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जानना जरूरी: दूसरी लहर में कोरोना संक्रमितों की मौत को लेकर बड़ा खुलासा, सामने आई यह बात

Thu, 19 Aug 2021 04:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण मौत के मामले (सांकेतिक) - फोटो : iStock
कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को गंभीर रूप से संक्रमण का शिकार बनाया। तीन माह से अधिक समय की इस लहर में मौत के आंकड़े भी काफी अधिक रहे। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से मई के बीच 5,314 मौतें दर्ज की गईं। यह प्रतिदिन औसतन 87 मौतें या हर 15 मिनट में लगभग एक मौत के बराबर था। कोरोना के कारण होने वाली ज्यादातर मौत उन लोगों की हुई है जिनको पहले से ही कोई गंभीर बीमारी थी, हालांकि इसके बारे में पहले से उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी। कोविड-19 से हुई मौत के कारणों के बारे में जानने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई स्तर पर अध्ययन किया है, जिसमें कई आश्चर्यजनक बातें सामने आई हैं।
एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों की एक टीम ने इस बारे में विस्तार से जानने के लिए कोरोना से मरने वाले 31 रोगियों के शवों का परीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मृतकों की मेडिकल हिस्ट्री और बायोलॉजिकल मार्कर के साथ हृदय, फेफड़े और रक्त वाहिकाओं का अध्ययन किया। इस अध्ययन में विशेषज्ञों को क्या खास बातें जानने को मिलीं, आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
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कोरोना का नए वैरिएंट्स ने बढ़ाया खतरा - फोटो : iStock
कोरोना के गंभीर संक्रमण और मौत के मामले
कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मृतकों में से 67 फीसदी की आयु 60 से अधिक थी। डॉक्टर बताते हैं, मृतकों में ज्यादातर लोगों में कोमोरबिडिटी की शिकायत देखने को मिली। 87 फीसदी से ज्यादा को पहले से ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं की शिकायत थी, जबकि 13 फीसदी को पहले से कोई भी दिक्कत नहीं थी।  स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि कई तरह की पहले से ही मौजूद स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां कोरोना संक्रमण की स्थिति में लोगों के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बन सकती हैं।
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कोरोना और कोमोरबिडिटी - फोटो : पिक्साबे
ज्यादातर रोगियों को गंभीर स्थिति का पता ही नहीं
अध्ययनकर्ता विशेषज्ञ बताते हैं, सबसे खास बात यह है कि लगभग 30% रोगियों यह पता ही नहीं था कि उनके हृदय या फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, या ऐसा भी हो सकता है कि उन्होंने संकेतों को नजरअंदाज कर दिया हो। इस तरह की स्थिति ज्यादा घातक रूप ले सकती है। ज्यादातर लोगों ने फेफड़ों से संबंधित समस्याओं के बारे में सूचना दी। छाती में होने वाली इस तरह की समस्याएं सांस लेने में दिक्कत का प्रमुख कारण हो सकती हैं। 

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फेफड़ों में कोरोना के संक्रमण - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित एक अस्पताल में छाती रोगों के विशेषज्ञ डॉ अभिजीत सारस्वत कहते हैं, कोरोना की दूसरी लहर में ज्यादातर रोगियों में फेफड़ों की समस्याएं देखने को मिलीं। संक्रमण के शुरुआती दिनों में ही कुछ लोगों में यह वायरस फेफड़ों पर तेजी से असर कर देता है, हालांकि समस्या की बात यह है कि लोग इसके शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर समय रहते फेफड़े की दिक्कतों की पहचान कर ली जाए तो मामले को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।
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कोरोना के गंभीर संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay
समय पर विशेषज्ञों की सलाह जरूरी
डॉ अभिजीत कहते हैं, दूसरी समस्या यह है कि जो लोग इन लक्षणों समझ भी पाते हैं, वह काफी समय के बाद विशेषज्ञ तक पहुंचते हैं, इससे पहले वह कई डॉक्टरों से अलग-अलग दवाएं ले चुके होते हैं, जिससे स्थिति गंभीर रूप ले लेती है। कोरोना के इस दौर में इन सावधानियों के साथ हमे सेहत को ठीक रखने के उपायों के बारे में गंभरीता से प्रयास करते रहने की जरूरत है। कोरोना जैसे संक्रमण भविष्य में भी होते रह सकते हैं, ऐसे में हमारे लिए प्रतिरक्षा को मजबूत करने वाले तरीकों पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है, जिससे पहले तो आप संक्रमण से बचे रहें, और अगर संक्रमण हो भी जाए तो गंभीर रूप ने लेने पाए। फिलहाल वैक्सीनेशन इस समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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नोट: यह लेख अध्ययन की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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