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विशेषज्ञ से जानें: क्या गांव में भी डबल मास्क लगाना जरूरी है, स्टेरॉयड देते वक्त किन बातों का रखें ध्यान?

Tue, 18 May 2021 05:23 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में अब कमी आ रही है और साथ कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में चार लाख 22 हजार से अधिक लोग कोरोना से ठीक हुए हैं। इसे मिलाकर देश में अब तक दो करोड़ 15 लाख से अधिक कोरोना मरीज ठीक हो चुके हैं। हालांकि यह वायरस अब गांवों में भी फैल चुका है, इसलिए चिंता अभी भी बनी हुई है। ऐसे में मन में ये सवाल उठता है कि क्या गांव में भी डबल मास्क लगाना जरूरी है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पीएम ने देशभर के डॉक्टरों से चर्चा की, उन्होंने डॉक्टरों से क्या कुछ कहा? 
  • मैक्स अस्पताल के डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'प्रधानमंत्री का देश के डॉक्टरों से बात करना, ये एक तरह से मोराल बूस्टर था। उन्होंने लंबे समय से कोविड मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का मोराल (हौसला) बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने कुछ मुख्य मुद्दों पर बात की, पहला- होम आइसोलेशन में कोविड मरीजों की कैसे केयर की जाए। दूसरा- ऑक्सीजन को लेकर था कि कैसे उचित लोगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचे और घर पर लोगों को ऑक्सीजन देने के लिए गाइडलाइंस क्या हों? जैसे कई लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है, फिर भी वह घर पर लगाकर बैठते हैं। उसके बाद म्यूकरमाइकोसिस पर चर्चा हुई कि यह कितना खतरनाक है और कैसे लोगों को शुरुआत में ही इससे बचाया जाए। इन्हीं पर पीएम के साथ चर्चा हुई।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या गांव में भी डबल मास्क लगाना जरूरी है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'अगर कोई एन-95 मास्क लगाता है तो सिंगल मास्क यानी एक मास्क लगाएं, लेकिन अगर कॉटन का मास्क लगा रहे हैं तो डबल मास्क का प्रयोग करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर किसी ने तेज से खांसा और वायरस हवा में उड़ गया यानी एयरबॉर्न हो गया, तो वो कॉटन के सिंगल मास्क के जरिये प्रवेश कर सकता है। इसलिए डबल मास्क लगा कर रखें।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, प्रैक्टिशनर स्टेरॉयड देते वक्त किन बातों का ध्यान रखें? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'छोटे शहर या ग्रामीण इलाकों में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर आदि इस बात का ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा सभी को स्टेरॉयड न दें। जिन्हें डायबिटीज है, उन्हें देते हुए ध्यान रखें कि कितना और कब देना है। होम आइसोलेशन में रहने वाले सभी लोगों को स्टेरॉयड न दें। हां, एक स्टेरॉयड इनहेलर और नेबुलाइजर काफी प्रभावी होता है और यह ओरल स्टेरॉयड से बढ़िया है, क्योंकि वह शरीर के अंदर नहीं जाता है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को दिन में दो बार लेने की भी कई बार सलाह दी जाती है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
ब्लैक फंगस से लोगों में किस तरह की परेशानी आती है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'फंगस एक अवसरवादी बीमारी है, ये तंदुरुस्त व्यक्ति पर अटैक (हमला) नहीं करता है, जबकि कोरोना तंदुरुस्त व्यक्तियों पर भी हमला करता है। ब्लैक फंगस तब हो रहा है जब कोरोना से शरीर कमजोर हो जाता है और इम्यूनिटी कम हो जाती है। दूसरा, कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड का प्रयोग बहुत ज्यादा हो रहा है और मरीज को डायबिटीज भी है तो यह उसपर हमला करता है। यह उनके नाक में, आंख में और उसके बाद कई बार ब्रेन में पहुंच जाता है। ब्रेन में पहुंचने पर यह खतरनाक हो जाता है। इसलिए स्टेरॉयड का प्रयोग बहुत सावधानी से करना है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
डीआरडीओ की दवा 2-डीजी कैसे काम करती है? 
  • डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं, 'ये दवा वायरस से चीट (धोखा) करती है। इसमें 2-डीऑक्सीग्लूकोज है, जिसे वायरस ग्लूकोज समझता है, वो उसके ट्रैप में आकर यानी जाल में फंसकर वहीं रूक जाता है और आगे नहीं बढ़ पाता। इससे वह सेल (कोशिका) को नुकसान नहीं पहुंचा पाता है। ये दवा शुरुआत के सात दिन के अंदर ही काम करेगी, क्योंकि जब वायरस रेप्लिकेट करता है, तभी इसका असर होगा। अगर वायरस ने अपना काम कर लिया है तो उसमें मदद नहीं होगी। दवा सीधे वायरस पर हमला करती है। इसलिए उम्मीद है कि इससे फायदा होगा।' 
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