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Health Alert: सावधान- भारतीयों में बढ़ रही है 'CAD' की समस्या, डायबिटीज रोगी हैं तो खतरा और भी ज्यादा

Tue, 09 Apr 2024 12:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock
भारतीय आबादी में पिछले कुछ वर्षों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को बढ़ते देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, युवाओं से लेकर वयस्कों तक में जिन रोगों के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं सीएडी की समस्या उसमें सबसे प्रमुख है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) धमनियों में होने वाली दिक्कत है जिसे हृदय रोगों और हार्ट अटैक का प्रमुख कारक माना जाता रहा है। हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में  प्लाक के निर्माण के कारण रक्त का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है और इनका अंदरूनी भाग संकीर्ण हो जाता है, इस स्थिति को  एथेरोस्क्लेरोसिस भी कहा जाता है।

अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) की दर अन्य कई देशों की तुलना में काफी अधिक है। कुछ जोखिम कारक सीएडी के खतरे को और भी बढ़ा देते हैं, जिनसे सभी उम्र के लोगों को निरंतर बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि जिन लोगों को पहले से डायबिटीज की दिक्कत रही है उनमें सीएडी का खतरा और भी अधिक हो सकता है।
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
कोरोनरी आर्टरी डिजीज के बारे में जानिए

कोरोनरी आर्टरी डिजीज को हृदय रोगों का प्रमुख कारक माना जाता है। धमनियों में होने वाली इस समस्या के कारण हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता है। हृदय में रक्त का प्रवाह कम होने से सीने में दर्द (एनजाइना) और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। रक्त प्रवाह में अगर रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके कारण हार्ट अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोनरी आर्टरी डिजीज की समस्या को विकसित होने में कई वर्षों का समय लग सकता है, इसके लक्षण भी धीरे-धीरे विकसित होते हैं इसलिए ज्यादातर लोगों में इसका शुरुआत में निदान नहीं हो पाता है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock
डायबिटीज रोगियों में इसका खतरा अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि वैसे तो सीएडी का खतरा किसी को भी और किसी भी उम्र में हो सकता है पर डायबिटीज रोगियों में इसके मामले अधिक देखे जाते रहे हैं।

वर्ल्ड जे डायबिटीज जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चलता है कि डायबिटीज मेलिटस वाले लोगों में बिना डायबिटीज वालों की तुलना में कोरोनरी आर्टरी डिजीज और मायोकार्डियल इन्फार्कशन या हार्ट अटैक होने का जोखिम अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं  मायोकार्डियल इन्फार्कशन के एक मामले के बाद मधुमेह रोगियों में एक वर्ष के भीतर मृत्युदर भी लगभग 50% देखी जाती रही है।

ब्लड शुगर की बढ़े रहने वाली स्थिति समय के साथ तंत्रिकाओं और धमनियों को क्षति पहुंचाने लगती है। 

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छाती में दर्द की समस्या - फोटो : iStock
कैसे जानें कहीं आपको भी तो नहीं है सीएडी की समस्या?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सीएडी के लक्षण शुरुआत में बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं, यही कारण है कि समय पर इन समस्याओं का निदान नहीं हो पाता है। कुछ लोगों को व्यायाम के दौरान दिल के धड़कन में तेजी बने रहने या अक्सर छाती में दर्द की समस्या हो सकती है। हालांकि धमनियों का समस्या बढ़ने के साथ इसके लक्षण अधिक स्पष्ट होने लग जाते हैं।

एनजाइना की समस्या इसका प्रमुख संकेत मानी जाती है, इसमें अक्सर छाती में दर्द होता रहता है और कुछ समय में इसके लक्षण ठीक भी हो जाते हैं। कुछ लोगों में सांस लेने में समस्या, थकान-कमजोरी भी देखी जाती रही है।
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हृदय रोगों से मौत के मामले - फोटो : Pixabay
इन जोखिम कारकों के बारे में भी जानिए

हृदय रोगों की समस्या और सीएडी की दिक्कत किसी को भी हो सकती है, हालांकि कुछ प्रकार की आदतों को इसका प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, उम्र बढ़ने के साथ धमनियां क्षतिग्रस्त और संकुचित होने लग जाती हैं जो सीएडी का प्रमुख कारक हो सकती है। इसके अलावा आमतौर पर पुरुषों को कोरोनरी आर्टरी रोग का खतरा अधिक होता है, हालांकि रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में भी जोखिम बढ़ जाता है।

जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी की धमनियों की दिक्कत रही है, धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं तो ये स्थितियां भी आपके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।




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स्रोत और संदर्भ
Cardiovascular disease in India: A 360 degree overview


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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