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कोरोना के इलाज में यह दवा है असरदार, अमेरिकी शोध में दावा- तीन दिन में मिला आराम 

Wed, 10 Jun 2020 02:53 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना की कोई निश्चित दवा उपलब्ध नहीं है - फोटो : Pexels
कोरोना के बढ़ते संक्रमण से दुनियाभर के 200 से ज्यादा देश प्रभावित हैं। अमेरिका, ब्राजील, रूस, ब्रिटेन जैसे देशों में स्थिति गंभीर है। भारत में भी हर दिन कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अबतक उपयोग के लिए इसकी वैक्सीन तैयार नहीं हो सकी है और न ही इसकी कोई निश्चित दवा उपलब्ध है। हालांकि राहत की बात यह है कि पहले से उपलब्ध दवाओं के जरिए कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है। कोरोना मरीजों को सांस लेने में होने वाली तकलीफों को भी कुछ दवाओं के जरिए कम किया जा रहा है। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित अमेरिका में कोरोना मरीजों की तकलीफ कम करने और इलाज में मदद करने वाली एक दवा की पहचान की गई है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
सांस की तकलीफ और इम्यून सिस्टम पर नियंत्रण
  • नेशनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कैंसर की दवा से कोरोन संक्रमण की गंभीरता कम की जा सकती है और कोरोना के इलाज में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ब्लड कैंसर की दवा से संक्रमित मरीजों की सांस लेने की तकलीफ को कम किया जा सकता है। इसके जरिए मरीजों के इम्यून सिस्टम को भी कंट्रोल किया जा सकता है। इम्यून सिस्टम में ज्यादा एक्टिव होने के कारण गंभीर संक्रमण की संभावना होती है।
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Coronavirus - फोटो : Pexels
प्रोटीन को ब्लॉक करती है दवा
  • साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, कैंसर की दवा 'एकैलब्रूटिनिब' कोरोना मरीजों में बीटीके प्रोटीन यानी ब्रूटॉन टायरोसिन काइनेज को ब्लॉक करती है। इम्यून सिस्टम में यह प्रोटीन अहम रोल अदा करता है। कई बार जब इम्यून सिस्टम ज्यादा एक्टिव हो जाता है तो यह शरीर को संक्रमण से बचाने की बजाय सूजन का कारण बनने लगता है।

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दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media
सायटोकाइनिन स्टॉर्म 
  • इम्यून सिस्टम में सायटोकाइनिन प्रोटीन की वजह से ऐसा होता है। इस प्रक्रिया को चिकित्सकीय भाषा में सायटोकाइनिन स्टॉर्म भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में ब्रूटॉन टायरोसिन काइनेज प्रोटीन का भी रोल होता है। इसलिए कैंसर की दवा के जरिए कोरोना मरीजों में इस प्रोटीन को ब्लॉक किया जा सकता है।
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दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ऑक्सीजन के स्तर में कमी 
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना मरीजों में सायटोकाइनिन प्रोटीन ज्यादा मात्रा में रिलीज होता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम उल्टा ही काम करने लगता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने लगता है। कोरोना के 19 मरीजों पर एक छोटा सा अध्ययन किया गया तो पाया गया कि उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घट रहा था और सूजन बढ़ रही थी।
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दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
एक से तीन दिन में मिला आराम
  • शोधकर्ताओं का दावा है कि कोरोना के 19 मरीजों में से 11 मरीजों को दो दिन तक ऑक्सीजन दी गई थी, जबकि बाकी आठ मरीज डेढ़ दिन तक वेंटिलेटर पर रहे थे। इन मरीजों को कैंसर की दवा देने के एक से तीन दिन के अंदर सूजन कम हुई और सांस लेने की तकलीफ में भी बहुत आराम मिला। 11 मरीजों को दिया जा रहा ऑक्सीजन सपोर्ट भी हटा दिया गया और उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।
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दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ब्लड रिपोर्ट में सामने आई बात
  • वेंटिलेटर पर रह रहे आठ में से चार मरीजों को राहत मिलने पर सपोर्ट हटा लिया गया और दो को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दुयोगवश अन्य दो मरीजों की तबतक मौत हो चुकी थी। हालांकि इसके और भी कारण रहे होंगे। इन मरीजों की ब्लड रिपोर्ट में सामने आया कि इनका ब्लड प्रोटीन इंटरल्यूकिन-6 का स्तर बढ़ा हुआ था। सूजन का कारण बनने वाला यह प्रोटीन कैंसर की दवा देने के बाद कम हुआ था। 
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रिसर्च - फोटो : Pixabay
साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, क्लीनिकल प्रैक्टिस के लिए इस दवा के इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जानी चाहिए। कैंसर की इस दवा का प्रयोग और अध्ययन बहुत ही कम मरीजों पर हुआ है। इसलिए कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका इस्तेमाल मरीजों की स्थिति पर निर्भर करता है।

यह भी पढ़ें: कोरोना के लिए इस दवा का ट्रायल दूसरे चरण में, दावा- 10 दिन में होगा इलाज
 

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