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अच्छी खबर: भारत को जल्द मिल सकता है एक और टीका, जानिए क्या होती है डीएनए-आरएनए आधारित वैक्सीन?

Fri, 30 Jul 2021 08:30 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


भारत में जल्द ही कोरोना के एक और टीके को मंजूरी मिल सकती है। इस टीके का निर्माण अहमदाबाद की फार्मा कंपनी जायडस कैडिला ने किया है और सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यानी सीडीएससीओ से टीके को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन किया है। इस टीके का नाम जायकोव-डी रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डीएनए आधारित टीका है, अगर सीडीएससीओ इसे अनुमति देता है तो यह दुनिया की पहली डीएनए आधारित कोरोना वैक्सीन होगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि देश पर कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में यह वैक्सीन काफी मददगार साबित हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह दुनिया की पहली ऐसी वैक्सीन होगी, जिसकी तीन खुराक हर 28 दिन के अंतराल पर लगेगी। फिलहाल देश में दो खुराक वाले टीकों का इस्तेमाल हो रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डीएनए-आरएनए आधारित टीका क्या होता है? 
  • दरअसल, डीएनए-आरएनए आधारित टीके को बनाने में कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके एक छोटे से हिस्से को जब व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है तो यह शरीर में पूरा वायरस न बनाकर वायरल प्रोटीन बनाता है। इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कोरोना वायरस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मॉडर्ना है आरएनए वैक्सीन 
  • अमेरिका की मॉडर्ना नामक कंपनी ने जो वैक्सीन बनाई है, वह आरएनए आधारित वैक्सीन है। अमेरिका समेत कई अन्य देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा फाइजर की वैक्सीन भी आरएनए आधारित है। इन दोनों वैक्सीन को कोरोना के खिलाफ काफी प्रभावी माना गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या डेल्टा वैरिएंट पर असरदार होगी जायकोव-डी? 
  • डीएनए आधारित जायकोव-डी टीके के तीसरे चरण का परीक्षण फिलहाल देशभर में 50 से अधिक जगहों पर चल रहा है। जायडस समूह के चेयरमैन डॉ. पंकज आर पटेल ने टीके को सुरक्षित और असरदार बताया है और कहा है कि इस बात की पूरी उम्मीद है कि टीका कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ भी काम करेगा। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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