सावधानी के साथ स्कूल भेजें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कई लोग एक ही मास्क को लंबे समय तक लगाते हैं, क्या ये सही है?
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'अगर कपड़े का मास्क लगाते हैं, तो उसे हर रोज धोना जरूरी है। उसी मास्क को लगाने से हो सकता है कि वायरस मास्क पर हो और दोबारा लगाने पर वह नाक मुंह से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है। अगर सर्जिकल मास्क है तो उसे एक दिन प्रयोग करने के बाद बदल दें। उसे दोबारा प्रयोग न करें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अगर किसी बच्चे को कोरोना होता है तो क्या उन्हें भी वयस्क के साथ ही रखा जाता है?
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'अगर बच्चों को कोरोना होगा, तो उनके लिए अलग वॉर्ड बनाए गए हैं, वहीं उनका इलाज होगा। लेकिन अभी तक मैंने बच्चों को कोविड के लिए भर्ती होते हुए नहीं देखा है।' 
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