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कैसे बनती है ऑक्सीजन: कोरोना काल में कौन सी कंपनियां कर रही हैं मदद, यहां जानें सबकुछ

Thu, 22 Apr 2021 10:35 AM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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oxygen - फोटो : amar ujala
देशभर में कोरोना वायरस बड़ी ही तेजी के साथ लोगों को संक्रमित कर रहा है, लेकिन इस बार देश सिर्फ इस वायरस की वजह से परेशान नहीं है। बल्कि इस बार ऑक्सीजन की कमी भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों को अस्पताल में बेड नहीं मिल पा रहे हैं, और जिन्हें बेड मिल भी रहे हैं तो उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर जो ऑक्सीजन हमारे वातावरण में है, वो सिलेंडर के अंदर कहां से आती है? इसे तैयार कौन करता है और कैसे होती है? शायद नहीं, तो चलिए आपको इस बारे में बताते हैं।
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ऑक्सीजन सिलेंडर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे बनती है ऑक्सीजन?
  • हमारे वातावरण में काफी ऑक्सीजन है, लेकिन आपको बताते हैं कि आखिर सिलेंडर के अंदर ऑक्सीजन कहां से आती है। यहां आपको बता दें कि गैस क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस के जरिए ऑक्सीजन बनती है। इस प्रक्रिया में हवा को फिल्टर किया जाता है, ऐसा करने से धूल-मिट्टी इससे अलग हो जाती है। इसके बाद कई चरणों में हवा को कंप्रेस यानी उस पर भारी दबाव डाला जाता है।
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ऑक्सीजन गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लाइन - फोटो : amar ujala
इसके बाद कंप्रेस हो चुकी हवा को मॉलीक्यूलर छलनी एडजॉर्बर से ट्रीट किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि पानी के कण, कार्बनडाईऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन इससे अलग हो सके। वहीं, जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो इसके बाद कंप्रेस हो चुकी हवा डिस्टिलेशन कॉलम में जाती है।

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लेह के ऑक्सीजन मैनः यहां आने वालों की थमती सांसों को देते हैं जान - फोटो : अमर उजाला
यहां पहले इसे ठंडा ( ये सब प्लेट फिन हीट एक्सचेंजर और विस्तार टरबाइन प्रक्रिया के जरिए होता है) और उसके बाद 185 डिग्री सेंटीग्रेट पर इसे गर्म किया जाता है, जिससे इसे डिस्टिल्ड किया जाता है। यहां आपको बता दें कि डिस्टिल्ड एक प्रक्रिया है, जिसमें पानी को उबाला जाता है और उसकी भाप को कंडेंस करके जमा किया जाता है। इस प्रक्रिया को कई बार अलग-अलग स्टेज पर किया जाता है। इसमें ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और आर्गन जैसी गैसें अलग-अलग हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के बाद ही लिक्विड ऑक्सीजन और गैस ऑक्सीजन मिलती है।
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जीटीबी अस्पताल में पहुंचा ऑक्सीजन टैंकर - फोटो : अमर उजाला
ये कंपनियां बनाती हैं ऑक्सीजन
  • भारत में एक दो नहीं बल्कि कई ऐसी कंपनियां हैं, जो लोगों को जिंदगी देने वाली ऑक्सीजन बनाती हैं। यहां आपको ये भी जानना जरूरी है कि ये ऑक्सीजन महज मरीजों की जान ही नहीं बचाती, बल्कि स्टील, पेट्रोलियम जैसे कई उद्योगों में भी इसका इस्तेमाल होता है।
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जीटीबी अस्पताल में पहुंचा ऑक्सीजन टैंकर - फोटो : अमर उजाला
वहीं, नजर अगर ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियों पर दौड़ाएं तो इसमें कई कंपनियां शामिल हैं:

-आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड

-ऐलेनबरी इंडस्ट्रियल गैसेज लिमिटेड

-रीफेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड

-नेशनल ऑक्सीजन लिमिटेड

-भगवती ऑक्सीजन लिमिटेड

-गगन गैसेज लिमिटेड

-लिंडे इंडिया लिमिटेड
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ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
अस्पतालों में ये कंपनिया कर रही है ऑक्सीजन सप्लाई:

- टाटा स्टील, जो कि रोजाना तमाम अस्पतालों और राज्य सरकारो को 200-300 टन लिक्विड मेडिकल भेज रही है।

- जिंदल स्टील जहां एक तरफ ओडिशा और छत्तीसगढ़ को 50-100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन अस्पतालों को दे रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में वो राज्य सरकार को रोजाना लगभग 185 टन ऑक्सीजन दे रही है।

- वहीं, रिलायंस महारास्ट्र सरकार और गुजरात सरकार को ऑक्सीजन दे रही है।

- आर्सेलर मित्तल निप्पों रोजाना अस्पतालों और राज्य सरकारों को 200 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन की सप्लाई कर रहा है।

- वहीं, सेल ने अपने बरनपुर, बोकारो, भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला जैसी स्टील प्लांट्स से लगभग 33 हजार टन तक लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की है।
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