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Cancer Alert: 30 की उम्र में भी हो सकता है ये खतरनाक कैंसर, खानपान की इन गड़बड़ियों का सबसे बड़ा रोल

Sun, 02 Aug 2026 07:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोलन कैंसर के सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा समय पर जांच के जरिए इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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कोलन कैंसर - फोटो : Amarujala.com/AI
कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी देखी जा रही है, इसने कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को और भी बढ़ा दिया है। लिहाजा अब कम उम्र के लोग भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने लगे हैं।

पुरुषों में फेफड़े-मुंह और प्रोस्टेट कैंसर जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि कोलन कैंसर का खतरा भी अब पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो गया है।  विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ आनुवंशिक कारणों के साथ खराब जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव जैसी कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं।

आइए जानते हैं कि कहीं आपको भी तो इस गंभीर समस्याओं का खतरा नहीं है?
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कोलन कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
कोलन कैंसर का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार कोलन कैंसर, बड़ी आंत में शुरू होने वाली समस्या है। इसमें कोशिकाओं की अनियंत्रित तरीके से वृद्धि होने लग जाती है। ज्यादातर लोगों में इसका पता ही तब चल पाता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।   
 
  • असल में कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण पेट की सामान्य समस्याओं जैसे मल से खून आने, लगातार कब्ज या दस्त और पेट दर्द जैसे होते हैं। 
  • यही कारण है कि लोग समय पर ध्यान नहीं देते हैं। जब इसका पता चलता है तब तक ये बीमारी काफी फैल चुकी होती है।

डॉक्टर कहते हैं, यदि कैंसर केवल कोलन तक सीमित हो तो इलाज की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों तक फैलने पर उपचार जटिल हो जाता है। इसी कारण समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है।
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कोलन कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
कम उम्र में बढ़ रहे हैं मामले

कोलन कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का अधिक सेवन, खाने में फाइबर की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या इसका बड़ा कारण हो सकती है।

आइए जानते हैं कि खाने-पीने की कौन सी चीजें इसका जोखिम बढ़ा रही हैं?

रेड मीट ज्यादा खाना नुकसानदायक

कैंसर अनुसंधान एजेंसी (आईएआरसी) की रिपोर्ट के अनुसार प्रोसेस्ड मीट और रेड मीट ज्यादा खाना कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। 
 
  • ज्यादा तापमान पर इसे पकाने के दौरान बनने वाले कुछ खास कंपाउंड्स जैसे हीम आयरन, एन-नाइट्रोसो कंपाउंड्स और हेटेरोसाइक्लिक एमाइन्स इसका बड़ा कारण हो सकते हैं।
  • इसी तरह से प्रोसेस्ड मीट में केमिकल एडिटिव्स के तौर पर नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो पाचन तंत्र में कैंसर को बढ़ावा देने वाले कंपाउंड्स बनने का कारण बनते हैं।

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खान-पान में फाइबर की कमी - फोटो : Freepik.com
खाने में फाइबर की कमी 

फाइबर आंतों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। यह मल को नरम रखता है, पाचन को बेहतर बनाता है और गुड बैक्टीरिया को पोषण देता है। 
 
  • जब भोजन में साबुत अनाज, फल-सब्जियां, दालों की मात्रा कम होती है तो इससे फाइबर की मात्रा भी घट जाती है। 
  • इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है और आंतों की गतिविधि भी प्रभावित हो सकता है। 
  • कई अध्ययनों में फाइबर की कमी को कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला पाया गया है।
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शराब-धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com
ज्यादा शक्कर और शराब-सिगरेट की आदत

कोल्ड ड्रिंक, केक, कुकीज जैसी चीजें ज्यादा खाने से मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ाता है। मोटापा कोलोरेक्टल कैंसर का बड़ा कारण है। ज्यादा चीनी भी मोटापा और कैंसर का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।

धूम्रपान और शराब को भी विशेषज्ञ कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार मानते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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