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शोध में दावा: कैंसर के मरीजों के लिए कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराक हैं जरूरी

Wed, 17 Mar 2021 04:29 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay
कैंसर एक घातक बीमारी है, जिससे हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। कोरोना महामारी के इस दौर में यह और भी ज्यादा घातक हो सकता है, इसलिए यह बहुत ही जरूरी है कि जो लोग कैंसर से जूझ रहे हैं, वो कोरोना की वैक्सीन लें। ब्रिटेन में हुए एक नए शोध में यह पाया गया है कि अन्य लोगों की तरह ही कोरोना वैक्सीन की दो खुराक में से पहली खुराक लेने के बाद कैंसर मरीजों की रक्षा नहीं हो सकती है। शोध के मुताबिक वैक्सीन की पहली खुराक कैंसर के मरीजों पर प्रभावी नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना से सुरक्षा के लिए कैंसर मरीजों को वैक्सीन की दोनों खुराक लेनी जरूरी हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. शीबा इरशाद कहती हैं, 'अध्ययन से पता चलता है कि वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद कैंसर मरीज कम से कम पांच हफ्ते तक प्रतिरक्षात्मक रूप से असुरक्षित बने रहे, लेकिन इस एक खुराक की प्रभावकारिता को 21 दिन पर दिए जाने वाले बूस्टर डोज के साथ बढ़ाया जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस अध्ययन से यह भी पता चला कि जब पहली खुराक के तीन हफ्ते बाद वैक्सीन की दूसरी खुराक दी गई थी, तो कैंसर मरीजों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में 95 फीसदी तक सुधार हुआ था और कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई थी, वो भी महज दो हफ्तों के अंदर। हालांकि इस अध्ययन की अभी समीक्षा की जानी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इसके विपरीत, जिन कैंसर मरीजों को तीन हफ्तों में वैक्सीन की बूस्टर खुराक नहीं मिली, उनमें कोई खास सुधार नहीं देखा गया। अध्ययन में शामिल सभी लोगों को फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन की खुराक दी गई थी। फाइजर की वैक्सीन को लेकर कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि यह बुजुर्गों पर अधिक प्रभावी है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, 80 या उससे अधिक उम्र वाले लोगों पर वैक्सीन की एक ही खुराक 80 फीसदी से अधिक प्रभावी है और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती। फिलहाल इस वैक्सीन का इस्तेमाल अमेरिका समेत कई देशों में किया जा रहा है। 
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