फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान: कोरोना वायरस कब और कैसे खतरनाक रूप ले सकता है? ये तीन लक्षण बताते हैं सबकुछ

Wed, 19 May 2021 11:34 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कोरोना वायरस - फोटो : iStock
कोरोना वायरस को दुनिया में आए एक साल से भी अधिक का समय बीत चुका है। इस दौरान वैज्ञानिक इसके बारे में काफी कुछ जान चुके हैं कि यह वायरस कैसे शरीर में प्रवेश करता है और लोगों को बीमार करता है। हालांकि अभी भी इससे जुड़े बहुत सारे ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए हैं। दिल्ली स्थित सेंट स्टीफन अस्पताल के डॉक्टर मैथ्यू वर्गीस कहते हैं कि हम यह नहीं जानते कि संक्रमित होने के बाद कौन से मरीज की तबीयत बिगड़ जाएगी और वह वेंटिलेटर पर चला जाएगा और कौन नहीं जाएगा, यह जानने का कोई तरीका नहीं है। आइए जानते हैं कि इस वायरस के संक्रमण से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें, जिनके बारे में जानना बेहद ही जरूरी है। 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. मैथ्यू वर्गीस कहते हैं, 'जब वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो वह तेजी से अपनी कॉपी बनाने लगता है और महज दो दिन में ही हमारे शरीर में करोड़ों वायरस बन जाते हैं। इससे गले में खिचखिच होती है, गले में खराश होती है, खांसी होती है। अब इस वायरस से लड़ने के लिए हमारा शरीर एंटीबॉडी बनाता है और उससे लड़ता है, उसे खत्म कर देता है। इस लड़ाई में तापमान बढ़ता है, इसलिए हमें बुखार होता है, गला सूखता है तो गले में दर्द होता है, गले में खराश होती है, हल्की खांसी होती है। चूंकि इस लड़ाई में शरीर की काफी ऊर्जा इस्तेमाल होती है, इसलिए बदन में दर्द होता है, थकान होता है और ये लड़ाई हमारे शरीर में वायरस के प्रवेश करने के तीन-चार दिन के बाद शुरू होती है।' 

विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. मैथ्यू वर्गीस कहते हैं, 'कोरोना वायरस के शरीर में प्रवेश करने के चौथे, पांचवें, छठे दिन आम लोगों में बुखार, खांसी, गले में खिचखिच, बदन दर्द, सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। 10 से 14 फीसदी लोगों में दस्त भी लग सकते हैं। इसके तीन-चार दिन बाद बीमारी ठीक हो जाती है। कुछ दिनों तक थोड़ी सा खांसी रहती है, लेकिन उससे कोई दिक्कत नहीं होती। याद रहे, 80 फीसदी लोगों में कुछ नहीं होता, वे ठीक हो जाते हैं।' 

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉ. मैथ्यू वर्गीस कहते हैं, '15-20 फीसदी लोगों में बीमारी पांच दिन के बाद एक नया और खतरनाक मोड़ लेती है। इसमें फेफड़ों में खून जमने लगता है, सांस फूलने लगती है, दम घुटने लगता है, लेकिन ये निर्भर करता है कि फेफड़े कितने खराब हैं। अगर फेफड़े ज्यादा खराब हैं तो ज्यादा दम घुटेगा और अगर फेफड़े कम खराब हैं तो कम घुटेगा। ये खतरनाक मोड़ संक्रमण के पांच दिन के बाद से ही शुरू होता है।' 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉ. मैथ्यू वर्गीस कहते हैं, 'बीमारी के खतरनाक मोड़ को पहचाना जा सकता है। वे लोग जिनमें बीमारी खतरनाक मोड़ ले रही है, उनमें पांचवें दिन में तेज बुखार होने लगता है, खांसी ज्यादा बढ़ने लगती है और दम घुटने लगता है। ये तीन लक्षण बीमारी को खतरनाक बनाते हैं। अगर समय रहते इन लक्षणों को नहीं पहचाना गया, तो धीरे-धीरे पूरे फेफड़े खराब होने लगते हैं। डायबिटीज, किडनी की बीमारी, लिवर की बीमारी वाले मरीजों में खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मरीजों के साथ-साथ सामान्य मरीजों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।' 

नोट: यह लेख दिल्ली स्थित सेंट स्टीफन अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मैथ्यू वर्गीस द्वारा साझा किए गए वीडियो के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें