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विशेषज्ञ से जानें: क्या है कोरोना के तेजी से फैलने की वजह, एंटीबॉडी टेस्ट कराना कितना जरूरी है?

Fri, 16 Apr 2021 02:20 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है और इस लहर में हर रोज संक्रमण के नए-नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते 24 घंटों में देशभर में कोरोना महामारी के दो लाख 17 हजार से अधिक नए मामलों की पुष्टि हुई है। वहीं इस दौरान 1100 से अधिक लोगों की मौत भी हो गई है। हालांकि इस बीच देश में टीकाकरण अभियान भी तेजी से चल रहा है। देश में अब तक 11 करोड़ 72 लाख 23 हजार से अधिक कोरोना के टीके लगाए जा चुके हैं। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी कहा है कि सरकार कोरोना से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ऐसे में आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना केस जिस तरह से बढ़ रहे हैं, इसकी क्या वजह मानते हैं? 
  • पीएचएफआई (पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'इसकी सबसे बड़ी वजह है जो लोगों को भ्रम हो गया था कि देश से कोरोना चला गया है और जनवरी आते-आते लोग बेफिक्र हो गए। लोग मास्क लगाना, सुरक्षित दूरी आदि सबकुछ भूल गए। इसी वजह से कोरोना को दोबारा पैर पसारने का मौका मिला। इस बीच कोरोना के कई वैरिएंट भी भारत में प्रवेश किए और केस आज इस तरह से बढ़ने लगे।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना के सीटी वैल्यू का कितना महत्व है? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'आरटी-पीसीआर के जरिये टेस्ट करने पर पता चलता है कि कोरोना वायरस का शरीर पर कितना असर है। अगर सीटी वैल्यू 25 से कम है, तो मतलब वायरस का लोड ज्यादा है। अगर 35 के ऊपर है तो वायरल लोड कम और खतरा भी कम है। अगर 25 और 35 के बीच में हो तो ध्यान रखना है, लेकिन खतरा कम है। अगर काफी कम हो, 15 या 19 हो तो अर्थ है वायरस का लोड ज्यादा है और सतर्क रहना है। लेकिन जरूरी नहीं है कि सीटी वैल्यू कम हो तो स्थिति गंभीर हो। इसलिए इससे ज्यादा परेशान न हों।' 


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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना के नए वैरिएंट के लक्षणों में भी परिवर्तन हुआ है या नहीं? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'इस वक्त का कोरोना वायरस काफी तेजी से बढ़ रहा है और काफी तीव्रता से हमारे शरीर में प्रवेश करता है। जहां तक लक्षण की बात है, कह सकते हैं कि कुछ लक्षणों में फर्क आ गया है। लेकिन ये नहीं कह सकते हैं, सारे नए लक्षण कोरोना के रूप के बदलाव की वजह से ही हैं, क्योंकि पुराने वायरस में भी कई देशों में ये लक्षण पाए गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो लक्षण बताए थे, पहले तीन, सात और फिर 11 हो गए थे, इस वक्त जो नए लक्षण आ रहे हैं, वो भी उसमें शामिल थे, लेकिन हमारे देश में अब पाए जा रहे हैं। फिर भी एक चीज देखने को मिली है कि युवाओं को काफी तेजी से कोरोना का प्रभाव देखने को मिल रहा है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
एंटीबॉडी टेस्ट कराना कितना जरूरी है? 
  • दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'एंटीबॉडी टेस्ट कराने से कोई लाभ नहीं है। शरीर में एंटीबॉडी होने का ये मतलब नहीं है कि वायरस का संक्रमण नहीं होगा, बल्कि एंटीबॉडी शरीर में वायरस की गंभीरता को कम करेंगे। इसलिए जब तक 70 प्रतिशत से अधिक लोग वैक्सीनेट न हो जाएं, सभी मास्क पहनें, हाथ सैनिटाइज करें और सुरक्षित शारीरिक दूरी का ध्यान रखें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पहले संक्रमित के 10 मिनट संपर्क में आने पर संक्रमण होने का खतरा था, इस बार क्या समय कम हो गया है? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'ये कहना मुश्किल है, लेकिन ये कह सकते हैं कि यह मिलने के स्थान पर निर्भर करता है। जैसे, अगर कहीं बाहर मिल रहे हैं, खुल वातावरण में तो वहां जल्दी संक्रमित नहीं होंगे, लेकिन अगर किसी बंद जगह, छोटी जगह पर मिल रहे हैं तो संक्रमण का खतरा ना रहेगा। इसलिए कह सकते हैं 10 मिनट का ये अंतर निश्चित नहीं है। इस बात का ध्यान रखना है कि इस वक्त जो कोरोना वायरस उभरा है, वो हमारे शरीर में चिपकने की शक्ति ज्यादा रखता है, यानी बहुत कम समय में ही शरीर में प्रवेश कर जा रहा है।' 
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