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कोरोना संक्रमण: हल्की हवा भी चले तो छह फीट की दूरी काफी नहीं, बढ़ाने होंगे फासले

Wed, 20 May 2020 04:40 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सोशल डिस्टेंसिंग: पर्याप्त नहीं 6 फीट की दूरी - फोटो : Pexels
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इससे बचने को तमाम तरह के उपाय सुझाए जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी कोरोना संक्रमण को रोकने में सबसे बड़ा उपाय साबित हुई है। देश में समय रहते लगाए गए लॉकडाउन के कारण ही कोरोना संक्रमण के मामले इटली, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के मुकाबले कम है। कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा भी देश में अपेक्षाकृत कम है। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में सामाजिक दूरी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को छह फीट की दूरी बनाए रखने का निर्देश है, लेकिन क्या यह दूरी पर्याप्त होगी?
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Social Distancing - फोटो : Social Media
एक अध्ययन के मुताबिक, छह फीट की सामाजिक दूरी बनाने के मौजूदा दिशा निर्देश कोरोना संक्रमण को रोक पाने में अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। इस अध्ययन में कहा गया है कि धीमी गति से चलने वाली हवा में हल्की खांसी से मुंह की लार के छीटें 18 फीट की दूरी तक फैल सकती हैं।
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लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन(File Photo) - फोटो : PTI
साइप्रस में निकोसिया विश्वविद्यालय में यह शोध अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि चार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली मद्धिम हवा के साथ खांसने पर मुंह के लार की छीटें पांच सेकंड में 18 फीट की दूरी तक फैल सकती हैं। और अगर लार के ये द्रव कण कोरोना संक्रमित की हो तो संपर्क में आने वाले व्यक्ति को भी संक्रमण का खतरा है। 

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Social Distancing
अध्ययन के सह-लेखक दिमित्री द्रिकाकिस के मुताबिक ये सुक्ष्म बूंदें अलग-अलग कद काठी के वयस्कों और बच्चों को प्रभावित करेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर छोटी कद काठी के वयस्क और बच्चे लार की सुक्ष्म बूंदें गिरने के दायरे के भीतर आते हैं तो उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है। 
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कई जगहों पर सामाजिक दूरी का महत्व नहीं समझ रहे हैं लोग(File Photo) - फोटो : पीटीआई
मालूम हो कि देश में 18 मई के बाद लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया है, जो 31 मई तक चलेगा। इस दौरान राज्य सरकारों ने अपनी ओर से नियमन कर आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी है। सड़कों पर आवाजाही भी बढ़ी है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। 
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