फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bloating: क्या आपका भी गड़बड़ रहता है पाचन और अक्सर फूला रहता है पेट? कहीं ये कोई गंभीर बीमारी तो नहीं

Tue, 11 Mar 2025 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पेट फूलने के साथ दर्द होते रहने का सबसे आम कारण आंतों में अत्यधिक गैस हो जाना है। अगर भोजन के बाद आपका पेट फूल जाता है, तो यह पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। पर अगर अक्सर ये दिक्कत बनी रहती है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
1 of 5
पेट फूलने और कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
खान-पान में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। पेट फूलना (ब्लोटिंग) ऐसी ही एक आम समस्या है। ये स्थिति काफी असहज करने वाली हो सकती है। ब्लोटिंग के कारण पेट कड़ा या भरा हुआ रहता है और कई बार पेट में दर्द भी हो सकता है। कुछ स्थितियों में पेट फूला हुआ न भी हो, तो भी ऐसा महसूस हो सकता है। 

पेट फूलना आमतौर पर पाचन संबंधी समस्या है, हालांकि कुछ स्थितियों में हार्मोन्स में असंतुलन और तनाव के कारण भी ये दिक्कत हो सकती है। जिन लोगों को अक्सर ब्लोटिंग की दिक्कत बनी रहती है उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए, कई मामलों में ये गंभीर अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का भी लक्षण हो सकता है जिसका समय पर इलाज किया जाना जरूरी है। 
विज्ञापन

2 of 5
पेट की समस्या - फोटो : Freepik.com
पेट फूलने की समस्या के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पेट फूलने के साथ दर्द होते रहने का सबसे आम कारण आंतों में अत्यधिक गैस हो जाना है। अगर भोजन के बाद आपका पेट फूल जाता है, तो यह पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। इसके अलावा महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के कारण भी अस्थायी सूजन की दिक्कत देखी जाती है। कभी-कभी पेट फूलना अधिक गंभीर चिकित्सा स्थिति का संकेत भी हो सकता है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) से पीड़ित लोगों में यह दिक्कत अक्सर देखी जाती है। 75% तक महिलाओं को पीरियड्स से पहले और उसके दौरान पेट फूलने की समस्या होती है। 
विज्ञापन

3 of 5
पाचन की समस्या क्यों होती है? - फोटो : Adobe Stock
क्यों होती है ब्लोटिंग की दिक्कत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पेट फूलने के मुख्य कारण आमतौर पर खान-पान में होने वाली गड़बड़ी है। 

अधिक गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, गोभी, ब्रोकली और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के अधिक सेवन के कारण आपको ब्लोटिंग की दिक्कत होती है। जिन लोगों को लैक्टोज इंटॉलरेंस की समस्या होती है, उन्हें दूध, पनीर या आइसक्रीम खाने के बाद पेट फूलने का एहसास हो सकता है। जल्दी-जल्दी खाना खाने, अत्यधिक तला-भुना भोजन करने या फिर खाने के बाद तुरंत आराम करने की आदत भी पेट फूलने की दिक्कतों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

4 of 5
खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?

आमतौर पेट फूलने को ज्यादा गंभीर नहीं माना जाता है और ये सामान्य दवाओं और घरेलू उपायों से ठीक भी हो जाती है। हालांकि अगर आपको ये दिक्कत अक्सर बनी रहती है तो संभव है कि ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। 
  • पाचन क्रिया धीमी होना या कब्ज के कारण भोजन सही से नहीं पचता, जिससे गैस बनती है, इसके कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 
  • इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के कारण अगर ये दिक्कत है तो इसका समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी हो जाता है।
  • मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को पेट फूलना की दिक्कत हो सकती है।
  • थायरॉइड की समस्या (हाइपोथायरायडिज्म) से मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे पाचन पर असर पड़ता है।
  • सीलिएक रोग, पाचन तंत्र में ट्यूमर और कुछ प्रकार के कैंसर के कारण भी ये दिक्कत बनी रह सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पेट की समस्याओं को न करें अनदेखा - फोटो : Freepik.com
इस समस्या से कैसे बचाव किया जाए?

पेट फूलने की समस्या से बचे रहने के लिए खान-पान में सुधार बहुत जरूरी है। ऐसी चीजों का सेवन करें जिससे कम गैस बनती हो जैसे खीरा, केला, पपीता, दही आदि। इसके अलावा भोजन को धीरे-धीरे और चबाकर खाएं।

अगर आपको दूध और ग्लूटेन युक्त चीजों से दिक्कत होती है तो इसका सेवन न करें।  प्रोबायोटिक्स वाली चीजें जैसे दही, छाछ हेल्दी गट बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं इससे पाचन ठीक रहता है और पेट फूलने का खतरा कम होता है। इसके साथ ज्यादा पानी पीना भी आपके पाचन के लिए जरूरी है। नियमित व्यायाम की मदद से भी पेट की दिक्कतों से बच सकते हैं।

यदि आपको लगातार पेट फूलने की दिक्कत बनी रहती है, खून की उल्टी या काले रंग का मल होता है या फिर  पेट में अक्सर दर्द बना रहता है तो इसके कारणों को जानना और डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।



---------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें