फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus Test: एक्स-रे से चार सेकेंड में कोरोना की जांच, IIIT भागलपुर की खोज- खर्च 100 रुपए से भी कम

विज्ञापन
1 of 10
Coronavirus Test: न्यूनतम समय और खर्च में कोरोना की जांच - फोटो : iStock/Amar Ujala
देश और दुनिया में बढ़ती जा रही महामारी कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए सबसे प्राथमिक चुनौती है- इसकी जांच। कोरोना वायरस की जांच के लिए दुनियाभर में तमाम तरह के जांच किट बनाए और विकसित किए जा चुके हैं। कम समय और कम खर्च में कोरोना जांच करना शुरुआत से ही चुनौती बना हुआ है। इसी चुनौती को बिहार के भागलपुर स्थित ट्रिपल आईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) ने पार कर लिया है। ट्रिपल आईटी के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की जांच के लिए नई तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए दो से चार सेकेंड में रिपोर्ट बता दी जाएगी। कोरोना के साथ ही यह तकनीक टीबी और निमोनिया की भी रिपोर्ट देगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी इसके लिए संस्थान को बधाई दी है। 
विज्ञापन

2 of 10
chest x-ray - फोटो : social media
  • दरअसल ट्रिपल आइटी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने एक्स-रे और सिटी स्कैन के इमेज को देख कर कोरोना पॉजिटिव या निगेटिव रिपोर्ट देने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया है। करीब दो महीने पहले इस सॉफ्टवेयर को स्वास्थ्य मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया था।
  • मंत्रालय ने इस सॉफ्टवेयर की जांच की जिम्मेदारी आईसीएमआर यानी भारतीय आयुर्विज्ञान शोध परिषद को सौंपी है। आईसीएमआर ने सॉफ्टवेयर की जांच करने के बाद इसको स्वीकृति दे दी है और जल्द ही अप्रूवल सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया जाएगा। 
विज्ञापन

3 of 10
सीटी स्कैैन(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
जल्द शुरू होगा इस्तेमाल
  • अमर उजाला से दूरभाष पर बातचीत में ट्रिपल आइटी के निदेशक प्रो. अरविंद चौबे ने बताया कि मंगलवार तक इस सॉफ्टवेयर के अप्रूवल का सर्टिफिकेट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद सॉफ्टवेयर की लॉन्चिंग के लिए उस आईटी कंपनी को लाइसेंस दिया जाएगा, जो कंपनी इसके व्यावसायिक प्रयोग और विपणन को इच्छुक होगी। उन्होंने बताया कि इस सॉफ्टवेयर के प्रोग्रामर सहायक प्रो. संदीप राज हैं। 

4 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • प्रो. अरविंद ने बताया कि फिलहाल सरकार को एक मरीज के लिए दो बार(पहली बार और फिर स्वस्थ होने के बाद) जांच करनी पड़ रही है, जिसके लिए पांच हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। निजी स्तर पर लोगों को इससे ज्यादा ही खर्च लग रहा है। वहीं, इस सॉफ्टवेयर के जरिए महज एक्स-रे के खर्च पर 100 से 400 रुपये में कोरोना के मरीजों की दो से तीन बार जांच हो जाएगी। 
विज्ञापन

5 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
100 फीसदी सही रिपोर्ट का दावा
  • ट्रिपल आईटी के निदेशक ने बताया कि आईसीएमआर और एम्स दिल्ली हमारे एक्स-रे और सिटी स्कैन रिपोर्ट की जांच कर चुकी है और इसे 100 फीसदी सफल पाया गया है। उन्होंने कहा कि देश के लगभग सारे प्रखंड या अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में डिजिटल एक्स-रे की मशीन लगी हुई है, जहां नि:शुल्क जांच की सुविधा है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए न्यूनतम खर्च में और कुछ सेकेंड में कोरोना की जांच हो पाएगी। 
विज्ञापन

6 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चार सेकेंड में रिपोर्ट
  • प्रो. अरविंद के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिना टेस्ट किट की सहायता से कोरोना संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। इस सॉफ्टवेयर में केवल छाती का एक्स-रे और सिटी स्कैन इमेज को अपलोड करना होगा। इस सॉफ्टवेयर के जरिए महज चार सेकेंड में पता लगाया जा सकेगा कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। 
विज्ञापन

7 of 10
Research
न्यूनतम खर्च में जांच
  • प्रो. अरविंद ने बताया कि फिलहाल सरकार को एक मरीज के लिए दो बार(पहली बार और फिर स्वस्थ होने के बाद) जांच करनी पड़ रही है, जिसके लिए पांच हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। निजी स्तर पर लोगों को इससे ज्यादा ही खर्च लग रहा है। वहीं, इस सॉफ्टवेयर के जरिए महज एक्स-रे के खर्च पर 100 से 400 रुपये में कोरोना के मरीजों की दो से तीन बार जांच हो जाएगी। 

8 of 10
chest x-ray - फोटो : social media
कैसे काम करती है तकनीक
  • कोरोना संक्रमण के बाद मरीज के फेफड़े पर किस तरह के प्रभाव पड़ते हैं, इसका एक्स-रे और सिटी स्कैन रिपोर्ट में स्पष्ट पता चल जाता है। ऐसे हजारों मरीजों के एक्स-रे और सिटी स्कैन रिपोर्ट को इस सॉफ्टवेयर में अपलोड कर दिया गया है। जब किसी नए कोरोना संदिग्ध की एक्स-रे और सिटी स्कैन इमेज का इनपुट दिया जाता है तो यह टैली कर के बता देता है कि कोरोना संक्रमण है या नहीं। 

9 of 10
Research - फोटो : Amar Ujala
बढ़ जाएगी जांच की रफ्तार
  • प्रो. चौबे ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर की सहायता से देश में बिना किट के कोरोना जांच की रफ्तार बढ़ जाएगी। अगर सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, अनुमंडल और सदर अस्पताल में इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग हो तो सिर्फ एक्स-रे या सिटी स्कैन इमेज के सहारे कोरोना जांच हो पाएगी। फिलहाल कोरोना की जांच रिपोर्ट आने में दो से पांच दिन तक लग जा रहा है, लेकिन इस जांच प्रक्रिया की मदद से मरीजों का इलाज तत्काल शुरू हो पाएगा। 
विज्ञापन

10 of 10
रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
  • मालूम हो कि भागलपुर समेत देश के सभी ट्रिपल आईटी का संचालन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन होता है। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी इसके लिए संस्थान को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी और ट्रिपल आईटी के निदेशक को बधाई देते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर की सहायता से कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच होगी। यह जांच बहुत सस्ती होगी। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें