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अलर्ट: कैसे येलो फंगस व्हाइट और ब्लैक फंगस से है अलग? यहा जानें और खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

Thu, 27 May 2021 01:57 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर देश में जारी है। हर दिन कोरोना से काफी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं और इस संक्रमण की वजह से लोगों की इम्यूनिटी भी कमजोर हो रही है, जो आगे चलकर कई नई बीमारियों को दावत दे रही है। इसी में से एक बीमारी है फंगल इंफेक्शन, जिसे ब्लैक, व्हाइट और येलो फंगस के तौर पर आप जानते हैं। बताया जा रहा है कि येलो फंगस बाकी दोनों फंगस से काफी ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि इसका पता लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में इलाज में देरी हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये तीनों फंगस एक-दूसरे से कैसे अलग हैं? शायद नहीं, तो चलिए जानते हैं।
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
ब्लैक फंगस
  • ब्लैक फंगस होने के पीछे विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टेरॉयड का दुरुपोयग करना हो सकता है, जिन लोगों को लंबे समय से स्टेरॉयड दिया जाता है, उन्हें ये बीमारी हो सकती है। हालांकि, जिन लोगों को कोरोना नहीं हैं, वो भी इस ब्लैक फंगस की चपेट में आए हैं। ऐसे भी कई केस सामने आए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये हैं लक्षण
  • इसके कई लक्षण हैं। जैसे- नाक या चेहरे पर कालापन या फिर लाल चकत्ते होना, एक तरफ चेहरे पर सूजन आना, दर्द होना, पलकों पर सूजन, आंखें लाल होना, धुंधला या दोहरा दिखना, सिरदर्द होना, उल्टी में खून आना, दांत में दर्द या दांत का हिलना और सांस लेने में तकलीफ होना आदि।

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White fungus - फोटो : सोशल मीडिया
व्हाइट फंगस
  • ब्लैक फंगस के बाद देश में व्हाइट फंगस सामने आया। हालांकि, इसके मामले काफी कम आए हैं, जो एक राहत वाली खबर है। व्हाइट फंगस नाक के रास्ते से फेफड़ों में जाकर निमोनिया पैदा करता है।
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yellow fungus - फोटो : istock
येलो फंगस
  • येलो फंगस का पहला केस उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया। कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड और इम्यूनोसप्रेसेंट शामिल है, जो शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करते हैं। इस फंगस को ब्लैक और व्हाइट से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है, और ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ये बीमारी शरीर के अंदर तो शुरू हो जाती है, लेकिन इसके लक्षण बाहर देखने को मिलते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
ये हैं इसके लक्षण
  • बात अगर इसके लक्षणों की करें, तो इसमें सुस्ती आना, वजन कम होना, भूख का कम होना या बिल्कुल भी भूख न लगने जैसे शुरुआती लक्षण शामिल हैं। वहीं, जबकि गंभीर मामलों में घावों में धीमी गति से ठीक होना, कुपोषण, मवाद आना, अंगों का काम करना बंद कर देना, और आखों का अंदर धंसने जैसे लक्षण शामिल हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऐसे कर सकते हैं खुद का बचाव:-

1. बासी खाना खाने से बचें।

2. आपको धूल वाली जगहों पर मास्क पहनकर रखना चाहिए।

3. कमरे में नमी न होने दें, क्योंकि ज्यादा नमी होने के कारण फंगस फैल सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
4. मिट्टी, काई या खाद जैसी चीजों के पास जाते समय जूते, ग्लव्स फूल स्लीव कमीज और ट्राउजर जरूर पहनें।

5. खासतौर पर साफ-सफाई का ध्यान रखें।

6. साथ ही डायबिटीज पर कंट्रोल, इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग ड्रग या स्टेरॉयड का कम से कम इस्तेमाल करके भी इससे बचा सकता है।

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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