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कोरोना काल में डेंगू, मलेरिया समेत इन बीमारियों का बना हुआ है खतरा, जानें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

Fri, 20 Nov 2020 08:12 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना ही नहीं कई अन्य बीमारियों का भी है खतरा - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
देश और दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पहले की अपेक्षा कम हुई है, लेकिन कोरोना के अलावा दिल्ली कई बीमारियों से जूझ रही है। बारिश के इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं, वहीं स्वाइन फ्लू से भी लोग पीड़ित हैं। इन तमाम बीमारियों के प्रति सावधान रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि समय रहते इलाज नहीं मिलने पर मौत भी हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। आइए जानते हैं कि कितनी खतरनाक हैं ये बीमारियां, इसके लक्षण क्या हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है: 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस
  • कोरोना वायरस पिछले 6-7 महीनों के दरमयान बहुत बड़ी महामारी के रूप में सामने आया है। इससे दुनियाभर में संक्रमण का आंकड़ा 2.20 करोड़ पार कर चुका है, जबकि 7.77 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में डेढ़ लाख से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 4100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लक्षण और प्रभाव
  • कोरोना वायरस इंसान के श्वसन तंत्र पर सीधे असर करता है। इसके लक्षणों में लक्षण बुखार, थकान, सूखी खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द, सांस लेने में तकलीफ, डायरिया, गंध और स्वाद खोना आदि शामिल हैं। लेकिन कई मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इस वायरस से ज्यादा खतरा रहता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सावधानी और बचाव
  • मास्क का इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। 
  • साफ सफाई का ध्यान रखें और बार-बार हाथ धोते रहें। 
  • संक्रमित सतहों को न छुएं। अपने हाथों से आंख, नाक और मुंह छूने से बचें।
  • सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें या मिलें। 
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स्वाइन फ्लू - फोटो : Amar Ujala
स्वाइन फ्लू या H1N1
  • स्वाइन फ्लू या H1N1 एक इन्फ्लूएंजा ए वायरस से होने वाला संक्रमण है। यह वायरस ज्यादातर सुअर में पाया जाता है, इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहते हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, दिल्ली में H1N1 मरीजों की संख्या 31 जुलाई तक 412 है, जिनमें से किसी की मौत नहीं हुई है। साल 2010 में पहली बार सामने आए इस वायरस ने 2700 से ज्यादा लोगों की जान ली थी। 
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swine flu - फोटो : Social media
स्वाइन फ्लू के लक्षण और प्रभाव?
  • बुखार, नाक बहना, गले में सूजन, छाती जाम और सांस में तकलीफ इसके लक्षणों में शामिल हैं। इन लक्षणों पर H1N1 की जांच जरूरी है। ज्यादातर लोगों को यह वायरस थोड़ा ही बीमार करता है और एक फीसदी से भी कम लोगों को सही मायनों में दवा की जरूरत होती है। तीन दिन से ज्यादा बुखार हो, सांस में तकलीफ, थकान, भूख में कमी और उल्टी जैसी शिकायत पर डॉक्टर से मिलना जरूरी है। 
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swine flu - फोटो : Pixabay
स्वाइन फ्लू से बचाव और उपाय
  • अस्पताल या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर मास्क जरूर पहनें। संक्रमित व्यक्ति के पास जाना जरूरी हो तो मास्क के साथ-साथ दस्ताना भी पहनना चाहिए। लक्षण सामने आने के दो दिनों के अंदर ही डॉक्टर एंटी-वायरल ड्रग देते हैं। इससे बीमारी की तीव्रता और खतरे को कम किया जा सकता है। 

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dengue - फोटो : Pixabay
डेंगू: लक्षण और प्रभाव
  • बारिश के मौसम में डेंगू जैसी मच्छरजनित बीमारियां फैलने लगती है। दिल्ली में डेंगू के कई केस सामने आए हैं, जबकि एक डॉक्टर की मौत भी हो चुकी है। ठंड के साथ तेज बुखार, सिर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, जी मिचलाना, स्वाद नहीं आना, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जोड़ों में हड्डीतोड़ दर्द आदि इसके लक्षण हैं। सामान्यत: डेंगू 5-7 दिन के इलाज से ठीक हो जाता है। लेकिन डेंगू शॉक सिंड्रोम और हेमरेजिक फीवर खतरनाक होता है।

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Dengue Prevention - फोटो : Social Media
क्या सावधानी जरूरी
  • मच्छरों को फैलने से रोकें। खुले में पानी जमा न होनें दें। पानी की टंकी को बंद रखें। घर के अंदर और बाहर सभी जगहों पर हफ्ते में एक बार मच्छरनाशक रसायन का छिड़काव जरूर करें। मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं। इस मौसम में डॉक्टर पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनने की सलाह देते हैं। 

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Malaria - फोटो : Pixabay
मलेरिया: लक्षण और प्रभाव 
  • दिल्ली महानगरपालिका के मुताबिक, मलेरिया के कई मामले सामने आए हैं। गंदे पानी में पनपने वाली मादा 'एनाफिलीज' मच्छर के काटने के बाद 'प्लाज्मोडियम' नाम के पैरासाइट से यह बीमारी होती है। इसमें मरीज को हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है जो जानलेवा हो सकती है। मलेरिया में आमतौर पर एक दिन छोड़कर बुखार आता है। कंपकंपी, अचानक ठंड के साथ तेज बुखार, फिर गर्मी के साथ तेज बुखार, कमजोरी आदि इसके लक्षण हैं। 

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Malaria - फोटो : Pixabay
क्या सावधानी जरूरी
  • घर में मच्छर ना होने दें। मच्छरों को रोकने के लिए खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाएं। पानी जमा न होने दें। साफ-सफाई रखें। मच्छरों से बचने के लिए, उन्हें भगाने के लिए क्रीम, स्प्रे, कॉइल आदि का इस्तेमाल करें। पीने के पानी में क्लोरीन की गोली मिलाएं और पानी उबालकर पीएं। पूरी बाजू के कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें। 

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चिकनगुनिया - फोटो : Pixabay
चिकनगुनिया: लक्षण और प्रभाव
  • बारिश के मौसम में चिकनगुनिया का भी प्रकोप बढ़ता है। एमसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में अबतक 26 केस सामने आ चुके हैं। इसमें मरीज को जोड़ों में तेज दर्द होता है। मरीज को तेज बुखार भी रहता है। सिरदर्द, शरीर में दर्द, शरीर पर रैशेज यानी चकत्ते होना इसके लक्षणों में से हैं। इस बीमारी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है जो खतरनाक साबित होती है।
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खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं - फोटो : Pixabay
क्या सावधानियां जरूरी
  • चिकनगुनिया से बचने का भी यही तरीका है कि खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं और आसपास मच्छरों को फैलने न दें। जमा हुए पानी में मच्छर पैदा हो सकते हैं, इसलिए कहीं पानी जमने न दें। घर में मच्छर हों तो मच्छरदानी लगाकर ही सोएं।  पूरी बांह की शर्ट, बूट, मोजे और फुल पैंट पहनें। 
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