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संभल जाएं: कोरोना जांच के लिए बार-बार सीटी स्कैन कराना घातक, बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

Mon, 03 May 2021 05:55 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 


देशभर में कोरोना के मामले तेजी से तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही लक्षण दिखने के बावजूद आरटी-पीसीआर टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट भी चिंता का सबब बनी हुई है। दरअसल, कई ऐसे कोरोना मरीज हैं, जिनमें लक्षण साफ-साफ दिख रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे स्वाब गलत तरीके से लिया गया हो या फिर ऐसा भी माना जा रहा है कि देश में फैला नया म्यूटेटेड वायरस आरटी-पीसीआर टेस्ट को भी चकमा दे रहा है। ऐसे में क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपको कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन आरटी-पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आई है, तो ऐसे में आपको सबसे पहले तो आइसोलेट हो जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉक्टर की ही सलाह पर कुछ दिन के बाद आपको फिर से टेस्ट कराना चाहिए और अगर फिर भी रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो ऐसे में सीटी-स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटी स्कैन से महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है एचआरसीटी टेस्ट? 
  • एचआरसीटी टेस्ट का मतलब होता है हाई रेजोल्यूशन सीटी स्कैन। इस टेस्ट से पता चल जाता है कि आप कोरोना से संक्रमित हैं या नहीं। दरअसल, यह टेस्ट मरीज की छाती के अंदर कोरोना संक्रमण की थ्री-डी तस्वीर देता है। इसमें कोरोना वायरस पकड़ में आ ही जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कब कराना चाहिए एचआरसीटी टेस्ट? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोरोना मरीज को खांसी है, सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है और ऑक्सीजन का स्तर लगातार नीचे जा रहा है तो एचआरटीसी टेस्ट कराना बेहतर होता है। यह टेस्ट बीमारी की तीव्रता दिखा सकता है। इससे मरीज को सही इलाज लेने में मदद मिलती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या एचआरसीटी टेस्ट के नुकसान भी हैं? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि एचआरसीटी टेस्ट कराने का जोखिम भी हो सकता है। कोरोना के जो मरीज मध्यम से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें ही इसे करना चाहिए और वो भी डॉक्टर की सलाह पर, लेकिन ध्यान रहे कि इसके रेडिएशन के कारण बुरे प्रभाव का खतरा भी होता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • इस बारे में सरकार का भी कहना है कि एक सीटी स्कैन 300-400 बार कराए गए चेस्ट एक्स-रे के बराबर होता है। हालांकि कोरोना के हल्के लक्षण हैं तो सीटी स्कैन कराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन ध्यान रहे कि बार-बार स्कैन कराने से कम उम्र के लोगों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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