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Coronavirus Vaccine: भारत की वैक्सीन को क्यों माना जा रहा नेपाल के लिए उपयोगी? वजह है बेहद खास

Sun, 27 Dec 2020 11:32 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन का परीक्षण अंतिम चरण में पहुंच चुका है, वैक्सीन का उत्पादन भी तेजी से हो रहा है। भारत सरकार ने कहा है कि टीकाकरण एक महीने में शुरू हो सकता है। उधर, नेपाल ने भी अपनी वैक्सीन की जरूरतों को पूरा करने की पहल शुरू कर दी है, और भारत में बन रही वैक्सीन में रुचि दिखाई है। भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने बताया कि वैक्सीन को लेकर उन्होंने भारत में वैक्सीन निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ दिल्ली में चर्चा की। पश्चिमी देशों में टीकाकरण की शुरुआत के बाद से नेपाल में चर्चा तेज है कि वहां वैक्सीन की आपूर्ति कैसी की जाएगी। राजदूत आचार्य ने भारत में एक वैक्सीन निर्माता, सीरम इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ अधिकारी और भारत के नीति आयोग के प्रमुख अभिताभ कांत के साथ बातचीत की। 
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Covishield, Vaccine - फोटो : Twitter@AdarPoonawala
सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है। इस टीके को 70 से 90 प्रतिशत तक प्रभावी बताया गया है। आचार्य ने कहा, 'सीरम इंस्टीट्यूट की क्षमता बहुत बड़ी है। यह नेपाल की जरूरतों को भी पूरा कर सकता है। हम इस संबंध में सीरम इंस्टीट्यूट के साथ बातचीत कर रहे हैं। उनसे बातचीत उम्मीदों के मुताबिक रही है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
भारत से कितनी वैक्सीन आएगी?

पिछले महीने नेपाल की यात्रा के दौरान, भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि नेपाल की वैक्सीन की जरूरत भारत के लिए प्राथमिकता होगी। आचार्य ने मुताबिक अभिताभ कांत ने भी नेपाल को वैक्सीन में प्राथमिकता देने का जिक्र किया है। आचार्य के मुताबिक नेपाल शुरू में अपनी 20 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन देने की कोशिश करेगा। ये दो चरणों में होगा, पहले चरण में तीन प्रतिशत और दूसरे चरण में 17 प्रतिशत लोगों को टीका दिया जाएगा। उनके मुताबिक, 'इसका मतलब है कि लगभग 60 लाख यानी एक करोड़ 20 लाख वैक्सीन। हमें उम्मीद है कि हमारी प्रारंभिक जरूरतों को भारत से पूरा किया सकेगा। यह सब एक साथ नहीं होगा, एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद स्थिति साफ होगी।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत की वैक्सीन नेपाल के लिए उपयोगी क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत या पड़ोस के देश मे बने टीके कई कारणों से नेपाल के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, खासकर भारत में बनाए गए टीके क्योंकि ये टीके सस्ते और आपूर्ति के लिहाज से आसान होंगे। जानकार डॉक्टर समीर मणि दीक्षित के मुताबिक, 'नेपाल को वैक्सीन के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़ेगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रेजेनेका वैक्सीन का निर्माण भारत में सीरम इंस्टीट्यूट में किया जा रहा है। दोनों खुराक की कीमत लगभग 1,500 रुपये है।' उन्होंने कहा कि वैक्सीन सस्ते हैं और और सामान्य कोल्ड चेन का इस्तेमाल कर इन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। दीक्षित के मुताबिक चीन में बनने वाले टीके भी नेपाल के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत में कौन से टीके अंतिम चरण में?

भारत के सीरम इंस्टीट्यूट की एस्ट्राजेनेका कोवशील्ड वैक्सीन अंतिम परीक्षण के दौर से गुजर रही है और इसके 'आपातकालीन उपयोग' के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी गई है। हैदराबाद स्थित कंपनी भारत बायोटेक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से कोवैक्सीन नाम की वैक्सीन बना रही है, जो अभी क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है। इसके आपातकाल इस्तेमाल के लिए भी मंजूरी मांगी गई है। तीसरे चरण में कैडिलैक हेल्थकेयर की जायकोव-डी वैक्सीन और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-फाइव का भी परीक्षण किया जा रहा है। 
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