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Coronavirus: तीन चरणों में फैलता है कोरोना वायरस का संक्रमण, जानें हर स्टेज के लक्षण और इलाज

Wed, 17 Jun 2020 01:18 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Spread - फोटो : Amar ujala
कोरोना वायरस संक्रमण से इस समय दुनिया की एक बड़ी आबादी जूझ रही है। कोरोना  संक्रमण के महामारी घोषित होने के पहले से ही वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस वायरस के इंसानी शरीर में घुसने और प्रभावित करने को लेकर रिसर्च करते आ रहे हैं। मानव शरीर को यह वायरस कैसे नुकसान पहुंचाता है, इसको लेकर कई तरह के शोध अध्ययन सामने आ चुके हैं। अब इटली के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोविड-19 की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज में तीन स्टेज में संक्रमण सामने आता है और हर स्टेज में लक्षण बदलते है। इसके साथ ही वायरस और शरीर की अंदरूनी स्थिति का संबंध भी बदलता है। शोधकर्ताओं ने हर स्टेज के मुताबिक इलाज की जरूरत बताई है।
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Research - फोटो : Pixabay
इटली की फ्लोरेंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज में संक्रमण तीन स्टेज में सामने आता है और सभी स्टेज में लक्षण बदलते हैं। उन्होंने दुनियाभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से कोरोना मरीजों का इलाज हर स्टेज में दिख रहे लक्षणों के आधार पर करने की गुजारिश की है। 
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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
फिजियोलॉजिकल रिव्यू जर्नल में प्रकाशित शोध में कोरोना संक्रमण के तीन फेज बताए गए हैं। शोध के मुताबिक, कोविड-19 के हर फेज में कोरोना और शरीर की अंदरूनी क्रियाओं का संबंध बदलता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जरूरी नहीं कि हर बार ड्रॉप्लेट्स से ही कोरोना फैले। कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति से बात करने के दौरान भी कोरोना संक्रमण फैल सकता है। 

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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
तीन चरणों से समझें, कैसे बढ़ता है संक्रमण
  • पहला चरण: 
इसमें कोरोना वायरस शरीर में अपनी संख्या बढ़ाना शुरू करता है और मरीज में हल्के लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण फ्लू के जैसे भी हो सकते हैं।
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
दूसरा चरण:
  • इसे पल्मोनरी स्टेज भी कहा जाता है। इसमें इंसानी शरीर के इम्यून सिस्टम पर संक्रमण का असर दिखता है। इसमे सांस से जुड़ी दिक्कतें पैदा होती है। मरीज को लगातार सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ, ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। वहीं कुछ मामलों में खून के थक्के भी बनना शुरू होते हैं। 
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
तीसरा चरण: 
  • इसे हायर इंफ्लामेट्री स्टेज कहते हैं। इसमें इंसानी शरीर को बीमारियों से बचाने वाला इम्यून सिस्टम ही दिल, किडनी और अन्य अंगों को डैमेज करने लगता है। इस स्थिति को सायटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं। इसमें शरीर खुद की कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
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Coronavirus - फोटो : Pexels
स्टेज के अनुसार दी जाएं दवाएं
  • स्टेज-1 और 2 में एंटी-वायरल ड्रग रेमडेसीविर कोरोना को संख्या बढ़ाने से रोक सकती है। 
  • स्टेज-2 में स्ट्रोक के मरीजों को दी जाने वाली टिश्यू प्जाज्मिनोजेन एक्टिवेटर दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो खून के थक्कों को तोड़ने में मदद कर सकती है।
  • स्टेज-2 और 3 में सूजन कम करने वाली दवाएं जैसे कॉर्टिकोस्टीरॉयड्स, टोसिलीजुमाब और सेरिलुमाब दी जा सकती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
खून का थक्का जमना खतरनाक
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के किसी भी स्टेज में खून के थक्के जमना खतरनाक स्थिति है। ऐसे में ट्रीटमेंट के दौरान हिपेरिन जैसी खून का थक्का रोकने वाली दवा का होना जरूरी है, ताकि ये क्लॉट्स धमनियों में रक्त संचार को बाधित न करें। शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि स्टेज के मुताबिक कारगर दवाओं की पहचान करना और इस्तेमाल करना इस दौर में महत्वपूर्ण है।
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