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एवियन इन्फ्लूएंजा
नब्बे के दशक के आखिरी दौर से लेकर अब तक एवियन इन्फ्लूएंजा के दो प्रकार सामने आ चुके हैं और कई लोगों इससे संक्रमित हो चुके हैं और मारे जा चुके हैं। इस वायरस का चिड़ियों के मल से इंसानों में संक्रमण होता है। 1997 में एच5एन1 वायरस का सबसे पहले हांगकांग में पता चला था। इसकी वजह से वहां बड़े पैमाने पर मुर्गियों को मारा गया था। अब तक अफ्रीका, एशिया और यूरोप के पचास से ज्यादा देशों में यह वायरस पहुंच चुका है। इस वायरस से होने वाली मृत्यु दर 60 फीसदी है। मई, 2013 में चीन में एच7एन9 का पता चला था, जहां कहीं-कहीं पर वायरस के संक्रमण की छिटपुट घटनाएं सामने आई थीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2013 और 2017 के बीच 1,565 संक्रमण के कुल मामले सामने आए थे इनमें से 39 फीसदी संक्रमितों की मौत हुई थी। इस वायरस का इंसानों से इंसानों में होने वाला संक्रमण असमान्य है। एक बार यह साबित होने के बाद इसे रोकना आसान होता।