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Chikungunya Symptoms: बरसात में क्यों बढ़ जाता है चिकनगुनिया का खतरा? जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

Sun, 13 Jul 2025 01:33 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chikungunya Symptoms: मानसून में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, और चिकनगुनिया इनमें से एक गंभीर समस्या है। इस दौरान इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं, जिससे सावधान रहना जरूरी है। आइए, इस लेख में हम चिकनगुनिया के लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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बुखार - फोटो : Adobe Stock
Chikungunya Symptoms: मानसून का मौसम अपने साथ बारिश की फुहारें, सुहानी ठंडक और एक खास ताजगी लेकर आता है। पर इन सब के साथ, वातावरण में अधिक नमी होने की वजह से कुछ स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। इन्हीं में से एक है चिकनगुनिया, एक ऐसी गंभीर बीमारी जो बरसात के दिनों में तेजी से फैलने लगती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का मुख्य कारण भी यही है, क्योंकि इस मौसम में चिकनगुनिया के मामले लगातार बढ़ने लगते हैं।

यह सिर्फ एक सामान्य बुखार नहीं, बल्कि एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से एडीस मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर बारिश के पानी में पनपते हैं, और इनकी बढ़ती संख्या चिकनगुनिया के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। इसलिए, यह बेहद जरूरी है कि हम इस मौसम में न सिर्फ बारिश का लुत्फ उठाएं, बल्कि इसके साथ आने वाले स्वास्थ्य खतरों, खासकर चिकनगुनिया के प्रति भी जागरूक रहें और सावधानियां बरतें। आइए इस लेख में जानते हैं कि इस मौसम में चिकनगुनिया का खतरा क्यों बढ़ जाता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
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बुखार - फोटो : Adobe Stock
बरसात में क्यों बढ़ जाता है चिकनगुनिया का खतरा?
मानसून के मौसम में मच्छर तेजी से पनपने लगते हैं। बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, जैसे कूलर में, गमलों में, टायरों में, खुले बर्तनों में, और छतों पर। इन जमे हुए स्थिर पानी में एडीज मच्छर आसानी से पनपने लगते हैं। ये मच्छर दिन के समय काटते हैं, और इनकी संख्या बढ़ने के साथ ही चिकनगुनिया के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, बारिश में बढ़ी हुई नमी और तापमान भी इन मच्छरों के विकास के लिए अनुकूल होते हैं, जिससे वे तेजी से पनपते हैं और बीमारी फैलाते हैं।

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बुखार - फोटो : Adobe Stock

चिकनगुनिया के प्रमुख लक्षण

चिकनगुनिया के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 3-7 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसके लक्षण डेंगू और जीका जैसी अन्य मच्छर जनित बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन कुछ खास बातें इसे अलग बनाती हैं-

तेज बुखार
अचानक तेज बुखार आना (102-104°F तक) इसका एक प्रमुख लक्षण है। यह बुखार कुछ दिनों से लेकर एक हफ्ते तक रह सकता है।

गंभीर जोड़ों का दर्द
यह चिकनगुनिया का सबसे विशिष्ट और गंभीर लक्षण है। इसमें अक्सर शरीर के दोनों तरफ के जोड़ों में भयानक दर्द होता है, खासकर घुटनों, टखनों, कलाईयों और उंगलियों में। यह दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि इसमें चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में, यह दर्द कई हफ्तों, महीनों या यहां तक कि वर्षों तक बना रह सकता है।

अन्य लक्षण
तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द, शरीर पर लाल या गुलाबी रंग के चकत्ते (रैश) निकलना, मतली, उल्टी, और अत्यधिक कमजोरी व थकान भी इसके आम लक्षण हैं। यदि ये लक्षण किसी को भी दिखते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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डेंगू का मच्छर - फोटो : social media

चिकनगुनिया से बचाव के उपाय

चूंकि चिकनगुनिया का कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज नहीं है, इसलिए इसके बचाव पर ध्यान देना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

मच्छरों के प्रजनन को रोकें
अपने घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पक्षियों के पानी के बर्तन, पुरानी टायर, और छत पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें और सुखाएं। 

व्यक्तिगत सुरक्षा
रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए। शरीर पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करें। घर में कॉइल, लिक्विड वेपोराइजर आदि का उपयोग करें।

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मच्छर - फोटो : Freepik.com
कपड़ों का चुनाव
ऐसे कपड़े पहनें जो आपके शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढक सकें, जैसे पूरी बाजू की शर्ट और लंबी पैंट पहनें।

घर को सुरक्षित रखें
अपने घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें। घर और आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। याद रखें, रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। अपने लक्षणों को पहचानें और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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