फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम की बात: जानिए क्या होती है कोरोना की आर-वैल्यू, जिसने बढ़ा दी है लोगों की चिंता?

Mon, 02 Aug 2021 09:51 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन) 


भारत में कोरोना के दैनिक मामले जिस तरह से आ रहे हैं, उसे देख कर ऐसा लग नहीं रहा कि यह महामारी इतनी जल्दी खत्म होने वाली है। पिछले कई दिनों से संक्रमण के मामले 40 हजार के करीब बने हुए हैं। पिछले सात दिन के अगर आंकड़े देखें तो देश में नए मामले ज्यादा मिल रहे हैं, जबकि रिकवरी कम हो रही है। इस बीच कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना को लेकर भी चिंता काफी बढ़ गई है। सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी, लेकिन वो कैसे और कब हमला करेगी, ये कहना मुश्किल होगा। वही, दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि देश में वायरस की आर-वैल्यू बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि पहले वायरस की आर-वैल्यू 0.99 थी जो अब बढ़कर एक हो गई है। आइए जानते हैं कि कोरोना की ये आर-वैल्यू क्या होती है? 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, किसी भी बीमारी के फैलने की दर को री-प्रोडक्शन नंबर यानी आर-वैल्यू कहते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एक संक्रमित व्यक्ति से औसतन कितने लोगों में संक्रमण फैल सकता है, यही 'आर' नंबर है। आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब होता है संक्रमण दर।  
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आर-वैल्यू एक से ऊपर है तो इसका मतलब हुआ कि कोई संक्रमित व्यक्ति एक से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है, यानी संक्रमण दोगुना से अधिक रफ्तार से फैल सकता है। वही, अगर संक्रमण दर एक से कम है तो इसका मतलब हुआ कि यह कम लोगों तक पहुंचता है और ऐसे में बीमारी के जल्द खत्म होने की संभावना होती है। 

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
आर-वैल्यू को इस तरह भी समझ सकते हैं अगर 100 लोग कोरोना से संक्रमित हैं और वह 100 अन्य लोगों को भी संक्रमित करते हैं तो कोरोना की आर-वैल्यू एक होगी, लेकिन अगर वो 100 लोग 80 लोगों को ही संक्रमित कर पा रहे हैं तो आर-वैल्यू 0.80 होगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
कोरोना के संक्रमण की इसी दर को रोकने के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाए जाते हैं और लोगों से मास्क पहनने और सुरक्षित शारीरिक दूरी जैसे नियमों को सख्ती से अपनाने की सलाह दी जाती है। चूंकि अभी देश के कई हिस्सों में कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में विशेषज्ञ कहते हैं कि संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए 'टेस्ट, ट्रैक और ट्रीटमेंट' रणनीति अपनाना बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी राज्यों से उन सभी जिलों में सख्त पाबंदी लगाने को कहा है, जहां कोरोना पॉजिटिविटी की दर 10 फीसदी से ज्यादा है। 

नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें