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UNICEF: बचपन की इन गड़बड़ आदतों के हो सकते हैं दीर्घकालिक दुष्प्रभाव, माता-पिता विशेष ध्यान दें

Fri, 13 Jan 2023 05:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों को सेहतमंद कैसे रखें? - फोटो : iStock
स्वस्थ जीवन के लिए बचपन के पोषण को आधार माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए बचपन से ही आहार और स्वस्थ पोषण पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। हम जिस तरह के आहार और दिनचर्या का पालन करते हैं, उसका सीधा असर सेहत पर होता है। बच्चों के मामले में इसपर ध्यान देना और भी आवश्यक हो जाता है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) वैश्विक स्तर पर बच्चों के स्वस्थ पोषण की आवश्यकताओं को लेकर जोर देता रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के पोषण पर ध्यान देने का मतलब सिर्फ आहार को ठीक रखने से नहीं है, उनकी दिनचर्या पर भी ध्यान देना आवश्यक है। मौजूदा समय में जिस तरह से लाइफस्टाइल में गड़बड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है, इसके दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए हमें अभी से अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है। माता-पिता विशेष ध्यान दें, बच्चों को स्वस्थ आहार के साथ बेहतर जीवनशैली की आदत डालें, यह उनके स्वस्थ भविष्य के लिए बहुत आवश्यक है।
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बच्चों की सेहत का रखें विशेष ख्याल - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अमृता सहाय बताती हैं, शहरी परिवेश और बढ़ती तकनीकr सुविधाओं ने हमारी दिनचर्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। वयस्कों के साथ-साथ बच्चों में भी इसका असर साफ देखा जा रहा। शारीरिक निष्क्रियता की कमी, ज्यादातर समय गैजेट्स से चिपके रहने की आदत, रात में देर से सोना. खान-पान में गड़बड़ी के मामले ज्यादातर बच्चों में देखे जा रहे हैं। इसका असर अभी से उनकी सेहत पर दिखने लगा है। यह भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियों का कारण बन सकता है।  
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जंक फूड्स के नुकसान - फोटो : istock
बच्चों में जंक फूड्स की बढ़ती आदत

डॉ अमृता कहती हैं आहर की पौष्टिकता का ध्यान रखना सभी के लिए आवश्यक है, बच्चों के लिए खासतौर से, क्योंकि यह उनके शारीरिक-मानसिक विकास का समय होता है। जंक फूड्स के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ रही है, जिसे कई प्रकार के रोगों के प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है। इसके अलावा जंक फूड्स में नमक की मात्रा भी अधिक होती है जिसके कारण रक्तचाप की समस्या हो सकती है। इस तरह के आहार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए नुकसानदायक हैं।

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बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम है नुकसानदायक - फोटो : istock
स्क्रीनटाइम बढ़ने के साइड-इफेक्ट्स

बच्चों का मोबाइल-कंप्यूटर और टीवी जैसे स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहना उनके शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए नुकसानदायक है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण आंखों की गंभीर समस्याओं के विकसित होने का जोखिम रहता है, बच्चों में चश्मा लगने के लिए यह एक प्रमुख कारणों में से है।

इसके अलावा स्क्रीन टाइम बढ़ना, बच्चों के सामाजिक कौशल और सीखने की क्षमता को भी कम करता हुआ देखा गया है। यह नींद की समस्याओं का भी कारण बनता है। 
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बच्चों में नींद की बढ़ती समस्या - फोटो : Pixabay
रात में देर से सोने की आदत

स्लीप साइकिल पर ध्यान देना सभी उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। रात में देर से सोना या नींद पूरी न होने के कारण न सिर्फ कई तरह की हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर देखा गया है। 10 साल से कम आयु के बच्चों के लिए रात में 7-9 घंटे की निर्बाध नींद आवश्यक है, इसमें कमी के कराण थकान, मूड की समस्या और दीर्घकालिक तौर पर इसका हृदय स्वास्थ्य पर भी असर देखा गया है।
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बच्चों के लिए जरूरी है योग-व्यायाम - फोटो : Istock
व्यायाम की कमी को सुधारें

बच्चों में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता और व्यायाम की कमी को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी गंभीर मानते हैं। कम उम्र में ही बच्चों में कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और हृदय रोग से संबंधित जोखिम देखे जा रहे हैं, इसके लिए शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख कारक है।
 
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योग और व्यायाम - फोटो : Istock
इसके अलावा व्यायाम की कमी के कारण बच्चों में मोटापे की दिक्कत भी बढ़ रही है, जिसके कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
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बच्चे की सेहत का रखें ख्याल - फोटो : unicef india
 
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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