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Chronic Pain: शरीर में अक्सर बना रहता है दर्द तो हो जाइए सावधान, जल्दी करा लें इलाज वरना हो सकता है डिप्रेशन

Tue, 11 Mar 2025 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्रोनिक दर्द की स्थिति मूड, नींद, सामाजिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न कर सकती है।
आमतौर पर ये दर्द सामान्य उपायों और दवाओं से ठीक हो जाते हैं पर अगर आपको लगातार दिक्कत बनी रहती है तो सावधान हो जाइए। क्रोनिक दर्द की स्थिति मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और डिप्रेशन (अवसाद) का भी कारण बन सकती है। 
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अक्सर दर्द से रहते हैं परेशान? - फोटो : Freepik.com
शरीर में दर्द होना सामान्य है, इसके कई कारण हो सकते हैं। हालांकि अक्सर या लगातार होते रहने वाले दर्द की स्थिति आपको काफी असहज कर देने वाली हो सकती है। शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली से जुड़ी दिक्कतें आपको दर्द की अनुभव करा सकती हैं। मांसपेशियों में तनाव जैसे ज्यादा बैठने या गलत पोस्चर, चोट-मोच या सूजन और संक्रमण के कारण आपको दर्द हो सकता है। इसके अलावा कुछ मानसिक स्थितियां जैसे तनाव और चिंता के कारण भी आपको सिरदर्द, गर्दन या पीठ में दर्द हो सकता है।

आमतौर पर इस तरह के दर्द सामान्य उपायों और दवाओं से ठीक हो जाते हैं पर अगर आपको लगातार ये दिक्कत बनी रहती है तो सावधान हो जाइए। क्रोनिक दर्द की स्थिति मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और डिप्रेशन (अवसाद) का भी कारण बन सकती है। 
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स्ट्रेस-डिप्रेशन की समस्या - फोटो : Freepik.com
लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द से डिप्रेशन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि पुराने या लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द से पीड़ित 40% वयस्कों में अवसाद का खतरा हो सकता है। फाइब्रोमायल्जिया, कमर दर्द और आर्थराइटिस से पीड़ित लोग हों या नोसिप्लास्टिक के दर्द के शिकार, ऐसे मरीजों में डिप्रेशन होने का जोखिम सबसे ज्यादा देखा गया है।

नोसिप्लास्टिक का दर्द तब उत्पन्न होता है जब नर्वस सिस्टम के दर्द को प्रोसेस करने के तरीके में बदलाव आ जाता है। वहीं, फाइब्रोमायल्जिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज को शरीर में व्यापक दर्द, थकान, नींद और मूड संबंधी विकार होते हैं।
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पैरों में दर्द की समस्या - फोटो : Adobe
अध्ययन में क्या पता चला?

जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जामा)
में प्रकाशित शोध में 50 देशों के 3.5 लाख से अधिक लोगों के 376 सर्वेक्षणों का विश्लेषण किया गया। सबसे अधिक रिपोर्ट की गई क्रोनिक दर्द की स्थितियों में फाइब्रोमायल्जिया, कमर दर्द और आर्थराइटिस (रुमेटाइड अर्थराइटिस) शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि पुराने दर्द वाले मरीजों की मानसिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होनी चाहिए। तीव्र दर्द किसी चोट या सर्जरी के कारण हो सकता है, लेकिन इसके पुराने दर्द में बदलने की प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक कारकों की भूमिका हो सकती है। 1970 के दशक में विकसित बायोसाइकोसोशल मॉडल के अनुसार, दर्द का अनुभव जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों से प्रभावित होता है।

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डिप्रेशन का खतरा - फोटो : Freepik.com
दर्द का डिप्रेशन से क्या रिश्ता है?

क्रोनिक दर्द की स्थिति मूड, नींद, सामाजिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न कर सकती है और इसका आत्म-सम्मान पर भी प्रभाव पड़ता है। क्रोनिक दर्द मूड को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे उदासी, हताशा और चिड़चिड़ापन की भावनाएं बनी रह सकती हैं, जो अवसाद के लक्षण हैं। दर्द की स्थिति नींद के पैटर्न को भी बाधित कर देती है, जिससे थकान और मूड से संबंधित दिक्कतें होती हैं। लंबे समय में इस वजह से अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।

न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो के डॉ. ब्रॉन्विन थांपसन के अनुसार, उदाहरण के लिए कमर दर्द या गठिया जैसी स्थितियों का इलाज अक्सर दर्द की तीव्रता को सीमित ही कर पाता है, इसलिए मरीजों को लंबे समय तक दर्द के साथ जीना पड़ता है। ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की डॉ. डेबी बीन ने बताया कि पुराना दर्द काम और रिश्तों को भी प्रभावित करने लगता है। चिंता और अवसाद शरीर के दर्द प्रतिक्रिया तंत्र को बदल देते हैं।


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दर्द और मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित

शोध के लेखकों के अनुसार, महिलाओं, युवाओं और नोसिप्लास्टिक दर्द (दर्द की अनुभूति में परिवर्तन के कारण) से पीड़ित लोगों में अवसाद और चिंता की आशंका सबसे अधिक होती है। महिलाओं में इसका कारण हार्मोनल चक्र और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। द लैंसेट के एक 2023 के अध्ययन के मुताबिक, खराब नींद, तनाव, थकान और मोटापा (बीएमआई 30 से अधिक) जैसे कारक तीव्र दर्द को क्रोनिक दर्द में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Prevalence of Depression and Anxiety Among Adults With Chronic Pain


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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