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कोरोना का असर: अवसाद के शिकार हो रहे हैं बच्चे और बुजुर्ग, कैसे रखें इनका ख्याल?

Sun, 02 May 2021 08:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना के कारण बढ़ रहे हैं अवसाद के मामले - फोटो : Social Media
डॉ दीपाली बत्रा
मनोरोग विशेषज्ञ 


कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को एक बार फिर से घरों में कैद रहने को मजबूर कर दिया है। कई राज्यों में सरकारों ने लॉकडाउन का भी ऐलान कर दिया है। ऐसी स्थिति में हम लगभग एक बार फिर से वहीं पहुंच गए हैं, जहां एक साल पहले थे। घरों में लंबे समय तक बंद रहने और हर तरफ से नकारात्मक खबरें मिलते रहने का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है। इसके सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसे समय में बच्चों और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल कैसे रखा जाए? इन्हें तनाव और अवसाद से बचाने के लिए किन उपायों को प्रयोग में लाया जा सकता है?
आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं?
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बुजुर्गों के लिए चुनौतीपूर्ण है यह समय - फोटो : Pixabay
कैसे रखें बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान
अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान मनोरोग विशेषज्ञ डॉ दीपाली बत्रा कहती हैं कि यह समय घर में मौजूद बुजुर्गों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण है। घर के अन्य लोगों की जिम्मेदारी बन जाती है कि आप ऐसे विपरीत माहौल में सीनियर सिटीजन के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें। घर के बुजुर्गों के साथ समय बिताएं, उनसे उनके अनुभवों के बारे में जानें। ऐसा करके आप न सिर्फ उन्हें बोरियत से बचा पाएंगे साथ ही उनका जीवन के प्रति अनुभव आपके भी काफी काम आ सकता है। 
 
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कोरोना ने माहौल को कर दिया है नकारात्मक - फोटो : Pixabay
चारों तरफ है नकारात्मकता का माहौल
डॉ दीपाली बत्रा बताती हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की समस्याएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। इस लहर में अब तक कोई आशा की किरण दिख नहीं रही है। लगभग हर किसी के जानने वाले परेशान हैं ऐसे में यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती दिख रहा है। कोई लोग तो इतने घबराए हुए हैं कि उन्हें लगने लगा है कि अगर फोन बजा तो जरूर कोई बुरी खबर सुनने को मिलेगी। ऐसा दौर हर किसी के लिए बेहद कठिन है।

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बच्चों के व्यवहार में दिख रहा है बदलाव - फोटो : pixabay
अवसाद और भय के शिकार हो रहे हैं बच्चे  
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए डॉ विनय अग्रवाल ने अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान बताया कि महामारी के कारण पड़े सामाजिक व्यवधान ने बच्चों को शारीरिक और भावनात्मक रूप से बहुत प्रभावित किया है। ऑनलाइन क्लासेज, आसपास के लोगों से दूर रहना, घरों में आइसोलेशन, बाहर खेल न पाना और माता-पिता के गुस्से ने बच्चों में भय, अवसाद और ऊब की भावना पैदा कर दी है। 
 
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तनाव को दूर करने की कोशिश करें - फोटो : pixabay
नकारात्मक चीजों से कैसे बनाएं दूरी
डॉ दीपाली कहती हैं कि ऐसे समय में जब हर तरफ से बुरी खबरें ही सुनने को मिल रही हैं, लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि  कुछ ऐसा करें जिससे आपको खुशी मिले। लोगों से फोन पर अच्छी बातें करें। निश्चित ही ऐसे माहौल में खुशी ढूंढ पाना कठिन है फिर भी आपको कोशिश जरूर करते रहना चाहिए। 

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नोट: यह लेख मनोवैज्ञानिक डॉ दीपाली बत्रा और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएमए डॉ विनय अग्रवाल से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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