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कोरोना वायरस क्या और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है?

Sat, 09 May 2020 10:40 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
अमेरिका और ब्रिटेन में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने नोवल कोरोना वायरस में सैकड़ों बदलाव देखे हैं। हालांकि इनमें से किसी भी शोध से यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि इससे इसके संक्रमण पर क्या असर पड़ेगा और ऐसे वायरस के खिलाफ वैक्सीन कितनी प्रभावी होगी। वायरस में बदलाव आना साधारण बात है। सवाल ये है कि इनमें से किन बदलावों का असर संक्रमण की गंभीरता या रफ्तार पर पड़ता है?

अमेरिका में हुए एक शुरुआती रिसर्च में कहा गया है कि नोवल कोरोना वायरस में एक खास बदलाव- D614G ज्यादा हावी हो रहा है, जिसकी वजह से कोविड 19 बीमारी अधिक संक्रामक हो सकती है। हालांकि यह रिसर्च न तो अभी औपचारिक रूप से प्रकाशित हुई और न ही अभी दूसरे वैज्ञानिकों ने इसकी समीक्षा की है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
न्यू मेक्सिको में लॉस ऐलेमॉस नेशनल लैब के शोधकर्ता कोरोना वायरस में हो रहे उन बदलावों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे इस वायरस का आकार बदल जाता है। ये रिसर्च ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इंफ्लुएंजा डेटा (GISAD) के डेटाबेस के आधार पर की जा रही है।

वैज्ञानिकों ने देखा कि इस खास बदलाव (D614G) की वजह से कोरोना वायरस ज्यादा तेजी से बढ़ता है। लेकिन इसका नतीजा क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
'वायरस में बदलाव कोई बुरी चीज नहीं'
कोरोना संक्रमित मरीजों से जुटाए गए डेटा का विश्लेषण शेफील्ड में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने भी किया है। उनका कहना है उन्हें पता चला है कि बदले हुए खास कोरोना वायरस (D614G) से संक्रमित लोगों की संख्या ज्यादा थी। हालांकि उन्हें ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला जिससे ये साबित हो सके कि ऐसे लोग ज्यादा गंभीर रूप से बीमार होते हैं।

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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में हुए एक अन्य अध्ययन ने कोरोना वायरस में हो रहे 198 बदलावों की पहचान की है। इस शोध में शामिल प्रोफेसर फ्रांस्वा बैलू ने कहा, "वायरस में बदलाव आना अपने आप में एक बुरी बात नहीं है। लेकिन अभी हमारे पास ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि कोरोना वायरस सामान्य से तेज या धीमी गति से बदल रहा है। अब तक हम ये नहीं कह सकते कि सार्स CoV-2 ज्यादा जानलेवा या संक्रामक हो रहा है।"
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तापमान जांचते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
वहीं ग्लास्गो यूनिवर्सिटी के कुछ शोधकर्ताओं ने भी कोरोना वायरस के बदलावों का विश्लेषण किया है। इस टीम का कहना है कि ये बदलाव चिंता का विषय नहीं है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि असल में कोरोना वायरस में बदलाव नहीं हुआ है और अभी एक ही तरह के वायरस से कोविड-19 बीमारी फैल रही है।
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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
कोरोना वायरस में हो रहे इन छोटे-छोटे बदलावों पर नजर रखना और उनका विश्लेषण इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे वैक्सीन बनाने में मदद मिलेगी। कोविड-19 के लिए अभी कई वैक्सीन बनाने पर काम हो रहा है। लेकिन अगर वायरस में लगातार अलग-अलग तरह के बदलाव होते रहे तो ये कम प्रभावी हो सकती है।

हालांकि अभी ये सारी बातें सिर्फ सैद्धांतिक रूप से कही जा सकती हैं। वैज्ञानिकों के पास वायरस के बदलने का प्रभाव साबित करने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
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