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विशेषज्ञ से जानें: इन तीन तरीकों से रोक सकते हैं कोरोना की तीसरी लहर, रहें सावधान

Fri, 11 Jun 2021 02:47 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
देश में कोरोना से संक्रमित होने वाले नए मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन एक लाख से कम मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस दौरान 91 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि एक लाख 34 हजार से अधिक मरीज ठीक हुए हैं। वहीं, टीकाकरण अभियान के तहत देश में अब तक लोगों को कोरोना वैक्सीन की 24 करोड़ 58 लाख से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में 30 लाख 32 हजार से अधिक टीके लगाए गए, जिसमें से 27 लाख 33 हजार लोगों को पहली खुराक दी गई, जबकि दो लाख 99 हजार से अधिक लोगों को दूसरी खुराक दी गई। हालांकि इस बीच कोरोना की तीसरी लहर का खतरा भी मंडराने लगा है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि इस खतरे को कैसे रोका जा सकता है और साथ ही कोरोना और वैक्सीन से जुड़े अन्य सवालों के जवाब भी...  
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना से बचने के लिए स्पूतनिक-वी कितनी प्रभावी है? 
  • दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'स्पूतनिक-वी भी कोविशील्ड और कोवाक्सिन के बराबर ही कोरोना के खिलाफ प्रभावी है। इस वैक्सीन के बारे में ये जानना जरूरी है कि जैसे कोवाक्सिन की दूसरी डोज के लिए चार हफ्ते का गैप है, कोविशील्ड में तीन महीने का गैप रखने के दिशा-निर्देश जारी हुए हैं, वहीं स्पूतनिक में तीन हफ्ते का गैप दिए जाने की बात कही गई है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन लेने के बाद भी आप कोविड से संक्रमित हुए, क्या कुछ कहेंगे? 
  • डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'दूसरी लहर के पीक टाइम में मेरा पूरा परिवार कोविड की चपेट में आ गया। परिवार में माता-पिता थे, वो सीनियर सीटीजन हैं, समस्या बड़ी थी। लेकिन हम सभी वैक्सीनेटेड थे, तो बीमारी हल्के लक्षणों में ही चली गई यानी वैक्सीन संक्रमण से भले न बचाए, लेकिन वह बीमारी की गंभीरता से बचाती है। मेरा पूरा परिवार कुछ ही दिनों में ठीक हो गया। वैक्सीन लेने के बाद व्यक्ति के शरीर को वायरस गंभीर रूप से प्रभावित नहीं कर पाता है। इसलिए किसी भी तरह के भ्रम में न आएं और वैक्सीन जरूर लगवाएं।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
बच्चों के इलाज के लिए गाइडलाइन जारी की गई है, इसके बारे में क्या कहेंगे? 
  • डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'छोटे बच्चों के इलाज में डॉक्टरों को जो भी गाइडलाइन जारी की गई है, वो उसके अनुसार इलाज करेंगे। यहां जरूरी ये भी है कि पहले बच्चों को संक्रमण से भी बचाना है। इसके लिए परिवार की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर की आदत डलवाएं। अगर बच्चा छोटा है और मास्क नहीं लगा सकता तो उसे अन्य दो नियम, हाथ धोना और दूर से बात करने की आदत डलवाएं। जो बच्चे थोड़े बड़े हैं, उन्हें मास्क लगाना भी सिखाएं, क्योंकि आने वाले समय में अगर स्कूल खुलेंगे तो उन्हें इन नियमों का पालन करने में समस्या नहीं होगी।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोविड की वर्तमान स्थिति को कैसे देखते हैं? 
  • डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'केस कम हो रहे हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी वही हैं। तीसरी लहर को आने से रोकना है। पोस्ट कोविड में जो भी समस्या आ रही है, उसको दूर करना है। इसलिए जहां तक संभव हो, कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का साथ न छोड़ें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
तीसरी लहर को हम कैसे रोक सकते हैं? 
  • डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं, 'जब तक पूरी आबादी के 80 प्रतिशत लोग संक्रमित नहीं हो जाते हैं, तब तक हर्ड इम्यूनिटी नहीं आती है। इसलिए अनुमान लगा रहे हैं कि एक बार संक्रमित होने के बाद या वैक्सीनेट होने के बाद लंबे समय तक इसके सुरक्षात्मक प्रभाव रहेंगे। इसलिए 80 प्रतिशत तक की आबादी या तो संक्रमित होकर एंटीबॉडीज बना ले या टीकाकरण के जरिये। जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक छोटी-छोटी ऐसी लहर आती रहेंगी। इसके अलावा लॉकडाउन और कर्फ्यू आदि से एपिडेमियोलॉजिकल कर्व (महामारी विज्ञान वक्र) को फ्लैटेन कर सकते हैं। इसलिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है।'  
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