कोरोना वायरस
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अनिता भाटिया के मुताबिक, पिछले एक साल में यानी महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई हैं, जिसमें महिलाओं भी शामिल हैं। अब जब चूंकि लोगों को एक बार फिर नौकरियों पर रखा जा रहा है, ताकि अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके, लेकिन जिस संख्या में महिलाओं को नौकरी से निकाला गया था, उतनी तादाद में उन्हें नौकरी पर रखा नहीं जा रहा है। यह काफी चिंता का विषय है। उन्होंने दुनियाभर के देशों को आगाह किया है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो जाहिर है उत्पादकता में कमी आएगी। ऐसे में सरकारों और कंपनियों को अपना नजरिया बदलना होगा और कंपनियों को महिलाओं के बारे में सोचना होगा और उन्हें वैसा काम देना होगा, जिससे वो दफ्तर का काम भी कर सकें और परिवार और बच्चों की भी देखभाल कर सकें।