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अलर्ट: बच्चों को कोरोना काल के साइड इफेक्ट्स से भी है खतरा, इन 9 बातों पर ध्यान देना जरूरी

Mon, 02 Aug 2021 03:49 PM IST
सोनू शर्मा स्वाति शैवाल
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Nameet Jerath 

डॉ. नमित जेरथ
सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स
पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर एवं पल्मोनोलॉजी
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली


कोरोना काल ने कई सारी चुनौतियां सामने खड़ी की हैं। सबसे ज्यादा चुनौतियां नई पीढ़ी यानी बच्चों के लिहाज से सामने आई हैं। जाहिर है कि आने वाला समय आसान नहीं होगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को अभी से मजबूत बनाया जाए। सेहत के हिसाब से यह और भी जरूरी कदम है। पैदा होते ही मास्क से सामना, यह एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। जरा सोचिए इस समय जो बच्चे जन्म ले रहे हैं, वे जन्म से ही मास्क पहने हुए लोगों को देख रहे हैं। यह उनके लिए न्यू नॉर्मल है। आने वाले समय में इन बच्चों को और टफ टाइम के हिसाब से तैयार होना है। जब वो बचपन से लोगों को मास्क से मुंह ढंके हुए देख रहे हैं तो उस चीज को मन में लेकर ही बड़े होंगे।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बच्चे सब समझते हैं 
  • ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि बच्चों को इस स्थिति से क्या फर्क पड़ेगा। वो तो आराम से घर में हैं। स्कूल बंद हैं, थोड़ी बहुत ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं, बस। लेकिन यह धारणा बहुत गलत है। यह ध्यान रखिए कि डेढ़ साल का एक छोटा बच्चा भी आज की स्थिति को समझ सकता है और इसका उसके मन और शरीर दोनों पर असर होता है। 8-10 साल या उससे बड़े बच्चों को तो खैर कई सारे सोर्सेस से कोरोना काल की स्थिति का पता चल ही जाता है। बहुत छोटे बच्चों के दिमाग में भी इसको लेकर कई प्रश्न और चिंताएं चलती रहती हैं। अगर बड़ों को नौकरी जाने, व्यापार बन्द होने, बीमारी का डर जैसी चिंताएं हैं तो बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। इसलिए सबसे पहले उनके सामने पूरे समय समस्या को लेकर दुखी और निराश रहने की आदत को छोड़ें।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोविड के साइड इफेक्ट्स 
  • शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले यह असर कोविड संक्रमण से पीड़ित हुए बिना भी बच्चों को परेशान कर रहे हैं। हमारी तरह ही बच्चों के लिए भी यह स्थिति एकदम नई और अजीब है। उसपर जब वे इसे समझने के लिए अपने बड़ों को की तरफ देखते हैं तो बड़ों के चेहरे और बातों का डर उन्हें और डरा देता है, क्योंकि बच्चों के लिए उनके बड़े जैसे माता-पिता आदि उनके हीरो होते हैं। ऐसे में जब वे देखते हैं कि उनके हीरोज ही डरे हुए हैं तो उनके मन मे अपनी सुरक्षा को लेकर भी असमंजस और घबराहट पैदा होने लगती है। यही कोविड के साइड इफेक्ट्स हैं। ऊपर से स्कूल के माहौल और अपने आस पास के दोस्तों से दूरी भी उनके दिमाग पर बुरा असर डालती है। इस सबका नतीजा होता है, बिहेवियर में बदलाव और शारीरिक दिक्कतें।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शरीर और मन दोनों पर असर 
  • पिछले डेढ़ साल में ऐसे बच्चों की संख्या में तेजी से बढोत्तरी हुई है, जिनके वजन और व्यवहार दोनों पर कोरोना का असर पड़ा है। घर मे ही बंद रहने, कम से कम फिजिकल एक्टिविटीज और ज्यादा जंक खाने की वजह से बच्चों का वजन बढ़ा है। साथ ही अपने सामान्य रूटीन से अलग रहने के कारण बच्चे मानसिक रूप से भी कई बदलावों से गुजर रहे हैं। मेरे पास कई पैरेंट्स यह शिकायत लेकर आ रहे हैं कि उनका बच्चा गुस्से, चिड़चिड़ाहट, रोने आदि जैसे व्यवहारिक बदलावों से गुजर रहा है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock
कैसे करें तैयार 

यह एक बड़ा प्रश्न है, क्योंकि इसके लिए कोई तय दवाई या एक हल नहीं है। आपको बच्चों को लेकर एक प्रॉपर अप्रोच बनानी होगी, जिसमें आने वाले समय के हिसाब से उनकी इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर उनकी मेंटल हेल्थ पर भी फोकस करना होगा। इसके लिए कुछ बातों पर फोकस करें- 
  • बच्चे को कोरोना के बारे में सामान्य जानकारी जरूर दें, लेकिन डराएं नहीं। 
  • धीरे धीरे अब स्थिति पहले से सामान्य हो रही है। अब हमारे पास तरीके हैं, जिनसे हम काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं। हाइजीन को लेकर बच्चों को सतर्क करें। 
  • बच्चों के लिए भी ताजी हवा बहुत जरूरी है। आपकी रहने की जगह पर गार्डन, छत, बालकनी जो भी सुविधा हो, उसका उपयोग करें। बच्चे इस जगह पर कोई फिजिकल एक्टिविटी करें, यह जरूरी है।  
  • पूरा परिवार मिलकर योग या एक्सरसाइज का आधे घंटे का एक रूटीन बना सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इन बातों पर भी दें ध्यान 
  • बच्चों के लिए भी मेडिटेशन फायदेमंद होता है। इससे उसे फोकस करने में मदद मिलेगी। साथ ही डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीक उसके शरीर में ब्लड सर्क्युलेशन भी सुचारू रहेगा।  
  • हमें कोशिश करते ही रहनी है कि जो बदलाव स्थितियों की वजह से बने हैं, उनका असर टेम्परेरी ही रहे, परमानेंट न रहे।  
  • इसके लिए बच्चों के साथ मिलकर मोटिवेशनल एक्टिविटीज करें। आप इसमें छोटे-मोटे खेल, हेल्दी बातचीत, क्रिएटिव एक्टिविटीज जैसे पेंटिंग, डांस, म्यूजिक आदि शामिल कर सकते हैं।  
  • याद रखिए, इम्यूनिटी के लिए कोई एक गोली या दवाई नहीं है, जिसे देने से इम्यूनिटी बढ़ जाएगी। इसके लिए आपको फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों पर ध्यान देना होगा।  
  • बच्चे का रूटीन और डाइट दोनों संतुलित रहें, यह बहुत जरूरी है। 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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